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संसद कैंटीन की नई रेट लिस्ट आई है, 'बढ़ोतरी' देखकर हैरान हो सकते हैं

कैल्कुलेटर न निकालें

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संसद की कैंटीन का नया रेट चार्ट आ गया है. (फाइल फोटो)
कोविड-19 की वजह से बहुत कुछ बंद हुआ था. संसद भी ठप हुई थी और उसकी सस्ती कैंटीन भी. कुछ दिन पहले ये कैंटीन फिर खुली थी, सीमित सेवाओं के साथ. लेकिन अब संसद की कैंटीन पूरी तरह फंक्शनल हो गई है. हालांकि इस बार यह नए रेट चार्ट को लेकर चर्चा में है. इसे देखकर लगता है कि ‘महंगाई’ जनता के बीच से निकलकर माननीयों के बीच भी पहुंच गई है. रोटी, चावल, थाली, बिरयानी सब महंगा हो गया है. महंगा सुनकर आप कैल्कुलेटर निकाल लें, उससे पहले बता दें कि महंगा होकर भी ये सब कितने रुपये का है.
संसद कैंटीन में पहले रोटी दो रुपये की थी, जो अब ‘महंगी’ होकर तीन रुपये की हो गई है. बिरयानी 65 रुपए से बढ़कर 100 रुपए की हो गई है. वहीं, पकौड़ा 10 रुपए से बढ़कर 30 रुपये का मिलेगा. वैसे इन रेट्स के लिए महंगे से ज्यादा सूटेबल शब्द होगा- रियलिस्टिक.
Parliament Canteen Rate List 2021 संसद की कैंटीन का नया रेट चार्ट.

नए रेट चार्ट के बाद जहां रोटी सबसे सस्ती मालूम होती है, वहीं सबसे महंगी चीज नॉनवेज बफे लंच होगा. इसकी कीमत 700 रुपये होगी. वेज बफे लंच की कीमत 500 रुपये रखी गई है.
हाल ही में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा था कि संसद की कैंटीन में खाने पर जो सब्सिडी दी जा रही है, उसे अब खत्म किया जाएगा. इसी के बाद तय हो गया था कि संसद की कैंटीन में खाना अब पहले की तुलना में कुछ महंगा होगा. एक अनुमान के मुताबिक, संसद कैंटीन में खाने पर दी जाने वाली सब्सिडी में करीब आठ करोड़ रुपये सालाना खर्च होते हैं. अब तक नॉर्दर्न रेलवे द्वारा संसद कैंटीन चलाई जाती थी. अब कैंटीन चलाने की जिम्मेदारी इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (ITDC) को सौंप दी गई है. रेलवे 52 वर्षों से (1968 से) सांसदों को भोजन उपलब्ध करा रहा था. 2015 में आदेश के बाद भी नहीं हटी थी सब्सिडी बताते चलें कि 2015 में बीजू जनता दल के सांसद वैजयंत जय पांडा ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को पत्र लिखकर संसद की कैंटीन से सब्सिडी वापस लेने की मांग की थी. इस मांग को सुमित्रा महाजन ने मान लिया था और एक आदेश जारी किया था. 31 दिसंबर, 2015 को जारी इस आदेश में कहा गया था कि संसद की कैंटीन अब ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ मॉडल पर चलेगी. सभी खाने की चीजें अपनी उत्पादन लागत पर बेची जाएंगी. यह आदेश 1 जनवरी, 2016 से लागू होना था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वित्त वर्ष 2016-17 में संसद की कैंटीन को 15.40 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, जबकि यह राशि शून्य होनी चाहिए थी. अब फिर से सब्सिडी खत्म की गई है.

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