भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने एक साझा लेख लिखा है. इटली के दैनिक समाचार पत्र ‘कोरिएरे डेला सेरा’ में छपे इस संपादकीय के लेखक पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी दोनों हैं.
मोदी-मेलोनी ने मिलकर संपादकीय लिखा, क्या-क्या बातें कहीं?
संपादकीय में भारत और इटली के बीच सांस्कृतिक, राजनैतिक और कारोबारी रिश्ते के बारे मेें विस्तार से चर्चा की गई है. इसमें दोनों प्रधानमंत्रियों ने लिखा है कि भारत और इटली के बीच रिश्ते पिछले कुछ सालों में तेजी से मजबूत हुए हैं.


संपादकीय में भारत और इटली के बीच सांस्कृतिक, राजनैतिक और कारोबारी रिश्ते के बारे मेें विस्तार से चर्चा की गई है. इसमें दोनों प्रधानमंत्रियों ने लिखा है कि भारत और इटली के बीच रिश्ते पिछले कुछ सालों में तेजी से मजबूत हुए हैं. पहले जो रिश्ता सिर्फ दोस्ताना था, वह अब आजादी, लोकतंत्र और भविष्य की साझा सोच पर आधारित एक खास रणनीतिक साझेदारी बन चुका है.
लेख में आगे कहा गया, ‘इटली और भारत का रिश्ता अब एक नए स्तर पर पहुंच रहा है, जहां आर्थिक ताकत, समाज की रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यताओं की समझ एक साथ आ रही है. इटली की डिजाइन, बेहतरीन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और विश्वस्तरीय सुपरकंप्यूटर तकनीक उसे एक औद्योगिक ताकत (Industrial Power) बनाती है. इसे भारत की तेज आर्थिक प्रगति, इंजीनियरिंग टैलेंट और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्टअप वाले इनोवेशन और ऑन्त्रप्रन्योरियल इकोसिस्टम (Entrepreneurial ecosystem) के साथ जोड़ना है.’
लेख में 2029 तक भारत और इटली के बीच व्यापार को 20 अरब यूरो और इससे भी आगे बढ़ाने के लक्ष्य तक पहुंचने की बात कही गई है. इसमें डिफेंस और एयरोस्पेस, टेक्नीक, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, केमिकल्स, दवाइयां, कपड़ा इंडस्ट्री, एग्रो-फूड सेक्टर, टूरिज्म और कई दूसरे सेक्टर्स पर खास ध्यान देने को कहा गया है.
दोनों देशों की सप्लाई चेन होगी मजबूतलेख में आगे कहा गया कि ‘मेड इन इटली’ और ‘मेक इन इंडिया’ का मकसद सिर्फ बेहतरीन क्वालिटी हासिल करना है. भारत के लिए प्रोडक्शन में इटली की कंपनियां इंट्रेस्ट दिखा रही हैं. साथ ही इटली में इंडियन इंडस्ट्रीज की मौजूदगी भी बढ़ रही है, जो अच्छा संकेत है. इससे दोनों देशों की सप्लाई चेन और मजबूत होगी. साथ ही दोनों देशों के बीच इंडस्ट्रियल जुड़ाव बढ़ेगा.
लेख में बताया गया है कि भारत और इटली का संबंध स्पेस सेक्टर्स तक फैला हुआ है. अंतरिक्ष रिसर्च और सैटेलाइट तकनीक में भारत के लगातार डिवेलपमेंट और इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग कैपेबिलिटी मिलकर नई टेक्नीक और शेयरिंग प्रोजेक्ट्स के बड़े मौके बना रही हैं. भारत और इटली डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटजिक टेक्नीक्स जैसे क्षेत्रों में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं.
लेख में कहा गया कि भारत का धर्म और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जैसे मूल्य इटली की ‘मानवतावादी’ परंपरा से मेल खाते हैं. इसकी जड़ें पुनर्जागरण काल यानी रेनेसां में हैं. यही वजह है कि दोनों देशों की सोच का मकसद ऐसी साझेदारी की नींव रखना है जिसमें दोनों देशों के लोग केंद्र में हों. लेख में दोनों प्रधानमंत्रियों ने लिखा कि हम एक नए सेक्टर्स को उभरते देख रहे हैं, जिसे ‘इंडो-मेडिटेरेनियन’ कहा जा सकता है. यह व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, डेटा और विचारों का एक महत्वपूर्ण गलियारा बन रहा है, जो हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ता है.
26 साल बाद पहली द्विपक्षीय यात्राबता दें कि पांच देशों की यात्रा पर गए पीएम मोदी का आखिरी पड़ाव रोम था. पिछले 26 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का इटली में यह पहला द्विपक्षीय दौरा है. हालांकि, इससे पहले पीएम मोदी 2021 और 2024 में जी-20 और जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने इटली गए थे. लेकिन द्विपक्षीय दौरे के तौर पर ये उनकी पहली रोम यात्रा है.
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