2013 में यही मौसम रहा. अक्टूबर का महीना. जब सात SIMI मेंबर खंडवा से निकल भागे थे. दो साल भागते रहे, फिर दबोचे गए. जो सोमवार की रात भागे थे, उनमें से तीन पिछले भगोड़ों में थे. माने ये लोग दूसरी बार लॉटरी जीते थे. लेकिन मार दिए गए, बैड लक. 2001 से 15 तक तो NCRB ने सर्वे करके इतने मामले बताए हैं. 2013 में CAG अर्थात कॉम्पट्रॉलर एंड ऑडिटर जनरल ने ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी. जिसमें लिखा था कि 2007 से 12 तक 91 बार जेल से भागने की वारदातें हुई हैं. 96 कैदी भागे. और जो भागे उनमें 57 बाउंड्री कूद कर भागे. चाय में नशा मिलाकर और सिक्योरिटी स्टाफ की लापरवाही से भागे.इस केस में भी पता चला कि तीन दिन से CCTV खराब थे. दो कांस्टेबल लगाए गए थे वो भी लप्पूझन्ना हथियारों के साथ. जब लोगों को फरारी थाली में परोसकर दोगे तो वो भागेंगे नहीं? बाकी कॉन्सिपरेसी वगैरह का क्या है. अभी सौ तरह की बातें होंगी. रेडी रहो सुनने धुनने के लिए.
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