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पाकिस्तान में अब पानी की भारी किल्लत, 22% की कमी का अनुमान, पंजाब-सिंध में सूखेंगी फसलें?

पाकिस्तान की Indus River System Authority (IRSA) ने रबी सीजन 2026-27 के लिए पंजाब और सिंध में पानी की 22% कमी का अनुमान मंजूर किया है. इसकी वजह से देश में खाद्यान्न के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. इस स्थिति के लिए खुद पाकिस्तानी सरकार जिम्मेदार है.

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पाकिस्तान में पानी की 22 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है (COURTSEY- ITG)

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  • पाकिस्तान की सिंधु नदी सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) ने पंजाब और सिंध प्रांतों में रबी फसल के लिए पानी की 22% तक कमी होने का अनुमोदन किया है।
  • पाकिस्तान में पानी की कमी के पीछे सिंधु जल संधि की शर्तों का पालन न होना नहीं, बल्कि हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में देरी और बांधों की समस्याएं हैं।
  • IRSA ने टनल 4 और टनल 5 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को मार्च 2025 तक पूरा करने का आग्रह किया है ताकि सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता ठीक की जा सके।

पाकिस्तान की सिंधु नदी सिस्टम अथॉरिटी (Indus River System Authority - IRSA) ने सिंचाई के लिए पानी की कमी का अनुमान लगाया है. IRSA के मुताबिक रबी की फसल के लिए दो प्रमुख प्रांतों, पंजाब और सिंध में पानी की 22% तक की कमी है. दोनों प्रांतों में रबी के मौसम में गेहूं, जौ, सरसों और चना जैसी फसलें बोई जाती हैं. हालांकि, अपनी आदत के मुताबिक पाकिस्तान इसका ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश करता रहा है. 

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पाकिस्तान हमेशा कहता है कि भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty - IWT) को ठंडे बस्ते में डाल दिया. इससे पाकिस्तान को उनके हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा. लेकिन पाकिस्तान में पानी की कमी का कारण भारत नहीं है. पानी की यह कमी पड़ोसी देश के अपने ही कर्मों का नतीजा है.

अपने ही हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में उलझा पाक

IRSA के अनुमान को लेकर पाकिस्तानी अखबार डॉन में एक रिपोर्ट छपी है. रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान में पानी की कमी भारत की वजह से नहीं है. बल्कि दो प्रांतों में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स अटके हुए हैं.  इन प्रोजेक्ट्स में देरी की वजह से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलना भी मुश्किल हो गया है.

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लेकिन, कई पाकिस्तानी नेता दावा कर रहे हैं कि भारत सिंधु नदी के पानी में पाकिस्तान का वाजिब हिस्सा नहीं दे रहा. अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 में हुई सिंधु जल संधि को होल्ड कर दिया था.

भारत ने असल में क्या किया है?

IWT को रोकने का मतलब यह नहीं है कि भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाली नदी का पानी को रोक दिया है. इसका मतलब है कि भारत ने संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों पर प्रतिबंध लगाया है. जैसे कि नियमित रूप से हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना और पहले से सूचना देना वगैरह. एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि अप्रैल से सितंबर 2026 के खरीफ सीजन के दौरान नदियों में पानी का बहाव अनुमान से 8% कम था. बीते साल की तुलना में ये 22% कम था. 

(यह भी पढ़ें: सिंधु जल समझौता क्या है? पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान का पानी रोक दिया) 

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हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में देरी से बढ़ी मुश्किलें 

IRSA ने टनल 4 लो-लेवल आउटलेट और टनल 5 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में देरी पर चिंता जताई है. IRSA ने कहा कि इन्हें जितनी जल्दी हो सके पूरा किया जाना चाहिए. खरीफ की फसल के मौसम में पानी की कमी हो रही है. ये दोनों प्रोजेक्ट मार्च 2025 तक पूरे होने थे. रिपोर्ट्स की मानें तो सिंधु नदी पर बने तरबेला बांध में आई दिक्कतों की वजह से अधिकारियों को मंगला बांध से ज्यादा पानी छोड़ना पड़ा. इससे रबी के मौसम से पहले उसमें पानी का स्तर फिर से भरने में दिक्कत आई. 7 अक्टूबर को हुई बैठक के बाद IRSA की सलाहकार समिति ने पंजाब और सिंध के लिए पानी की अनुमानित 22% कमी को मंजूरी दी है. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को पानी की कटौती से छूट दी गई है.

वीडियो: दुनियादारी: सिंधु जल संधि पर ये फैसला भारत को मंजूर नहीं

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