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ड्रोन हमलों से परेशान पाकिस्तान ने अपनी चौकियों पर लगाए मछली पकड़ने वाले जाल

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ड्रोन अटैक से बचने के लिए पाकिस्तान ने सस्ता जुगाड़ निकाला है. पुलिस चौकी की छत और बाहरी दीवारों के बीच कई मीटर ऊंचाई तक मछली पकड़ने वाले जाल बांध दिए. ये कैसे बचाव करते हैं, पाकिस्तान के अधिकारियों ने ये सब भी बताया है.

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पाकिस्तान की पुलिस चौकी पर मछली पकड़ने वाले जाल लगे. (सांकेतिक तस्वीर: @KP_Police1 X | PTI)

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  • पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हंगू जिले में पुलिस चौकियों पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के ड्रोन हमलों से बचाव के लिए मछली पकड़ने वाले जाल लगाए गए हैं।
  • तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमलों और ड्रोन अटैक्स के कारण सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत पड़ी, खासकर इस साल की शुरुआत में हंगू में सरकी पियाला पुलिस चौकी पर हमला हुआ था।
  • मछली पकड़ने वाले जाल लगाने के बाद से हंगू जिले में ड्रोन हमलों में कमी आई है और पुलिस प्रांतीय सरकार से इस सुरक्षा उपाय के लिए अतिरिक्त फंड मांग रही है।

पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में एक नई सेफ्टी लेयर जुड़ गई है. मछली पकड़ने वाला जाल. पड़ोसी देश तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लगातार हमलों का सामना कर रहा है. उनके ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए पुलिस चौकी पर मछली पकड़ने वाले जाल लगाए गए हैं. ये 'सेफ्टी फीचर' पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हंगू जिले में दिखा.

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इस साल की शुरुआत में TTP लड़ाकों ने हंगू में सरकी पियाला पुलिस चौकी पर चारों तरफ से गोलीबारी की. ड्रोन अटैक भी हुआ. विस्फोटक गिराने वाले ड्रोन से बचने के लिए पुलिस इंस्पेक्टर फैयाज खान को अपने साथियों के साथ छिपना पड़ा. अफगानिस्तान से सटा हंगू का ये इलाका  TTP के घातक हमलों का गढ़ रहा है.

पुलिस ने क्या बताया?

कतर के न्यूज चैनल अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस इंस्पेक्टर फैयाज खान ने बताया कि मुठभेड़ लगभग सात घंटे तक चली. इसमें एक बख्तरबंद गाड़ी के ड्राइवर की मौत हो गई, जबकि एक कॉन्स्टेबल घायल हो गया. उन्होंने आगे कहा,

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"बहुत डर का माहौल था क्योंकि हम एक लड़ाई के बीच में थे. उस पल हमें ये भी नहीं पता था कि हम जिंदा घर लौट पाएंगे या नहीं."

खैर, किसी तरह तहरीक-ए-तालिबान के हमलों से वे बच निकले, लेकिन खतरा टला नहीं था. TTP के ड्रोन अटैक से बचने के लिए सस्ता जुगाड़ निकाला गया. पुलिस चौकी की छत और बाहरी दीवारों के बीच कई मीटर ऊंचाई तक मछली पकड़ने वाले जाल बांध दिए. इससे हवा में एक तरह की छत बन गई.

जाल को पहली बार दो महीने पहले लगाया गया था. फैयाज खान ने कहा कि तब से सरकी पियाला में कोई ड्रोन हमला नहीं हुआ. ये जाल मछुआरों के मछली पकड़ने वाले जाल जैसा नजर आता है. उन्होंने कहा,

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"अगर कोई ड्रोन चेकपोस्ट के ऊपर आता है, तो इस बात की संभावना है कि वो जाल में फंस जाए और उसे बंद या रोका जा सके."

ड्रोन हमले से बचने में जाल कितना कारगर?

बुलेट-प्रूफ जैकेट पहने और हाथों में बंदूक लिए जवान रस्सी और तार से जुड़ी काली जाली की छत के नीचे पहरा देते हैं. अब सवाल ये है कि मछली पकड़ने वाला जाल ड्रोन के घातक हमले से बचाने में कितना कारगर है? पुलिस अधिकारी ने इसका जवाब दिया,

"भले ही ड्रोन जाल में ना फंसे और जाल के ऊपर ही फट जाए, फिर भी नुकसान बहुत कम होने की उम्मीद है, क्योंकि ज्यादातर छर्रे और टुकड़े हवा में ही बिखर जाएंगे, वो ना कि सीधे उस जमीन पर गिरेंगे जहां पुलिसवाले तैनात हैं."

हंगू जिले के पुलिस अधिकारी तारिक हबीब ने अल जजीरा को बताया कि एक आम चेकपोस्ट को ऐसे जाल से ढकने में लगभग 4 लाख पाकिस्तानी रुपये, यानी करीब 1.39 लाख भारतीय रुपये का खर्च आता है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने ड्रोन और क्वाडकॉप्टर हमलों के असर को कम करने के लिए संवेदनशील पुलिस स्टेशनों और चेकपोस्ट पर जाली लगाने का सिस्टम शुरू किया है.

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तारिक हबीब ने ये भी बताया कि जिले भर के पुलिस स्टेशनों में और भी जाल लगाए जा रहे हैं. हंगू पुलिस इस प्रोग्राम को बढ़ाने के लिए प्रांतीय सरकार से अलग से फंड मांग रही है. उनकी मांग पर विचार भी किया जा रहा है.

पांच जिलों में जाल लगे

खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि कम से कम पांच अन्य संवेदनशील जिलों- कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान में चेकपॉइंट और पुलिस चौकी पर ये जाल लगाए गए हैं. यहां तक कि खैबर पख्तूनख्वा की कुछ जगहों पर सेना की चौकियों पर भी एंटी-ड्रोन जाली सिस्टम लगाया गया है.

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