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रातभर चौकीदारी करते हुए निकाल दीं 2-2 सरकारी नौकरियां, अद्भुत है प्रवीण की कहानी

Hyderabad के प्रवीण Night Watchman की नौकरी करते हैं. ये नौकरी करते हुए अब उनको दो-दो सरकारी नौकरियों में सफलता मिली है. बड़ी अद्भुत है इनकी कहानी.

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प्रवीण कुमार को दो-दो सरकारी नौकरी के लिए सफलता मिली है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

हैदराबाद (Hyderabad) की उस्मानिया यूनिवर्सिटी (Osmania University) के एक नाइट वाचमैन ने कमाल कर दिया है. दो-दो सरकारी नौकरियों अब उनकी झोली में हैं. इतना ही नहीं, संभावना इस बात की भी है कि उन्हें तीसरी नौकरी पाने में भी सफलता मिल सकती है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स का नाम गोले प्रवीण कुमार है. प्रवीण को सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली दो परीक्षा में सफलता मिली है. 31 साल के प्रवीण को स्नातकोत्तर शिक्षक पद के लिए नियुक्ति पत्र मिला है. उनका नाम जूनियर लेक्चरर की फाइनल लिस्ट में भी आ गया है. 2 मार्च को उनको नियुक्ति पत्र मिलने की उम्मीद है. वहीं यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का मानना है कि प्रवीण को प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक की नौकरी में भी सफलता मिलेगी.

यानी प्रवीण अब उच्च माध्यमिक छात्रों यानी ग्यारहवीं और बारहवीं के स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए योग्य हैं. और अब उन्हें लगभग 73 हजार से 83 हजार तक का मासिक वेतन मिलेगा.

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प्रवीण तेलंगाना के मंचेरियल जिले के एक गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता राजमिस्त्री और मां बीड़ी बनाने का काम करती हैं. प्रवीण को वर्तमान में 9 हजार रुपए का मासिक वेतन मिलता है. प्रवीण चाहते हैं कि वो जूनियर लेक्चरर की नौकरी करें.

उनके पास M.Com, B.Ed और M.Ed की डिग्री है. वर्तमान में वो वाचमैन (आउटसोर्स) की नौकरी कर रहे हैं. लेकिन ये फैसला उन्होंने ऐसे ही नहीं लिया बल्कि एक रणनीति के तहत लिया है.

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उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि यूनिवर्सिटी में वाचमैन की नौकरी से यहां उपलब्ध स्टडी मटेरियल तक उनकी पहुंच आसान हो गई. उन्होंने बताया कि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि वो नौकरी कर रहे हैं. क्योंकि यहां उनको सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलता था. उनके पास एक कमरा था और किताबें थीं. जिससे उन्हें अपनी पढ़ाई में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता था. प्रवीण ने बताया कि उनके लिए बस इतना ही मायने रखता है.

उस्मानिया यूनिवर्सिटी के एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर में उन्होंने जानबूझकर नाइट वॉचमैन की नौकरी की. ताकी सुबह के वक्त उन्हें पढ़ने का समय मिल सके.

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