यहां के राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान (NIT) के छात्र पिछले 7 सालों से बिना कैंपस पढ़ाई करने पर मजबूर हैं. आजिज आकर NIT के बच्चे 9 अक्टूबर, 2017 से प्रदर्शन कर रहे हैं. इनकी मांग है कि जिन सुविधाओं का वादा कॉलेज ने एडमिशन के वक्त किया गया था, वो उन्हें मिलें - पढ़ने लायक क्लासरूम और रहने को हॉस्टल. लेकिन प्रदर्शन के बाद उन्हें मिली धमकियां और पुलिस रिपोर्ट.

NIT के छात्रों ने मांग रखी थी कि मानव संसाधन मंत्रालय की टीम कॉलेज का दौरा करे और उनकी समस्या सुने
क्यों परेशान हैं छात्र?
साल 2010 में केंद्र सरकार ने 10 नए NIT खोले. इनमें से एक अरुणाचल प्रदेश में भी था. तय किया गया कि कॉलेज के लिए कैंपस ईटानगर से 35 किलोमीटर दूर जोते में बनाया जाएगा और उसके तैयार होने तक पढ़ाई युपिया में एक अस्थायी कैंपस में होगी. जोते कैंपस का काम 2012 में शुरू हो गया था, लेकिन उसका आधिकारिक शिलान्यास तब के मानव संसाधन मंत्री एमएम पल्ल्म राजू ने 10 फरवरी 2013 को किया. कहा गया कि 800 करोड़ की लागत से कैंपस 2015 में बना लिया जाएगा. लेकिन नए कैंपस का अब तक कोई अता-पता नहीं है.
अरुणाचल टाइम्स की खबर है कि दिसंबर 2016 में राज्य के सीएम पेमा खांडू खुद जोते कैंपस गए थे. काम की रफ्तार देखकर उन्होंने कॉलेज प्रशासन और कंस्ट्रक्शन कंपनी हिंदुस्तान प्रीफैब को राज्य सरकार की ओर से मदद की पेशकश भी की थी. खांडू ने ये भी कहा था कि ईटानगर से जोते तक की सड़क को टू लेन हाइवे बनाया जाएगा. लेकिन ये सड़क अब भी इस हाल में है कि ईटानगर से जोते तक के 35 किलोमीटर तय करने में दो घंटे लग जाते हैं.

पेमा खांडू ने वादा किया था जोते तक टू-लेन हाइवे बनाया जाएगा. ये सड़क फिलहाल नहीं बनी है
अचानक लिया गया शिफ्टिंग का फैसला
इतने साल छात्र अपने पक्के कैंपस का इंतज़ार करते हुए युपिया के जुगाड़ कैंपस में पढ़ते रहे. फिर एक दिन अचानक 5 अक्टूबर, 2017 को NIT प्रशासन ने बीटेक 2017 के 150 छात्रों को यूपिया कैंपस से जोते कैंपस शिफ्ट कर दिया. ये कहकर कि कैंपस में सारे इंतज़ाम कर दिए गए हैं. लेकिन जोते जाकर छात्रों ने देखा कि NIT वालों ने उन्हें गोला दे दिया था. हॉस्टल पूरी तरह बना ही नहीं था. छात्रों को केमिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एकैडमिक ब्लाक में एक जुगाड़ हॉस्टल बना कर ठहरा दिया गया. कहा गया कि हॉस्टल तैयार होने में तीन महीने का वक्त और है.
'दी लल्लनटॉप' ने NIT के कुछ छात्रों से बात की. उन्होंने हमें बताया,
दिक्कत सिर्फ हॉस्टल में ही नहीं थी. छात्रों के लिए खाना कैमिस्ट्री लैब में बन रहा था. एक-एक कमरे में आठ-आठ बेड रखे गए थे. जोते में कनेक्टिविटी का हाल इतना बुरा है कि वहां मोबाइल ढंग से नेटवर्क तक नहीं पकड़ता. इसके बाद हम कैंपस से निकलकर प्रोटेस्ट करने लगे.

जोते कैंपस के बच्चों ने ईटानगर से जोते की सड़क पर चक्काजाम कर दिया था
लेकिन इस प्रदर्शन की खबर ज़्यादा फैली नहीं क्योंकि कमज़ोर नेटवर्क की वजह से बात बाहर नहीं गई. कुछ स्थानीय चैनल और अखबार ही इस बारे में जान पाए. अपने जूनियर्स के प्रोटेस्ट के बारे में सुन कर बीटेक और एमटेक के छात्रों ने युपिया कैंपस में प्रोटेस्ट शुरू किया. यहां से बात कुछ आगे बढ़ी.
'दी लल्लनटॉप' को युपिया कैंपस में पढ़ने वाले एक छात्र ने बताया,
हमने अपने जूनियर्स से कहा कि हमारे पास युपिया आ जाएं, साथ में प्रोटेस्ट करेंगे. उन्होंने हमसे कहा कि वो आना चाहते हैं लेकिन कोई ज़रिया नहीं है. फिर उन लोगों ने चंदा कर के 14 हज़ार रुपयों में दो बसें की और हमारे पास आए. उसके बाद से हम साथ प्रोटेस्ट कर रहे हैं.

छात्रों का कहना है कि NIT के असिस्टेंट रजिस्ट्रार जब उनसे मिलने आए तो उन्होंने छात्रों को बंदूक दिखा कर धमकाया
असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने बंदूक दिखाई?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का इल्ज़ाम है कि कॉलेज उनकी बात नहीं सुन रहा था. असिस्टेंट रजिस्ट्रार ताबा ताड़े गोयांग जब छात्रों से बात करने आए भी, तो साथ में एक बंदूक लेकर आए. छात्रों का कहना है कि गोयांग ने छात्रों को धमकाया और उनकी गाड़ी के नीचे एक छात्र का पैर भी आ गया. छात्र गोयांग से खासे नाराज़ हैं. लेकिन जब कार्रवाई हुई तो वो गोयांग की जगह छात्रों पर हुई. कॉलेज के सात छात्रों के खिलाफ गोयांग ने पुलिस में शिकायत कर दी है. एक असिस्टेंट रजिस्ट्रार बंदूक से छात्रों को धमकाए, ये एक गंभीर बात है. इसलिए हमने इस वाकये को लेकर गोयांग का पक्ष भी पता किया. उन्होंने दी लल्लनटॉप को बताया,
मेरे पास मेरी लाइसेंसी बंदूक थी ज़रूर लेकिन मैंने छात्रों को धमकाया नहीं. छात्रों ने मेरी गाड़ी में तोड़फोड़ की थी इसलिए मैंने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी. छात्रों की सारी समस्या का कारण मैं नहीं हूं. शिफ्टिंग का फैसला NIT के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग में लिया गया था. अरुणाचल प्रदेश एक फ्रंटियर स्टेट है. चीन इसे क्लेम करता रहता है. NIT के ज़रिए सेंटर अरुणाचल प्रदेश को मेनस्ट्रीम में लाने की कोशिश कर रहा है. हम छात्रों के हक की बात कर रहे हैं. आप मेनस्ट्रीम मीडिया से हैं. कोशिश कीजिएगा कि कोई नेगेटिव न्यूज़ न जाए.

कॉलेज के छात्रों को उनके खिलाफ हुई एफआईआर के बाद नोटिस भी मिल गया है
साफ मालूम चलता है कि गोयांग इस बात से खासे चिंतित थे कि कोई 'गलत' खबर न चल जाए. इस भय का कारण जो भी हो, हम एक बात तय जानते हैं. वो ये कि परमानेंट कैंपस की कमी वो अकेली चीज़ नहीं जिसने छात्रों को परेशान कर रखा है. NIT अरुणाचल प्रदेश में पिछले 1 साल से कोई डायरेक्टर ही नहीं है. NIT मणिपुर के डायरेक्टर यहां का अतिरिक्त प्रभार संभालते हैं. स्थानीय देख-रेख रजिस्ट्रार प्रताप कुमार बंदोपाध्याय के हाथ में है. ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के भी हाल बेहाल हैं. 'दी लल्लनटॉप' ने बंदोपाध्याय से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कहा कि वो व्यस्त हैं.
प्रशासन का पक्ष हमें सिर्फ एक अधिकारी से मिला, जिन्होंने नाम न ज़ाहिर करने की गुज़ारिश की है. उन्होंने बताया कि एक अधबने कैंपस में छात्रों को शिफ्ट करने का फैसला कॉलेज के अधिकारियों ने नहीं लिया था. 'ऊपर' (माने मानव संसान मंत्रालय) से हमें कहा गया कि जब तक आप अपने कैंपस में पढ़ाई शुरू नहीं करवा देते, फंड नहीं मिलेगा. इसलिए आनन-फानन में बीटेक के फर्स्ट ईयर के छात्रों को नए कैंपस में शिफ्ट किया गया.

NIT अरुणाचल प्रदेश के बच्चे मानव संसाधन मंत्रालय की टीम के दौर के समय युपिया कैंपस में जमे रहे
अभी क्या हो रहा है?
छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रीय मीडिया में काफी कम कवरेज मिली. 12 अक्टूबर, 2017 को ट्विटर पर कुछ सुगबुगाहट हुई. अब ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) ने NIT में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. 12 अक्टूबर की ही शाम पापुम पारे (जिस ज़िले में युपिया पड़ता है) के ज़िला मैजिस्ट्रेट और एसपी छात्रों से मिले और कार्रवाई का भरोसा दिलाया.
13 अक्टूबर, 2017 को ये खबर लिखे जाने तक का हाल ये है कि दिल्ली से मानव संसाधन मंत्रालय की एक टीम अरुणाचल पहुंच गई है. इस टीम ने जोते कैंपस का दौरा करने के बाद कॉलेज प्रशासन से एक मीटिंग की है, जिसका नतीजा फिलहाल बाहर नहीं आया है. फिलहाल सारे छात्र युपिया आ गए हैं.
भारत में लगातार 'स्किल डेवलेपमेंट' पर ज़ोर देने की बात होती रहती है. लेकिन NIT अरुणाचल प्रदेश जैसे 'इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस' के ये हालात परेशान करने वाले हैं. उम्मीद की जाती है कि सरकार इस ओर जल्द ध्यान देगी और छात्रों के लिए कोई ठोस हल निकल कर सामने आएगा.
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