The Lallantop

इजरायल में नेतन्याहू-आइजेनकोट मिलकर बनाएंगे सरकार? बंद कमरे की बातचीत पता लगी

Israel Election: बेंजामिन नेतन्याहू प्रधानमंत्री की कुर्सी विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ बांटने पर विचार कर रहे हैं. सरकार चलाने के लिए एक फॉर्मूला निकालने की बात भी सामने आई है.

Advertisement
post-main-image
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (लेफ्ट) और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट (राइट). (courtesy: इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री पद को बारी-बारी संभालने के विकल्प पर विचार करने की संभावना जताई है।
  • 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है, जिससे नेतन्याहू और आइजेनकोट को अलग-अलग दलों का समर्थन लेकर सरकार बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
  • इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग 4 नवंबर से सभी राजनीतिक दलों से मुलाकात करेंगे और सरकार गठन के लिए कौन जिम्मेदारी लेगा, इसका निर्णय लेंगे।

क्या इजरायल में अब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं? खबर है क‍ि नेतन्याहू ने पार्टी नेताओं के साथ बंद कमरे में हुई बातचीत में यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी दोनों नेताओं के बीच बारी-बारी से बांटने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है. उधर, आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है.

Advertisement

दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला. इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं. वहीं, आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास 48 सीटें हैं. बाकी 19 सीटें अरब पार्टियों के पास हैं.

इजरायली मीडिया यनेट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू से जब पूछा गया कि क्या वह आइजेनकोट के साथ ऐसी सरकार बना सकते हैं, जिसमें दोनों बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनें, तो उन्होंने कहा कि सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. वो किसी भी विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं.

Advertisement
विपक्षी पार्टियों का गठजोड़

बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी एक सहयोगी ने कहा कि अभी सरकार बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं आया है. लिकुड पार्टी के कई नेता सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री पद के बंटवारे का विरोध कर चुके हैं. ऐसे में ये विकल्प अभी केवल चर्चा के स्तर पर है.

नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए चार पार्टियों ने मिलकर विपक्षी गठबंधन बनाया है. इसमें गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी, नफ्ताली बेनेट की बायख्हाद, यायर गोलान की डेमोक्रेट्स और एविग्दोर लिबरमैन की इजरायल बेतेनु शामिल हैं. चुनाव में आइजेनकोट की पार्टी को 21 सीटें मिलीं. बेनेट को 12, गोलान को 8 और लिबरमैन को 7 सीटें मिली हैं.

द टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, बेनेट ने आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया है. गोलान की पार्टी भी उन्हें समर्थन देने की बात कह चुकी है. इससे विपक्षी गठबंधन में आइजेनकोट की दावेदारी को समर्थन मिला है.

Advertisement
आइजेनकोट की मुश्किलें

आइजेनकोट के सामने बहुमत जुटाने का एक रास्ता अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करना है. इजरायल की दो प्रमुख अरब पार्टियों में जॉइंट लिस्ट को 11 और रा,आम को 8 सीटें मिली हैं. दोनों का समर्थन मिलने पर आइजेनकोट के गठबंधन को कुल 67 सांसदों का साथ मिल सकता है.

लेकिन इस विकल्प पर विपक्षी गठबंधन में सहमति नहीं है. एविग्दोर लिबरमैन अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने के खिलाफ हैं. यनेट की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने आइजेनकोट के साथ बैठक में इस रणनीति की आलोचना भी की थी.

इसी मुद्दे पर इजरायल में विरोध प्रदर्शन भी हुए. 1 नवंबर को कुछ लोग आइजेनकोट के घर के बाहर पहुंचे और अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने के उनके विचार का विरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने उन्हें गद्दार तक कहा. यायर गोलान ने इस तरह के विरोध की निंदा की है.

नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया था कि अरब पार्टियों ने चुनाव में गड़बड़ी की है. हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया. AP की र‍िपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के चुनाव आयोग, अटॉर्नी जनरल और सुरक्षा एजेंसी शिन बेत ने साफ किया है कि विदेशी दखल के आरोपों की जांच जारी है. लेकिन अगर आरोप सही भी साबित होते हैं, तब भी चुनाव के नतीजे रद्द नहीं होंगे.

ये भी पढ़ें: इज़रायल की असली कहानी!

इजरायल के पास क्या ऑप्शन?

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग 4 नवंबर से सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. उनसे पूछा जाएगा कि वे किस नेता को सरकार बनाने की जिम्मेदारी देने की सिफारिश करते हैं. हर्जोग ने सभी दलों से अपील की है कि वे अपनी चुनावी जिद छोड़कर समझौते का रास्ता निकालें. उन्होंने कहा है कि देश को एक और चुनाव की तरफ जाने से बचाना चाहिए.

वहीं, आइजेनकोट के सामने यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) जैसी अति-रूढ़िवादी यहूदी पार्टियों का समर्थन लेने का विकल्प भी है. UTJ के पास 7 सीटें हैं. यह पार्टी पहले नेतन्याहू के गठबंधन में थी, लेकिन धार्मिक छात्रों को सेना में अनिवार्य भर्ती से छूट देने का कानून पास नहीं होने से नाराज है. फिलहाल पार्टी ने किसी भी नेता को समर्थन देने पर फैसला नहीं किया है.

यानी इजरायल में सरकार बनाने के लिए तीन रास्ते सामने हैं. अरब पार्टियों का समर्थन, अति-रूढ़िवादी दलों का साथ या नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच एकता सरकार. लेकिन तीनों विकल्पों में राजनीतिक समझौता करना होगा.

वीडियो: नेतन्याहू का खेल बिगाड़ने वाले इजरायली अरब कौन?

Advertisement