आसिफ़ अली ज़रदारी (Asif Ali Zardari) ने रविवार, 10 मार्च को पाकिस्तान (Pakistan) के 14वें राष्ट्रपति (President) के रूप में शपथ ली. इस दौरान ज़िक्र आया देश में फ़र्स्ट लेडी का. ज़रदारी इससे पहले 2008 से 2013 तक राष्ट्रपति रह चुके हैं. इस दौरान पाकिस्तान में फ़र्स्ट लेडी का पद खाली रहा. बता दें, 2007 में ज़रदारी की पत्नी और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो (Benazir Bhutto) की एक रैली के दौरान हत्या कर दी गई थी. लेकिन अब आसिफ़ा भुट्टो (Aseefa Bhutto) देश की फ़र्स्ट लेडी बनने जा रही हैं. आसिफ़ा, राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की बेटी हैं.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति की बेटी हैं आसिफ़ा भुट्टो, फिर क्यों मिल रहा है फ़र्स्ट लेडी का दर्जा
Pakistan के इतिहास में ये पहली बार है कि किसी President की पत्नी नहीं, बल्कि बेटी First Lady बनने जा रही हैं.

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार है कि किसी राष्ट्रपति की पत्नी नहीं, बल्कि बेटी फ़र्स्ट लेडी बनने जा रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, आसिफ़ा भुट्टो परिवार में राष्ट्रपति ज़रदारी के बाद एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं. पिछले एक दशक में वो भुट्टो-ज़रदारी परिवार में लगातार राजनीतिक सीढ़ियां चढ़ती गई हैं. 31 साल की आसिफ़ा पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और देश के दो बार राष्ट्रपति रह चुके आसिफ़ अली ज़रदारी की सबसे छोटी बेटी हैं.
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कौन हैं आसिफ़ा भुट्टो?फ़रवरी 1993 में जन्मी आसिफ़ा ने ऑक्सफ़ोर्ड ब्रूक्स यूनिवर्सिटी से राजनीति और समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की. साथ ही, उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से वैश्विक स्वास्थ्य और विकास में मास्टर डिग्री हासिल की. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, आसिफ़ा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत नवंबर 2020 में की. जब उन्होंने मुल्तान में पाकिस्तानी पीपल्स पार्टी (PPP) की एक रैली में हिस्सा लिया. इसके अलावा इसी साल हुए राष्ट्रपति चुनाव में भी आसिफ़ा अपने भाई बिलावल भुट्टो ज़रदारी के साथ दिखीं. जहां वो रैलियों में अपने भाई को प्रधानमंत्री बनाने की अपील करती नज़र आईं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, आसिफ़ा अपने भाई बिलावल और बहन बख्तावर के मुक़ाबले अपने पिता के ज़्यादा क़रीब हैं. राजनीतिक मंचों, समारोहों और रैलियों में भागीदारी से भी आसिफ़ा ने पीपीपी और पाकिस्तान की जनता में अपनी अलग पहचान बना ली है. 2012 में आसिफ़ा अपने पिता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई से मिलने भी गई थी. जब मलाला को लड़कियों की शिक्षा की वक़ालत करने पर तालिबानी आतंकवादियों ने उनके सिर पर गोली मार दी थी. उस समय उन्होंने 15 साल की मलाला का इलाज कर रहे डॉक्टरों से भी मुलाक़ात की थी.
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डॉन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि खानेवाल में अपने भाई बिलावल के साथ पीपीपी की एक रैली में जा रही आसिफ़ा को एक मीडिया ड्रोन से चोट लग गई थी. हालांकि ये चोट मामूली थी. कुछ दिनों के मेडिकल केयर के बाद उन्होंने फिर काम शुरू कर दिया था.
आसिफ़ा सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तान सियासत पर बयान देती रहती हैं. इसके अलावा, आसिफ़ा पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन की राजदूत भी हैं. राजदूत रहने के दौरान उन्होंने कई अभियान चलाए, अधिकारियों से मुलाक़ात की और प्रभावित परिवारों का दौरा करती रहती हैं. इस हाई-प्रोफाइल भूमिका ने भी उन्हें अपने भाई-बहनों की तुलना में ज़्यादा प्रभावशाली बना दिया.
बता दें, आसिफ़ सैन्य प्रमुखों के अलावा एकमात्र नागरिक हैं, जो दूसरी बार राज्य प्रमुख के रूप में चुने गए हैं. साथ ही, लोकतांत्रिक रूप से चुने गए उन चार राष्ट्रपतियों में से एक हैं, जिन्होंने अपना 5 साल का संवैधानिक कार्यकाल पूरा किया है.
क्या होता है फ़र्स्ट लेडी का पदआम तौर पर फ़र्स्ट लेडी राष्ट्रपति या राज्य प्रमुख की पत्नी होती है. लेकिन जब पत्नी ना हो, तो ऐसी महिला को फ़र्स्ट लेडी बनाया जा सकता है, जो इसके सार्वजनिक कर्तव्यों को पूरा करती है. डॉन अखबार के मुताबिक़, पाकिस्तानी में फ़र्स्ट लेडी सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर अपनी पहल शुरू करने के लिए जानी जाती हैं. आसिफ़ा की दादी नुसरत भुट्टो, सैन्य तानाशाह जियाउल हक़ की पत्नी शफीक़ जिया और इसकंदर मिर्जा की पत्नी नाहिद मिर्जा समेत कई फ़र्स्ट लेडीस राजनीति में भी सक्रिय रही हैं. हालांकि जीवनसाथी ना होने की स्थिति में पाकिस्तान में फ़र्स्ट लेडी का पद खाली ही रहा है. आसिफ़ अली ज़रदारी और याह्या खान के कार्यकाल में भी यही स्थिति रही है.
वीडियो: एस जयशंकर ने बिलावल भुट्टो जरदारी के सामने पाकिस्तान को सुना डाला













