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'किसने कहा अंग्रेजी बोलो', इंडियन आर्मी इंग्लिश बोली, पाकिस्तानी सेना क्यों बुरा मान गई?

गुरुवार, 7 मई को भारत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारत की तीनों सेनाओं- भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के तीन सीनियर अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस पर पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल खड़ किए हैं.

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पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी. (फोटो- DG ISPR)

‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ वाला मुहावरा पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशन’ के डायरेक्टर जनरल (DG ISPR) लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पर एकदम फिट बैठता है. पाकिस्तानी एयरबेसों की तस्वीरों ने खुलकर गवाही दी कि 7 मई 2025 को इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान का क्या हाल किया था. लेकिन लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी को 'ऑपरेशन सिंदूर' का ये 'जख्म' अभी तक दुख दे रहा है. कुछ बस नहीं चला, तो अब जनरल चौधरी ने भारतीय सेनाओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘अंग्रेजी’ भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जता दी है.

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'ऑपरेशन सिंदूर' के जवाब में पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन बुन्यान-अल-मर्सूस' शुरू किया था. पाकिस्तान इसे एक सफल ऑपरेशन मानता है, जिसकी याद में हर साल 10 मई को पाकिस्तान में 'यौम-ए-मारका-ए-हक' (सच्चाई की लड़ाई का दिन) मनाया जाता है. लड़ाई के एक साल पूरा होने पर एक प्रेस ब्रीफिंग में लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय सेनाओं के अधिकारियों के प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तेमाल किए गए ‘अंग्रेजी’ भाषा पर आपत्ति जताई है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, DG ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी सवालिया लहजे में पूछा कि भारतीय सेना के अधिकारी 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर ब्रीफिंग देते हुए ‘अंग्रेजी’ का इस्तेमाल क्यों कर रहे थे? यह सवाल गुरुवार, 7 मई को भारत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारत की तीनों सेनाओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर था.

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इसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के तीन सीनियर अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत के एक्शन पर बात की थी. इस दौरान अधिकारियों ने ‘अंग्रेजी’ भाषा का इस्तेमाल किया, जो पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता को नागवार गुजरा. लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा,

‘आपसे अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या इसलिए कि आप दुनिया को अपना पक्ष सुनाना चाहते हैं?’

पाकिस्तानी सेना के मीडिया प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी को इस बात की जानकारी नहीं है कि भारत जैसे विशाल देश में अनेकों भाषाएं बोली जाती हैं. ऐसे में ‘अंग्रेजी’ भाषा का इस्तेमाल लोगों से संपर्क करने के लिए किया जाता है. हालांकि, लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी के इस बेतूके सवाल पर खुद को पाकिस्तानी सेना का पूर्व जनरल बताने वाले आदिल फारूक राजा समेत अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्रोल कर लिया. आदिल फारूक राजा ने कहा,

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‘जब आप खुद शीशे के घर में रहते हैं, तो दूसरों पर पत्थर मत फेंकिए.’

ट्रोल करते हुए राजा ने सबसे पहले चौधरी के उस दोहरे रवैये से पर्दा हटा दिया, जिसमें वो ‘अंग्रेजी’ की बेइज्जती करते हैं. जबकि, पाकिस्तान की सेनाओं के अंदर भी आधिकारिक बातचीत का मुख्य जरिया ‘अंग्रेजी’ भाषा ही है. राजा ने पाकिस्तानी सेना में भाषा के इस्तेमाल पर सख्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा,

‘सबसे ऊंचे से लेकर सबसे निचले स्तर तक, पाकिस्तान सेना में सभी निर्देश अंग्रेजी में ही जारी किए जाते हैं.’

उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तानी अधिकारी अपनी राष्ट्रभाषा उर्दू का इस्तेमाल केवल एक प्रोपेगैंडा के लिए करते हैं, ताकि वे पाकिस्तानियों को ‘बेवकूफ’ बना सकें. राजा ने लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी पर तंज कसते हुए कहा कि भाषा पर सवाल करने के बजाय पाकिस्तानी सेना को अपने देश के नागरिकों को बताना चाहिए कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने देश के 11 एयरबेस को कितना नुकसान पहुंचाया था?

उन्होंने आगे पूछा कि पाकिस्तानी सेना अपने नुकसान को क्यों नहीं मानती? वो जनता को सिर्फ एक तरफा कहानी क्यों बता रही है? उन्होंने आगे कहा कि जनता को दोनों तरफ की कहानियां क्यों नहीं बताते, ताकि पता चले कि असली कहानी क्या है? राजा के अलावा भी कई यूजर्स ने लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी को ट्रोल किया.

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