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पालघर: साधुओं के दोस्त और पड़ोसी बोले- वो परिवार की तरह थे, हमेशा मदद करते थे

कांदिवली में रहने वालों ने बताया, कैसे मॉब लिंचिंग की घटना ने उन्हें तोड़ दिया.

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पिंपलेश्वर महादेव मंदिर के बाहर दोनों साधुओं और ड्राइवर निलेश के लिए पोस्टर लगाए गए. श्रद्धांजलि दी गई. फोटो- सौरभ वक्तानिया.

16 अप्रैल की रात. महाराष्ट्र के पालघर का गड़चिनचले गांव. यहां भीड़ ने तीन लोगों को पीट-पीटकर मार डाला. इनमें जूना अखाड़े के 70 बरस के महाराज कल्पवृक्ष गिरि, 35 बरस के महाराज सुशील गिरि और उनका ड्राइवर नीलेश तेलगड़े शामिल थे. तीनों मुंबई के कांदिवली ईस्ट इलाके के रहने वाले थे. घटना के बाद 'इंडिया टुडे' ने तीनों पीड़ितों के परिवार, दोस्त और पड़ोसियों से बात की. (परिवार से क्या बात हुई, ये जानने के लिए यहां क्लिक
करें.)

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'इंडिया टुडे' के सौरभ वक्तानिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराज कल्पवृक्ष गिरि के दोस्तों और पड़ोसियों ने बताया,

'दोनों महाराज और नीलेश हमारे लिए परिवार की तरह थे. हम सब महाराज के काफी करीबी थे. वो हमारी बहुत मदद करते थे. लॉकडाउन जैसे वक्त पर निलेश उन्हें गुरु राम गिरि महाराज के अंतिम संस्कार के लिए सूरत ले जाने को तैयार हो गया था. हमें मॉब लिंचिंग की घटना की जानकारी अगली सुबह (17 अप्रैल) की सुबह मिली. तीन पुलिसवाले आए थे. बताया कि तीन लोगों की चोरी के शक में हत्या हो गई है. फिर हमने वही घटना कुछ देर बाद टीवी पर देखी. हम लोकल पुलिस स्टेशन गए. वहां पता चला कि हमारे ही तीन लोगों की हत्या हुई है.'

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आगे पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने तीनों के शवों को पुलिस से मांगा, लेकिन पुलिस ने देने से मना कर दिया. कहा कि इसके लिए ऊपर से परमिशन चाहिए. कांदिवली के लोगों को शनिवार (18 अप्रैल) की रात शव मिले. एक व्यक्ति ने बताया,

'शवों की हालत बहुत खराब थी. उन्हें बुरी तरह पीटा गया था. उनके चेहरे तक पहचान में नहीं आ रहे थे.'


Palghar Mob Lynching Incident
पिंपलेश्वर महादेव मंदिर के महाराज सुशील गिरी जी का कमरा, मंदिर से ही लगा हुआ है. फोटो- सौरभ वक्तानिया.

सुशील गिरि महाराज के करीबी दिवाकर गुप्ता, जो कि पिंपलेश्वर महादेव मंदिर के कामकाज में महाराज की मदद करते थे, उन्होंने बताया,

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'मैं बचपन से अपने परिवार के साथ कांदिवली में रहता आया हूं. यहीं पढ़ाई की, यहीं बड़ा हुआ. मेरा परिवार दूसरे गांव शिफ्ट हो गया है, लेकिन मैं महाराज जी के साथ ही रह रहा था. मंदिर के हर काम में उनकी मदद करता था. वो बहुत दयालु थे. उनके मन में किसी के लिए कोई बुराई नहीं थी. मेरे दोस्त जैसे थे. वो जब भी बाहर जाते थे, मुझे मंदिर की चाबी सौंप देते थे.'

आगे दिवाकर ने बताया कि इस बार महाराज ने कहा था कि दो दिन में सूरत से आ जाएंगे, लेकिन वो नहीं आए. आई तो उनकी मौत की खबर आई. दीवाकर ने आगे कहा,

'महाराज जी के निधन के बाद उनके भाई ने कॉल किया, उनका शव भेजने के लिए. हमने कहा कि यहां हमारे पास सही तरीके से अंतिम संस्कार करने की सुविधाएं नहीं हैं. उनका अंतिम संस्कार त्रयंबकेश्वर या गुजरात की किसी जगह पर पूरे विधि-विधान से होना चाहिए. उसके बाद उनके शव को सूरत ले जाया गया, जहां उनकी समाधि भी बनाई जाएगी. लॉकडाउन के कारण उन तीनों को सूरत जाने की परमिशन नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने मुख्य रास्ता छोड़ जंगल से जाने का फैसला किया था.'


Palghar Driver Family
पालघर मॉब लिंचिंग में जिस ड्राइवर की मौत हुई, उनके परिवार वाले. फोटो क्रेडिट- सौरभ वक्तानिया

मंदिर में दी गई श्रद्धांजलि

मुंबई का कांदिवली ईस्ट इलाका. यहां मेन रोड में पिंपलेश्वर महादेव का मंदिर है. सुशील गिरि महाराज (35 बरस) इस मंदिर के पुजारी थे. नीलेश मंदिर के पास ही रहते थे. महाराज के काफी करीबी थे. कल्पवृक्ष गिरि महाराज (70 बरस) नासिक के रहने वाले थे, लेकिन साल में दो बार जोगेश्वरी के वन देवी मंदिर आते थे. दिवाली और नवरात्र के मौकों पर. इस दौरान वो पिंपलेश्वर महादेव मंदिर में सुशील गिरि महाराज से भी मिलते थे. कांदिवली इलाके के सभी लोग दोनों महाराज को अच्छे से जानते थे. इस बार महाराज कल्पवृक्ष गिरि वापस नासिक नहीं जा पाए थे, लॉकडाउन के कारण.

इस बीच महाराज कल्पवृक्ष गिरि के गुरु महाराज राम गिरि का निधन हो गया था, उन्हीं के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे. महाराज सूरत में अपने गुरु की समाधि बनाना चाहते थे. कांदिवली से बाहर जाने के लिए उन्होंने पुलिस से परमिशन लेने की कोशिश की थी, लेकिन मिली नहीं थी, लेकिन फिर उन्होंने बिना परमिशन के जाने का फैसला कर लिया. नीलेश उन्हें ले जाने के लिए तैयार हो गया.

अब सुशील गिरि महाराज का शव सूरत ले जाया गया है, जहां उनकी समाधि बनेगी. महादेव कल्पवृक्ष गिरि का शव नासिक ले जाया गया है, वहां उनकी समाधि बनेगी.



वीडियो देखें: पालघर में पहले भी हुए हमले, वक्त रहते महाराष्ट्र सरकार ने कदम क्यों नहीं उठाए?  

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