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तालिबान ने पाकिस्तान के मेजर और जवान को बंधक बनाया, फिर पाकिस्तान पर ही जिम्मेदारी डाल दी!

एक DSP को भी बंधक बनाया. बंधक बनाने का वीडियो वायरल हो गया.

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पाकिस्तान की स्वात घाटी में घुसा तालिबान (फोटो- आजतक)

तालिबान (Taliban) ने पाकिस्तान (Pakistan) की स्वात घाटी (Swat Valley) में वापसी कर ली है. वहां पाकिस्तानी सेना (Army) के एक मेजर को तालिबान के आतंकवादियों ने बंधक बना लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना का एक जवान भी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कब्जे में है और पाकिस्तानी पुलिस के एक DSP को पैर में गोली मारी गई है. पाकिस्तानी मीडिया में बंधक बनाए गए लोगों का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है.

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घटना के बाद पाकिस्तान की सेना तालिबान से बात कर रही है ताकि मेजर, जवान और DSP को सुरक्षित छुड़ाया जा सके. घटना से जाहिर होता है कि पाकिस्तान की स्वात घाटी में एक बार फिर तालिबान का वर्चस्व स्थापित हो रहा है.

पेशावर हाई कोर्ट के वकील तारिक अफगान ने वीडियो ट्वीट करते हुए कैप्शन में लिखा, 

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वीडियो में देखा जा सकता है कि तालिबान ने मेजर अहसान समेत अन्य जवानों के हाथ बांधकर उन्हें बंदी बना लिया है जबकि डीडीपी मट्टा सर्कल पीर सैयद घायल पड़ा हुआ है. तालिबान नेता डीएसपी से पूछ रहे हैं कि किसी ने आपसे हमारे बारे में बात नहीं की? तहरीक-ए-इंसाफ सरकार तालिबान की गतिविधियों पर चुप क्यों है?

तालिबान ने पाकिस्तान को ही दोषी ठहराया 

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट की मुताबिक TTP ने स्थानीय प्रतिनिधियों से कहा-

तालिबान काबुल में शांति वार्ता के दौरान हुए सीजफायर समझौते का सख्ती से पालन कर रहा है, लेकिन पाकिस्तानी सुरक्षा बल  हमारे सदस्यों को निशाना बना रहे हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दिन पहले तालिबान के आतंकवादियों को पुलिस ने अफगानिस्तान की सीमा से स्वात में एंटर करते समय रोक लिया था. उस वक्त भी झड़प के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी समेत चार पाकिस्तानी पुलिसवालों को बंधक बना लिया गया था.

क्या है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान? 

TTP को आमतौर पर पाकिस्तानी तालिबान के रूप में जाना जाता है. ये अफगान-पाकिस्तान सीमा पर स्थित एक प्रतिबंधित आतंकवादी समूह है. अब तक TTP पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों पर कई बड़े हमले कर चुका है. इसका मुख्य मकसद पूरे पाकिस्तान में इस्लाम के अपने सख्त ब्रांड को लागू करना है. टीटीपी को 2007 में स्थापित किया गया था. कई दौर की बातचीत के बाद पाकिस्तान सरकार और टीटीपी ने मई में सीजफायर को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी.

टीटीपी को अल-कायदा का करीबी माना जाता है. इसे पाकिस्तान में कई घातक हमलों के लिए दोषी ठहराया गया है. इसमें 2009 में सेना मुख्यालय पर हमला, सैन्य ठिकानों पर हमले और 2008 में इस्लामाबाद के मैरियट होटल में बमबारी शामिल है.

देखें वीडियो- नूपुर शर्मा के विवादित बयान पर तालिबान ने क्या कह दिया?

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