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दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस से कहा- हेराल्ड हाउस खाली करो

सोनिया गांधी और राहुल गांधी को कोर्ट ने दिया सबसे बड़ा झटका

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दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि कांग्रेस को दो हफ्तों के अंदर हेराल्ड हाउस खाली करना होगा.
तीन राज्यों में चुनावी जीत की खुशी मना रही कांग्रेस को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट में हेराल्ड हाउस केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस सुनील गौर ने 21 दिसंबर को दिए अपने आदेश में कहा है कि असोसिएटेड जनरल को दो हफ्तों के अंदर हेराल्ड हाउस खाली करना होगा. हेराल्ड हाउस मामला इकलौता ऐसा मामला है, जिसमें कांग्रेस के दो सबसे बड़े नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नाम सीधे तौर पर शामिल है.
आदेश असोसिएटेड जनरल को है तो कांग्रेस को झटका क्यों?
नेशनल हेराल्ड अखबार 1938 में छपना शुरू हुआ था. ये देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू के दिमाग की उपज थी.
नेशनल हेराल्ड अखबार 1938 में छपना शुरू हुआ था. ये देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू के दिमाग की उपज थी.

इसके लिए नेशनल हेराल्ड का इतिहास जानना पड़ेगा. नेशनल हेराल्ड 1938 में शुरू किया गया एक अखबार था. ये पंडित जवाहरलाल नेहरू के दिमाग की उपज थी, जो इसका इस्तेमाल आज़ादी की लड़ाई में कर रहे थे. असल में पंडित नेहरू ने 1937 में असोसिएटेड जर्नल बनाया था. इसने तीन अखबार निकालने शुरू किए. हिंदी में नवजीवन, उर्दू में कौमी आवाज़ और अंग्रेज़ी में नेशनल हेराल्ड. असोसिएटेज जर्नल पर कभी नेहरू का मालिकाना हक नहीं रहा. इसे 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे. इसमें से कई बड़े नेता भी थे. देश को आज़ादी मिली. अखबार फिर भी चलता रहा. लेकिन वक्त के साथ-साथ इसकी बिक्री कम होने लगी. साल 2008 आते-आते असोसिएटेड जर्नल ने फैसला किया कि अब अखबार नहीं छापे जाएंगे. साथ ही, ये भी मालूम चला कि असोसिएटेड जर्नल पर 90 करोड़ रुपयों का कर्ज भी चढ़ चुका है.
घोटाला क्या बताया जाता है?
1997 के आखिर में सोनिया ने कांग्रेस की लीडरशिप संभाली. राजीव गांधी मारे गए, इसलिए वक्त से काफी पहले गुजर गए. हालात की वजह से ही सही, मगर सोनिया ने राजीव से कहीं ज्यादा वक्त दिया है पार्टी को. कहीं ज्यादा मेहनत की.
हेराल्ड केस इकलौता ऐसा केस है, जिसमें राहुल गांधी और सोनिया का नाम सीधे तौर पर शामिल है.

90 करोड़ रुपए के कर्ज की भरपाई के लिए एक ट्रिक अपनाई गई. कांग्रेस ने एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट कंपनी बनाई. इसका नाम था यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड. महात्मा गांधी ने जो यंग इंडिया अखबार शुरू किया था, उसका इससे कोई लेना-देना ही नहीं था. कंपनी में 76% शेयर्स राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के पास थे. तो सोनिया और राहुल की ही कांग्रेस ने यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 90 करोड़ रुपए दे दिए. यंग इंडिया ने इसी पैसे का इस्तेमाल करते हुए असोसिएटेड जर्नल को खरीद लिया. अब तो साफ हो गया होगा कि जब दिल्ली हाई कोर्ट ने असोसिएटेड जर्नल को हेराल्ड हाउस खाली करने को कहा है, तो ये कांग्रेस के लिए झटका क्यों है.
कब सामने आया घोटाला?
सुब्रमनियम स्वामी.
सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में एक पीआईएल दाखिल की थी, जिसके बाद मामला सामने आया.

2012 में बीजेपी नेता सुब्रमनियन स्वामी ने एक जनहित याचिका (PIL) डाली. इसके बाद उन्होंने कांग्रेसी नेताओं पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया. स्वामी ने कहा कि मात्र 50 लाख रुपए खर्च करके 90 करोड़ रुपयों की वसूली कर ली गई. इनकम टैक्स ऐक्ट के हिसाब से कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी भी थर्ड पार्टी के साथ पैसों का लेन-देन नहीं कर सकती. इसके अलावा भी स्वामी ने कई और आरोप लगाए-
# स्वामी ने कहा कि कांग्रेस ने पहले तो 90 करोड़ का लोन दिया. फिर अकाउंट बुक्स में हेर-फेर करके उस रकम को 50 लाख दिखा दिया. यानी 89 करोड़ 50 लाख रुपए यहीं माफ कर दिए गए.
# अखबार छपना बंद होने के बाद असोसिएटेड जर्नल ने प्रॉपर्टी का काम शुरू कर दिया यानी वो रियल एस्टेट फर्म बन गई, जो दिल्ली, लखनऊ और मुंबई में बिजनेस कर रही थी.
# स्वामी का आरोप है कि इस रियल एस्टेट फर्म के हिस्से जो भी प्रॉपर्टी थीं, वो भी कांग्रेस के नेताओं ने अपने नाम कर लीं, क्योंकि असोसिएटेड जर्नल को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड खरीद चुकी थी.
# ये संपत्ति लगभग 2 हज़ार करोड़ की थी और इस तरह 90 करोड़ खर्च करके 2,000 करोड़ की प्रॉपर्टी के वारे-न्यारे हो गए.
अभी क्यों आया फैसला?

हेराल्ड हाउस दिल्ली के आईटीओ में बनी एक बिल्डिंग है.

हेराल्ड हाउस दिल्ली के आईटीओ में बनी बिल्डिंग है. 2016 में केंद्र सरकार ने असोसिएटेड जर्नल की 56 साल पुरानी लीज को खत्म कर दिया और कहा कि अब असोसिएटेड जर्नल को इमारत खाली करनी होगी. केंद्र सरकार के फैसले के बाद 30 अक्टूबर, 2018 को केंद्र और भूमि विकास कार्यालय ने असोसिएटेड जर्नल को नोटिस भेजा और कहा कि असोसिएटेड जर्नल को 15 नवंबर तक हेराल्ड हाउस खाली करना होगा. असोसिएटेड जर्नल ने इस नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की. असोसिएटेड जर्नल का कहना था कि हेराल्ड हाउस में अखबार, मैगज़ीन और कई वेबसाइट्स चल रही हैं. ऐसे में लीज को रद कैसे किया जा सकता है. कांग्रेस ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि ये नेहरू की विरासत को ख़त्म करने की कोशिश है.
केंद्र सरकार ने क्या तर्क दिए
पीएम मोदी के सत्ता में आने के दो साल बाद नेशनल हेराल्ड बिल्डिंग खाली करने का नोटिस जारी हुआ.
पीएम मोदी के सत्ता में आने के दो साल बाद नेशनल हेराल्ड बिल्डिंग खाली करने का नोटिस जारी हुआ.

केंद्र और भूमि विकास कार्यालय ने कोर्ट में अपनी दलील रखते हुए कहा कि अखबार की वजह से ये प्रॉपर्टी असोसिएटेड जर्नल को दी गई थी. कई साल से हेराल्ड हाउस में अखबार नहीं छप रहे हैं. 2008 से 2016 तक किसी भी तरह का पब्लिशिंग का काम नहीं किया गया है. 2008 में स्टाफ़ से वीआरएस लेकर अख़बार को बंद किया जा चुका है. इस इमारत को किराए पर देकर असोसिएटेड जर्नल 15 करोड़ रुपये कमा रही है. इसलिए लीज को रद करने के लिए कई बार नोटिस भेजा जा चुका है. दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुनील गौर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 22 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया. ठीक एक महीने बाद 21 दिसंबर को जस्टिस सुनील गौर ने असोसिएटेड जर्नल की याचिका खारिज़ कर दी और कहा कि असोसिएटेड जर्नल को दो हफ्तों के अंदर नेशनल हेराल्ड हाउस खाली करना होगा.
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने असोसिएटेड जर्नल की याचिका खारिज़ कर दी है.

जस्टिस सुनील गौर ने असोसिएटेड जर्नल की याचिका को खारिज़ करते हुए कहा कि कोर्ट इस बात को समझने में नाकाम रही है कि सरकार के इस नोटिस की वजह से पंडित नेहरू की किसी तरह से मानहानि हुई है या फिर उनकी विरासत को खत्म करने की कोशिश हुई है. इसलिए असोसिएटेड जर्नल की याचिका खारिज की जाती है और अब असोसिएटेड जर्नल को दो हफ्तों में बिल्डिंग खाली करनी होगी. कोर्ट ने कहा-
# हेराल्ड हाउस को लीज पर देने का मुख्य उद्देश्य खत्म हो चुका है. परिसर का एक बड़ा हिस्सा किराए पर दिया गया है.
# अखबार का हिस्सा जिसे असल में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर होना था, उसे टॉप फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया गया. वहां मुश्किल से ही कोई प्रेस एक्टिविटी होती है
# यंग इंडियन कंपनी चेरिटेबल कंपनी है, लेकिन ये असोसिएटेड जर्नल के 99 फीसदी शेयर ट्रांसफर करने की योजना थी.

ये 9 नवंबर, 1978 का अखबार है.

# असोसिएटेड जर्नल ये भी नहीं बता पाया कि पूरे देश में उसके प्रिंट और ऑनलाइन एडिशन का सरकुलेशन क्या है.
# असोसिएटेड जर्नल को यंग इंडियन कंपनी ने हाईजैक कर लिया है.
# यंग इंडियन कंपनी के स्टेक होल्डर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोती वाल वोहरा और ऑस्कर फर्नांडिस हैं. असोसिएटेड जर्नल की 413.40 करोड़ की संपत्ति के 99 फीसदी शेयर गुप्त रूप से यंग इंडियन कंपनी को फायदे के लिए ट्रांसफर किए गए.
अब आगे क्या?
ये फैसला दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल बेंच का है. अब असोसिएडेट जर्नल चाहे तो दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील कर सकता है.

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