अब जब सेंसर ने भी पास कर दिया, तो रोकने की हिम्मत किसी में नहीं थी. फिल्म से जुड़े लोग तैयारी में लग गए कि चलो अब तो रिलीज हो ही जाएगी. लेकिन नहीं, अभी तो विरोध सरकार को भी करना बाकी ही था. तो राजस्थान सरकार ने तय किया कि वहां पर फिल्म नहीं रिलीज होने दी जाएगी. इसका मतलब ये था कि देश के बाकी जगह पर फिल्म दिखाई जाएगी.

पद्मावत फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास कर दिया है.
अभी फिल्म को रिलीज होने में दो हफ्ते का वक्त बचा ही था कि एक बार फिर राजस्थान से ही विरोध शुरू हो गया. और इस बार तो हद ही हो गई. करणी सेना के विरोध और राजस्थान सरकार के फिल्म न दिखाए जाने के फैसले के बाद भी जब फिल्म की रिलीज पर कोई असर नहीं पड़ा, तो राजपूत समाज के कुछ लोगों ने अपनी महिलाओं को आगे कर दिया. इस बार राजपूत समाज के लोगों ने और किसी को मारने-काटने की धमकी नहीं दी है, बल्कि उन्होंने कहा है कि उनकी महिलाएं अब जौहर करेंगी. वही जौहर जिसके बारे में कहा जाता है कि इसी वजह से रानी पद्मिमी पद्मावती हो गईं और देवी की तरह उन्हें पूजा जाने लगा.

करणी सेना के प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह (बाएं) और संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा है कि उनकी महिलाएं अब जौहर करेंगी.
इसके लिए राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के क्षत्रिय समाज ने 1 जनवरी को एक बैठक बुलाई और तय किया कि फिल्म के रिलीज का विरोध किया जाएगा. इस बैठक में करीब 500 लोग शामिल थे, जिनमें 100 महिलाएं भी शामिल थीं. बैठक करने वाले लोगों में शहर के ''बड़े लोग" शामिल थे. इस दौरान तय किया गया कि 17 जनवरी को चित्तौड़गढ़ के नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक को रोक दिया जाएगा. राजपूत करणी सेना के प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह ने कहा-
रेलवे ट्रैक और रोड जाम करने के बाद भी अगर फिल्म की रिलीज नहीं रोकी जाती है तो अंजाम बुरा होगा. 24 जनवरी को क्षत्रिय समाज की महिलाएं जौहर कर लेंगी. रानी पद्मावती ने भी 24 जनवरी को ही जौहर किया था.

करणी सेना ने चित्तौड़गढ़ में बैठक की थी, जिसमें तय हुआ कि महिलाएं जौहर करेंगी.
करणी सेना ने तो कह दिया कि उनकी महिलाएं जौहर करेंगी, लेकिन अगर फिल्म रोकनी ही है तो फिर राजपूतों की महिलाएं ही क्यों. उनके पुरुषों ने अब तक क्या किया सिवाय धमकी देने के. कुछ करना है तो विरोध करने वाले खुद ही कुछ क्यों नहीं कर रहे हैं. क्यों वो कह रहे हैं कि उनकी महिलाएं जौहर करेंगी, वो खुद भी तो कुछ कर सकते थे. लेकिन नहीं. बलि का बकरा तो महिलाओं को ही बनना है. ये हमेशा से होते आया है. इस बार भी कुछ ठेकेदार चाहते हैं कि महिलाएं ही बली का बकरा बनें और वो भी एक फिल्म के लिए. उस फिल्म के लिए जिसका इतिहास से कोई सरोकार ही नहीं है. वो फिल्म जिसे सारे इतिहासकार एक मिथक करार दे चुके हैं.

अगर ये मिथक नहीं हकीकत है और रानी पद्मिनी ने जौहर किया था तो इसके पीछे की भी कहानी थी. सारे राजपूत सिपाहियों ने जंग लड़ी थी. उस जंग में वो शहीद हुए थे. उनकी शहादत के बाद रानी पद्मिनी को जौहर करना पड़ा था. यहां तो स्थिति ही उलट है. पुरुष समाज सिर्फ धमकी दे रहा है और कुछ करने की बात आई है तो एक बार फिर महिलाओं को आगे कर रहा है. ऐसा तो राजपूताने के इतिहास में कभी नहीं हुआ है.
पीएम मोदी से भी मुलाकात करेगा क्षत्रिय समाज

क्षत्रिय समाज गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात करने जा रहा है. 16 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बाड़मेर में दौरा प्रस्तावित है. वहां पीएम एक रिफाइनरी का लोकार्पण करने जा रहे हैं. क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधि उसी दिन बाड़मेर में पीएम मोदी से मिलेगें और फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए कहेंगे. अगर इतना सब करने के बाद भी फिल्म रिलीज होती है, तो क्षत्रिय महिलाएं उसी जगह पर जौहर कर लेंगी, जहां रानी पद्मिनी ने जौहर किया था.
क्यों ‘पद्मावती/पद्मावत’ सब बैन के बावजूद बहुत ज्यादा देखी जाएगी?









