निषाद पार्टी के कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के विरोध में उतर गए हैं (Nishad Party workers protest). उनकी मांग है कि ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की तरह उनकी पार्टी के नेताओं को भी अधिकार मिलने चाहिए. इसे लेकर एक विरोध प्रदर्शन सम्मेलन भी आयोजित किया गया है. बता दें कि निषाद पार्टी NDA गठबंधन का हिस्सा है. जानते हैं पूरा मामला?
निषाद पार्टी के खिलाफ उतरे कार्यकर्ता, ओमप्रकाश राजभर के 'पावरफुल' गमछे जैसी मांग कर रहे
Nishad Party के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग के लिए बकायदा एक विरोध सम्मेलन आयोजित किया. कुछ दिन पहले OP Rajbhar ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को थाने में गमछा पहन कर जाने की सलाह दी थी. निषाद पार्टी का मामला इसी से जुड़ा है.
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आजतक से जुड़े अनिल अकेला की रिपोर्ट के मुताबिक 18 मार्च को उत्तर प्रदेश के बलिया के बांसडीह में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध सम्मेलन आयोजित किया. जिला अध्यक्ष चंद्रमा निषाद के नेतृत्व में इसे आयोजित किया गया. उन्होंने कार्यकर्ताओं की मांग दोहराते हुए कहा,
‘जिस तरह से ओम प्रकाश राजभर ने सुभासपा के कार्यकर्ताओं को पीला गमछा पहन कर थाने में जाने की पावर दी है, उसी तरह से संजय निषाद भी उन्हें पार्टी की टोपी पहन थाने में जाकर अपना काम करवाने की पावर दें.’
दरअसल यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद ओम प्रकाश राजभर ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था,
'जब भी थाने जाना हो तो सफेद नहीं पीला गमछा पहनकर जाना. बाजार में 20-25 रुपए में पीला गमछा मिल जाता है. जब पीला गमछा लगाकर जाओगे तो दरोगा जी को तुम्हारी शक्ल में ओम प्रकाश राजभर नजर आएगा. ये है पावर. थाने में बता देना कि मंत्री जी ने भेजा है. दरोगा जी में पावर नहीं कि मंत्री जी से फोन कर पूछें. SP, DM में भी पूछने की पावर नहीं है. आज जिस मुकाम पर हम खड़े हैं वहां तो DG के पास भी पावर नहीं है कि पूछे हमने भेजा है या नहीं.'
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वैसे राजभर की बातों पर यकीन करना उनकी पार्टी के एक पदाधिकारी को भारी पड़ गया था. कुछ दिन पहले सुभासपा के पदाधिकारी संतराम कश्यप गले में पीला गमछा डालकर फर्रुखाबाद के नवाबगंज पुलिस थाने पहुंचे थे. आरोप है कि यहां दरोगा ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मोबाइल और गमछा भी छीन लिया.
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