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पाकिस्तान की हंगोर पनडुब्बी में भारत की कलवरी सबमरीन से बड़ी होने के अलावा और क्या खास है?

Pakistan Hangor Submarine: पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में हंगोर-क्लास पनडुब्बी भेजने की तैयारी कर रहा है.पाकिस्तान के एक अधिकारी ने श्रीलंका में कहा था कि 'हंगोर-क्लास' पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम हो जाएगा.

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हंगोर क्लास सबमरीन चीन की टाइप-039B सबमरीन का अपग्रेडेड वर्जन है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • पाकिस्तान ने बंगाल की खाड़ी में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के लिए हंगोर-क्लास पनडुब्बी भेजने का फैसला किया है, और पहली पनडुब्बी कराची पोर्ट पहुंच चुकी है।
  • 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से पाकिस्तान की नौसेना की बंगाल की खाड़ी से मौजूदगी समाप्त हो गई थी, और अब चीन से मिले समझौते के तहत ये पनडुब्बियां बेड़े में शामिल हो रही हैं।
  • अपनी नौसैनिक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से पाकिस्तान की पनडुब्बी मौजूदगी से भारत की रणनीतिक समुद्री स्थिति पर असर पड़ सकता है, और 2028-29 तक पूरी फ्लीट आने की उम्मीद है।

पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में हंगोर-क्लास पनडुब्बी भेजने की तैयारी कर रहा है. 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से पाकिस्तानी नौसेना की मौजूदगी बंगाल की खाड़ी से पूरी तरह खत्म हो गई थी. मगर 55 साल बाद इस्लामाबाद अरब सागर से पैर निकालकर हिंद महासागर की तरफ जाने पर विचार कर रहा है.

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पाकिस्तान के एक अधिकारी ने श्रीलंका में कहा था कि 'हंगोर-क्लास' पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम हो जाएगा. चीन से आई हंगोर पनडुब्बी को पाकिस्तानी नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया गया है. 

चीन-पाकिस्तान के बीच समझौता

पाकिस्तान हंगोर जैसी 8 सबमरीन को अपने बेड़े में शामिल करने वाला है. चीन के साथ 5 बिलियन डॉलर (लगभग 47 हजार करोड़ रुपये) के समझौते के तहत, पाकिस्तान की आठ हंगोर सबमरीन में से चार चीन में बनेंगी और चार पाकिस्तान में बनने जा रही हैं. चीन-पाकिस्तान का यह प्रोग्राम 2015 में शुरू हुआ था. सौदे के तहत पहली हंगोर पिछले हफ्ते कराची पोर्ट पहुंच चुकी है. 2028-29 तक पूरी फ्लीट आने की उम्मीद है. 

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साइलेंट किलर है ‘हंगोर’?

हंगोर क्लास सबमरीन चीन की टाइप-039B सबमरीन का अपग्रेडेड वर्जन है. इस सबमरीन में AIP सिस्टम (Air Independent Propulsion) है. आम डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह पर आना पड़ता है. या स्नोर्कल (पानी के ऊपर आकर हवा भरने) का इस्तेमाल करना पड़ता है. मगर AIP से लैस पनडुब्बी लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकती है. इस वजह से इनका पता लगाना और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है.

ये भी पढ़ें: 55 साल बाद पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी आ रहा, वजह चीन से मिली ये पनडुब्बी है

इसका वजन 2,800 टन है. यानी ये भारत की कलवरी क्लास की पनडुब्बियों से बड़ी है. इस सबमरीन में 6 टॉरपीडो ट्यूब्स, Yu-6 हैवी टॉरपीडो, YJ-18 एंटी-शिप/लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (300-500 किमी रेंज) जैसे हथियार लगाए जा सकते हैं. हंगोर क्लास सबमरीन की स्पीड सरफेस पर 17 नॉट्स (31+ किलोमीटर प्रति घंटा) और डूबने पर 20+ नॉट्स (37 से ज्यादा किलोमीटर प्रति घंटा) तक है. हंगोर की रेंज 18 हजार किलोमीटर तक की है. यानी एक बार में अरब सागर से प्रशांत महासागर तक पहुंच सकती है.

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बंगाल की खाड़ी में परेशानी बनेगा पाकिस्तान?

भारत के लिए, बंगाल की खाड़ी लंबे समय से एक रणनीतिक इलाका रहा है. यहां भारत का ईस्टर्न नेवल कमांड है, समुद्री संचार के अहम रास्ते हैं, द्वीप हैं. देश की समुद्र रणनीतियों के लिहाज से बंगाल की खाड़ी काफी अहम है. भले ही पाकिस्तान खाड़ी में संतुलन न बदल पाए, लेकिन उसकी मौजूदगी और चीन का साथ भारत के लिए थोड़ी परेशानी का सबब बन सकते हैं. ये स्थिति तब है, जब भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और उसके आस-पास अपनी नौसैनिक क्षमताएं बढ़ा रहा है.

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