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जब पार्क में ट्रैफिक के लिए पत्थर रखा गया, और लोग उसको शिवलिंग मानकर पूजा करने लगे

मंदिर बनाने की मांग हुई, फिर कोर्ट ने लाखों रुपए का जुर्माना पीट दिया

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अमेरिका की गोल्डेन गेट पार्क में शिवलिंग को लेकर सीएनएन की पुरानी रिपोर्ट वायरल (फोटो: वीडियो का स्क्रीनशॉट)

वाराणसी (Varanasi) के ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) का सर्वेक्षण (Survey) पूरा होने के बाद से ही वहां मिली एक खास आकार की चीज को लेकर काफी चर्चा है. एक पक्ष का दावा है कि वो शिवलिंग है और दूसरे पक्ष का दावा कि वो फव्वारे के बीच का टूटा हुआ पत्थर है. इस पर फैसला अदालत को करना है. लेकिन इन सबके बीच एक वीडियो रिपोर्ट को लोग काफी शेयर कर रहे हैं. उस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह अमेरिका के गोल्डन गेट पार्क में रखे एक पत्थर को लोग शिवलिंग मानकर पूजने लगे थे.

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अमेरिका के पार्क में पूजे गए ‘शिवलिंग’ की कहानी


जो वीडियो रिपोर्ट शेयर की जा रही है, वो साल 1993 की बताई जा रही है. CNN की एक रिपोर्ट है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि सैन फ्रांसिस्को के गोल्डेन गेट पार्क में एक पत्थर है, जिसकी पूजा करने दूर-दूर से लोग आते हैं. यहां पर एक मंदिर बनाने की मांग भी उठी, जिसे खारिज कर दिया गया था.

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हालांकि जिसे लोग शिवलिंग समझ कर पूज रहे थे, वो मूल रूप से ट्रैफिक बैरिकेड था. 4 फीट ऊंचे और बुलेट के आकार का वो पत्थर जो शिवलिंग जैसा लगता था. उसे एक सिटी क्रेन ऑपरेटर ने कुछ साल पहले पार्क में रखा था. हिंदू धर्म मानने वाले लोगों ने इसे देखा और शिवलिंग समझ कर पूजा करने लगे.

देखिए वो रिपोर्ट-

सैन फ्रांसिस्को प्रशासन ने हटवा दिया था पत्थर


बाद में इसे लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार में साल 1994 में एक रिपोर्ट छपी थी. इसमें बताया गया कि उस पत्थर को प्रशासन ने गोल्डेन गेट पार्क से हटवाकर एक आर्टिस्ट के स्टूडियो में रखवा दिया.

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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक पत्थर को पार्क से हटाने के फैसले के खिलाफ एक आर्टिस्ट माइकल बोवेन जिनका हिंदू नाम कालिदास था, वह सामने आए. उन्होंने एक मुकदमा दर्ज करवाया, लेकिन तब कोर्ट ने उन पर इसके लिए 14 हजार डॉलर का जुर्माना लगा दिया था. 

पड़ताल: ज्ञानवापी मस्जिद के नाम पर वायरल इस शिवलिंग वाली फोटो की सच्चाई क्या है?

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