QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग ने साल 2027 के लिए लिस्ट जारी कर दी है. दुनिया की 200 टॉप यूनिवर्सिटीज में भारत के सिर्फ तीन शिक्षण संस्थानों ने अपनी जगह बनाई है. यह लिस्ट गुरुवार, 18 जून को जारी की गई.
दुनिया की टॉप 200 यूनिवर्सिटीज/इंस्टिट्यूट की लिस्ट आई, पता है भारत के कितने हैं?
QS World University Ranking 2027 की लिस्ट बताती है कि दुनियाभर के अन्य संस्थान, भारत के संस्थानों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि भारतीय संस्थान धीरे काम कर रहे हैं.


QS लिस्ट में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IIT दिल्ली 118वें स्थान तक पहुंचा है. पिछले साल यानी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 के मुकाबले IIT दिल्ली ने 5 प्वाइंट की बढ़त हासिल की है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 की लिस्ट में IIT दिल्ली की रैंक 126 थी.
ताजा रैंकिंग में IIT बॉम्बे 134 और IIT मद्रास ने 170वां रैंक हासिल किया है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, QS के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बेन सोवटर ने इन रैंकिंग्स पर बात की. उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली एम्प्लॉयर रेप्युटेशन के मामले में दुनियाभर में 39वें स्थान पर है. जबकि, साइटेशन प्रति फैकल्टी इंडिकेटर में 60वें स्थान पर है. लेकिन एम्प्लॉयमेंट आउटकम की बात करें, तो यहां आईआईटी दिल्ली 280वें नंबर पर है.
एकेडैमिक रेप्युटेशन में यूनिवर्सिटी का रैंक 15 प्वॉइंट कम होने के बाद 157वें स्थान पर है. सोवटर ने आगे कहा कि पिछले पांच सालों में IIT दिल्ली ने 67 रैंक की बढ़त हासिल की है. इस साल के साइटेशन की रैंकिंग सबसे बढ़िया रही है.
QS प्रेसिडेंट ने IIT बॉम्बे की रैंकिंग गिरने के कारणों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली की तरह ही IIT बॉम्बे भी एम्प्लॉयर रेप्यूटेशन में अच्छा परफॉर्म कर रहा है और दुनियाभर में 32वें स्थान पर पहुंच गया है. एम्प्लॉयर आउटकम में भी 176वें रैंक पर पहुंच गया है. रैंकिंग कम होने पर भी एकेडमिक रेप्युटेशन में ये 126वें स्थान पर है और भारत के टॉप यूनिवर्सिटीज/शिक्षण संस्थानों की लिस्ट में शामिल है.

हालांकि, ‘साइटेशन पर फैकल्टी’ की रैंकिंग में गिरावट देखने को मिली है. इस रैंकिंग में 25 प्वॉइंट की गिरावट आई है. यानी इसमें इसे 161वां रैंक मिला है. इसके अलावा ग्लोबल इंगेजमेंट में भी स्कोर कम ही है. इस क्षेत्र में दुनियाभर के अन्य संस्थान, भारत के संस्थानों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि भारतीय संस्थान धीरे काम कर रहे हैं.
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