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पाकिस्तान में मार दिए गए आतंकी शाहिद लतीफ का अनंतनाग एनकाउंटर में क्या हाथ था?

अनंतनाग एनकाउंटर में ही भारतीय सेना के एक कर्नल, मेजर और जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी शहीद हो गए थे.

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शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

पाकिस्तान में 11 अक्टूबर को भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी शाहिद लतीफ (Shahid Latif) की हत्या हो गई. उसकी हत्या किसने की, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान (Pakistan) के सियालकोट शहर की एक मस्जिद के अंदर अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी.

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नमाज़ के वक्त गोलियां चलीं

जम्मू में मौजूद भारत-पाकिस्तान के सुचेतगढ़ बॉर्डर से पाकिस्तान की तरफ लगभग 40 मिनट चलने पर एक शहर पड़ता है, सियालकोट. यहां पर एक मस्जिद और साथ में लगायत मदरसा है. 11 अक्टूबर, भोर के करीब साढ़े 5 बजे. इस समय पाकिस्तान की एक बड़ी आवाम नींद से नहीं जागी थी. सियालकोट की इसी मस्जिद में फ़ज्र की नमाज़ अदा की जा रही थी. तभी गोलियों की आवाज सुनाई दी.

गोलियां जब शांत हुईं तो मस्जिद के अंदर दो लाशें दिखाई दीं. एक था जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी शाहिद लतीफ और दूसरा था उसका गार्ड. दोनों को प्वाइंट ब्लैंक रेंज से अनजान शूटरों ने गोली मार दी थी. लतीफ की हत्या के बारे में सियालकोट के SSP हसन ने मीडिया से बात की. उन्होंने ये जानकारी दी कि शाहिद लतीफ की जान को लंबे समय से खतरा था.

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आतंकियों का लॉन्च कमांडर था लतीफ

शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन. पिता का नाम अब्दुल लतीफ. साल 1970 में पैदाइश हुई पाकिस्तान के गुजरांवाला के मोरे अमीनाबाद गांव में. युवा था तभी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ गया. काम करने का ठिकाना बनाया सियालकोट को. वही सियालकोट जहां उसे मार डाला गया और काम मिला आतंकियों की लॉन्चिंग करने का. उसे आतंकियों का लॉन्च कमांडर भी कहा जाता था. 

जैश के जिस भी आतंकी को भारत समेत किसी भी देश में किसी कार्रवाई को अंजाम देना होता तो उनकी मदद लतीफ करता था. आतंकियों के भारत में घुसने, उनके कहीं भी आने-जाने और रहने का इंतजाम करता था. ऑपरेशन के दौरान उनसे लगातार बातचीत करता, निर्देश देता. बेसिकली लतीफ हैंडलर का काम करता था. साल 1994 में लतीफ को भारत में अरेस्ट किया गया था और साल 2010 में रिहा कर दिया गया. रिहाई कैसे और किन हालातों में हुई थी, ये आगे बताएंगे.

कंधार हाईजैक से लतीफ का कनेक्शन

पहले लतीफ पर लगे आरोपों के बारे में जान लीजिए. चलते हैं साल 1999 में. इस साल की 24 दिसंबर को नेपाल के काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडियन एयरलाइंस का एक जहाज उड़ा. IC 814. जहाज में 154 लोग सवार थे. उसे कुछेक घंटों में दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करना था, लेकिन प्लेन को अगवा कर लिया गया. प्लेन में ही बैठे पांच आतंकियों ने इस प्लेन को अगवा किया था. ये आतंकवादी हरकत-उल-मुजाहिदीन आतंकी संगठन से जुड़े थे. वो इस प्लेन को दिल्ली ले जाने के बजाय पहले अमृतसर ले गए. फिर लाहौर, दुबई से होते हुए आखिर में अफगानिस्तान के कंधार में इसे जबरदस्ती लैंड करवाया गया.

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इस हाईजैकिंग के बदले में आतंकियों ने भारत की जेलों में बंद कुछ आतंकियों को छोड़ने की मांग की थी. 7 दिनों तक यात्री बंधक बनकर कंधार एयरपोर्ट पर खड़े प्लेन में बैठे रहे. एक यात्री को आतंकियों ने मार भी डाला. आखिर में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने तीन आतंकियों को रिहा कर दिया. ये तीन आतंकी थे- अहमद ओमर सईद शेख, मसूद अजहर और मुश्ताक अहमद जरगर. इसके बाद इस जहाज और इसमें सवार सभी लोगों को भारत लाया जा सका.

इनमें सबसे खतरनाक आतंकी था मौलाना मसूद अजहर. वही मसूद अजहर जिसने भारत से रिहा होते ही 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई आतंकी हमले, 2016 के पठानकोट हमले और 2019 के पुलवामा हमले की साजिश रची थी. लेकिन इस हाईजैकिंग के केस से शाहिद लतीफ का भी संबंध है. दरअसल, अपहरण करने वाले आतंकियों ने जिन नामों की लिस्ट भारत सरकार को सौंपी थी, उसमें शाहिद लतीफ का भी नाम था. हालांकि, भारत सरकार ने सिर्फ तीन नामों पर ही हामी भरी.

शाहिद लतीफ की रिहाई के लिए जब आतंकियों ने प्रेशर डाला था, तो उसका कारण भी था. लतीफ, मसूद अजहर का करीबी भी था और जेल में भी मसूद के साथ रहा था. वो भारत में घुसपैठ करवाने में माहिर था, लेकिन सरकार ने उसे नहीं छोड़ा. लतीफ जेल में ही रह गया. पहले जम्मू-कश्मीर की जेल में, बाद में वाराणसी सेंट्रल जेल में. अपनी 16 साल की सजा काटता रहा.

पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड था लतीफ?

साल 2010 में लतीफ की 16 साल की सजा खत्म हुई तो तत्कालीन UPA सरकार ने उसे पाकिस्तान डिपोर्ट कर दिया. वो वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान चला गया. इस कदम के लिए UPA सरकार की बहुत आलोचना हुई कि उन्होंने एक आतंकी को देश से जाने दिया. ये आलोचना तब और तीखी हो गई, जब साल 2016 में पंजाब के पठानकोट में भारतीय वायु सेना के एयरबेस पर हमला हुआ. 2 जनवरी की तारीख थी. इस्लामिक टेररिस्ट यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के 4 आतंकी इस एयरबेस में घुस गए. फायरिंग की. वायु सेना के 5 जवान और एक नागरिक की मौत हुई. तीन दिनों तक चले ऑपरेशन के बाद चारों आतंकियों को मार गिराया गया.

जब इस ऑपरेशन की जांच हुई तो पता चला कि इन आतंकियों को भारत में घुसाने, हथियार देने और तमाम तैयारियां कराने में लतीफ का ही हाथ था. 6 साल पहले वो भारत की जेल से छूटकर पाकिस्तान गया और फिर से भारत पर हमला करवा दिया.

लतीफ का नाम अक्सर पाकिस्तानी घुसपैठियों को भारत में घुसाने की कोशिश में आता ही रहा. साल 2022 में NIA ने अपनी चार्जशीट में लतीफ का नाम लिया और कहा कि उसका हाथ भारत-पाकिस्तान की सीमा के पास सुरंग खोदने में रहा है, जिसके बाद कई घुसपैठिए भारत में घुस आए.

कश्मीर के अनंतनाग के कोकरनाग में हुई हिंसा में भी लतीफ का हाथ था. सितंबर के महीने में यहां पर आतंकियों ने हमला किया. भारतीय सेना के 1 जवान, दो अधिकारियों और राज्य की पुलिस के एक अफसर शहीद हो गए. हफ्ते भर चले ऑपरेशन के बाद दो आतंकियों को ढेर किया जा सका. जांच एजेंसियों को पता चला कि इस हमले की प्लानिंग और हथियार देने में लतीफ का हाथ था.

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