वो देख नहीं सकते. दृष्टिहीन हैं. रेलवे में ऐसे ही करीब 30 दृष्टिहीन लोगों की डेस्क वर्क के लिए नौकरी लगी, विकलांग कोटे से. लेकिन रेलवे के बाबुओं ने इन लोगों को डेस्क जॉब की बजाय सड़क पर झाड़ू लगाने के काम में लगा दिया. नौकरी की जॉइनिंग के एक हफ्ते के भीतर.

मेल टुडे की खबर के मुताबिक, इन लोगों का सेलेक्शन उत्तर रेलवे की दिल्ली डिविजन के लिए हुआ था. इन लोगों को इलैक्ट्रिकल और वायरलैस डिपार्टमेंट के लिए चुना गया था. पर रेलवे बाबू इत्ते धुरंधर कि इन लोगों को पकड़ाई झाड़ू. और कहा, 'सफाई में लग जाओ.' आंखों से देख न पाने और डेस्क जॉब मिलने के बावजूद झाड़ू लगाने का दुख झेल रहे अमीन खान ने कहा, 'हम लोगों की भर्ती विकलांग कोटे के तहत हुई थी. लेकिन हमें शुरुआती एक हफ्ते में ही फर्श पोछने के काम पर लगा दिया.'

आरोप है कि अधिकारी दबाव बनाकर इन लोगों से सीवर साफ, रिहायशी कॉलोनी, राज्य सरकार के अस्पतालों में झाड़ू लगवाने का काम करवा रहे हैं. बता दें कि इनमें से बहुत लोगों के पास एमए और बीएड की डिग्री भी है. इसके बावजूद इन लोगों को सड़क पर सफाई के काम में उतार दिया गया, बिना इस बात की परवाह किए कि इससे दृष्टिहीनों की जिंदगी को खतरा भी हो सकता है. हालांकि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हमनें रुल बुक फॉलो की है.
एडिशनल डिविजनल रेलवे मैनेजर डिंपी गर्ग ने कहा, 'डिविजन लेवल पर भर्तियां सिर्फ सफाई कर्मचारियों के लिए हो सकती है. इसी वजह से इन्हें सफाई के काम में लगाया गया है.' दृष्टिहीन रेलवे कर्मचारी अमीन खान ने कहा, 'हमने डिंपी गर्ग से कई बार मिलने की कोशिश की. सफाई का काम हम अपनी जिंदगी को रिस्क पर रखकर कर रहे हैं. प्रैक्टिकली ये हमारे लिए मुश्किल है कि हम इस तरह का कोई काम कर पाएं.'