क्या बढ़ती गर्मी में दिल्ली वालों को थोड़ी ज्यादा तपन लगने वाली है? शुक्रवार, 14 अप्रैल को दिल्ली सरकार ने कहा कि दिल्ली वालों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी कल से बंद हो जाएगी. AAP सरकार में ऊर्जा मंत्री आतिशी मारलेेना ने ये जानकारी दी. उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को इसका दोष दिया. बाद में उपराज्यपाल के कार्यालय ने इस पर जवाब दिया है.
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क्या बोली दिल्ली सरकार?
अरविंद केजरीवाल सरकार की इस स्कीम के तहत दिल्ली में 200 यूनिट तक की बिजली पर फुल सब्सिडी है. यानी इतनी बिजली खर्च करने पर जो बिल बनता है, उसका भुगतान सरकार करती है. यानी एक तरह से उपभोक्ता के लिए 200 यूनिट बिजली मुफ्त है. वहीं 200 से 400 यूनिट तक की बिजली पर 50 फीसदी बिल माफ है. लेकिन सरकार के मुताबिक अब ये राहत मिलना बंद हो जाएगी. आतिशी मारलेना ने बताया,
“अरविंद केजरीवाल की सरकार बिजली पर सब्सिडी देती है. जिसके तहत 200 यूनिट तक बिजली फ्री होती है. 200-400 यूनिट तक बिजली पर 50 प्रतिशत बिल माफ़ होता है. इसके तहत वकीलों को, किसानों को, 1984 के दंगों के पीड़ितों को बिजली की सब्सिडी दी जाती है. आज से (14 अप्रैल से) वो सारी बिजली की सब्सिडी रुक जाएगी. इसका मतलब ये हुआ कि कल से (15 अप्रैल से) जो बिजली के बिल दिल्ली के उपभोक्ताओं को मिलेंगे, उसमें उन्हें सब्सिडी नहीं मिलेगी.”
आतिशी ने आगे ये भी बताया कि ये सब्सिडी क्यों रुक गई है. उन्होंने कहा,
“ये सब्सिडी इसलिए रुकी है, क्योंकि दिल्ली की चुनी हुई सरकार ने निर्णय लिया कि आने वाले वर्ष में भी बिजली की सब्सिडी जारी रखेंगे. उस सब्सिडी की फाइल एलजी साहब (वी के सक्सेना) अपने पास रखकर बैठ गए हैं. वो फाइल एलजी साहब को भेजने के बावजूद, उनके ऑफिस द्वारा रख ली गई है. और जब तक वो फाइल एलजी ऑफिस से वापस नहीं आती है, तब तक अरविंद केजरीवाल की सरकार सब्सिडी का पैसा रिलीज़ नहीं कर सकती है.”
आतिशी ने ये भी आरोप लगाया कि उन्होंने एलजी ऑफिस से वक्त मांगा था, पर मिला नहीं. उन्होंने कहा कि इससे 46 लाख परिवारों पर असर पड़ेगा.
एलजी कार्यालय का जवाब
मारलेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दिल्ली एलजी के ऑफिस से जवाब आया है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक कार्यालय की तरफ से कहा गया है,
“ऊर्जा मंत्री को गैरजरूरी राजनीति और एलजी पर झूठे आरोप से बचना चाहिए. उन्हें लोगों को झूठे बयानों से गुमराह नहीं करना चाहिए. उन्हें लोगों को बताना चाहिए कि जब लास्ट डेट 15 अप्रैल रखी गई थी, तो 4 अप्रैल तक इस पर कोई फैसला क्यों नहीं लिया गया? एलजी को ये फाइल 11 अप्रैल को क्यों भेजी गई? 13 अप्रैल को एक चिट्ठी और इस प्रेस कॉन्फ्रेंस वाले ड्रामे की क्या जरूरत है?”
बयान में एलजी कार्यालय ने कहा कि उपराज्यपाल पहले ही फाइल को अप्रूवल दे चुके हैं. इस हिसाब से तो दिल्ली में बिजली पर सब्सिडी जारी रहनी चाहिए. एलजी कार्यालय के हवाले से ये भी बताया कि पावर सब्सिडी से जुड़ी फाइल 13 अप्रैल को ही अप्रूव हो गई थी और सीएम को आज (14 अप्रैल) भेज दी गई थी. वो भी पावर मिनिस्टर आतिशी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले. कार्यालय ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार झूठी बातें फैलाकर अपनी इज्जत बचाने की कोशिश कर रही है.
पहले से ही चल रहा है बवाल
इंडिया टुडे से जुड़े कुनाल कुमार से मिली जानकारी के मुताबिक बिजली कंपनियों के ऑडिट को लेकर दिल्ली सरकार और एलजी के बीच तकरार चल रही है. उपराज्यपाल सक्सेना ने पिछले 6 सालों में दिल्ली की निजी बिजली कंपनियों को सब्सिडी के रूप में दिए गए 13 हजार 549 करोड़ रुपये का ऑडिट नहीं कराए जाने पर केजरीवाल सरकार की तीखी आलोचना की है. ये सब्सिडी 2016 से 2022 के दौरान दी गई.
रिपोर्ट के मुताबिक उपराज्यपाल ने इस सब्सिडी को दिए जाने का समर्थन किया, लेकिन ये भी कहा कि बिजली कंपनियों को जो सब्सिडी दी गई है, उसका हर हाल में ऑडिट होना चाहिए. एलजी सक्सेना का कहना है कि अगर बिजली सब्सिडी में कहीं भी चोरी हो रही है तो ऑडिट के जरिये उसे रोका जा सकेगा.
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
2014 में दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था. तब कहा गया था कि CAG से बिजली कंपनियों का ऑडिट कराया जाएगा. लेकिन 30 अक्टूबर 2015 को दिल्ली हाई कोर्ट ने बिजली कंपनियों के CAG द्वारा ऑडिट कराने के दिल्ली सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ दिल्ली सरकार ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. तब से यह मामला लंबित है.
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