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यूपी में किसने स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का सिर धड़ से अलग कर दिया?

ये घटना उत्तर प्रदेश के भदोही की है. सोशल मीडिया पर ये खबर खूब वायरल हो रही है.

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पोस्ट में जो झूठ बताया गया है, वो लाखों लोगों तक पहुंच चुका है. इसका नुकसान सोचिए. हिंदुओं और मुसलमानों के बीच का माहौल बिगाड़ने के लिए सारी तिकड़में लगाई जा रही हैं.
अभी सोशल मीडिया पर एक खबर चल रही थी. उत्तर प्रदेश के भदोही में मुस्लिमों की बताई गई एक 'करतूत' की खबर. इस वायरल हुई खबर के मुताबिक भदोही में स्वामी विवेकानंद की एक मूर्ति थी, जिसे मुसलमानों ने तोड़ दिया. मूर्ति का सिर धड़ से अलग कर दिया. ये खबर सोशल मीडिया पर खूब चली. फेसबुक. वॉट्सऐप. खूब शेयर की गई. शायद आपने भी देखा होगा इस पोस्ट को. तो क्या सच में ऐसा हुआ था? क्या सच में कुछ मुसलमानों ने स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के साथ तोड़-फोड़ की?
कई वेबसाइट और फेसबुक पेज पर इस तरह की फर्जी खबर को हजारों-लाखों लोग पढ़ते, शेयर करते हैं.
कई वेबसाइट और फेसबुक पेज पर इस तरह की फर्जी खबर को हजारों-लाखों लोग पढ़ते, शेयर करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से आई थी वायरल खबर उत्तर प्रदेश में एक जिला है. भदोही. वहां एक सड़क है. नई बाजार. यहां है सदर कोतवाली. यहां स्वामी विवेकानंद की एक मूर्ति थी. 26 अक्टूबर को ये मूर्ति टूटी-फूटी हालत में मिली. सिर टूटकर जमीन पर पड़ा था. देखते ही देखते मुस्लिमों को इसके लिए जिम्मेदार बताने वाले फेसबुक पोस्ट वायरल होने लगे. फेसबुकिया झुठ्ठों ने इस खबर को कैच कर लिया दैनिक भारत, शंखनाद जैसी फर्जी वेबसाइट्स और लाखों लाइक्स वाले फेसबुक पेज से ये और ज्यादा फैल गया. इन्होंने लिखा:
ब्रेकिंग: स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का सिर धड़ से अलग कर दिया गया. भदोही, उत्तर प्रदेश की घटना है. आरोप है कि मुसलमानों ने इसे अंजाम दिया. क्या भारत सऊदी अरब बन गया है? मीडिया क्यों चुप है? भदोही पुलिस के SP ने बताई सच्चाई वैसे तो आल्टन्यूज़, बूमचेक जैसी वेबसाइट्स ने भदोही पुलिस के ट्वीट के हवाले से खबर की, लेकिन हमने भदोही के SP सचींद्र पटेल को फोन मिलाया. उनसे इस घटना के बारे में पूछा. जो मालूम चला, वो आप भी जान लीजिए:
एक लड़का है. बाजार में जहां स्वामी विवेकानंद की ये मूर्ति लगी थी, उसके पास ही एक बस्ती है. वहीं रहता है. ये ही कोई 19-20 साल उम्र होगी उसकी. नाम है नीरज गौतम. दिमागी तौर पर थोड़ा बीमार है. दवाई भी चल रही है उसकी. घटना वाले दिन उसकी अपने घर पर कुछ बहस हुई थी. घरवालों ने डांटा उसको किसी बात पर. तो वो घर से निकलकर बाजार में आ गया. इसी मूर्ति के पास बैठ गया. कुछ लोगों ने उसे वहां बैठे देखा और टोक दिया. कि मूर्ति के पास क्यों बैठे हो. नीरज को गुस्सा आया. वो गया और कहीं से डंडा वगैरह लेकर आया. नाराजगी में उसने मूर्ति तोड़ डाली.
भदोही पुलिस का फेसबुक पेज. सोशल मीडिया पर इतना झूठ फैलाया जा रहा है कि फेसबुक और ट्विटर पर मौजूद रहे बिना पुलिस का काम नहीं चलने वाला.
भदोही पुलिस का फेसबुक पेज. सोशल मीडिया पर इतना झूठ फैलाया जा रहा है कि फेसबुक और ट्विटर पर मौजूद रहे बिना पुलिस का काम नहीं चलने वाला.

पुलिस ने साफ कहा: घटना का मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है SP सचींद्र पटेल ने साफ-साफ कहा. कि इस मामले को कोई सांप्रदायिक ऐंगल नहीं है. हमने उनसे पूछा कि वो सोशल मीडिया पर इस तरह अफवाहें फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करते हैं या नहीं. तो उन्होंने बताया कि भदोही पुलिस ट्विटर और फेसबुक दोनों जगहों पर मौजूद है. उनका अपना अकाउंट है. भदोही पुलिस को पता चला कि लोग मूर्ति वाली घटना के सहारे सोशल मीडिया पर झूठ फैला रहे हैं और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. तो पुलिस ने कार्रवाई की. अपने पेज पर सच्चाई भी डाली, ताकि लोग सच जान सकें. शंखनाद का काम ही यही है: मुसलमानों के लिए जहर फैलाना शंखनाद के ट्वीट को हजारों बार रिट्वीट किया गया है. इसके पेज पर जाकर देखिए. बहुत सारी फर्जी खबरें मिलेंगी. इसका काम ही है. नफरत फैलाना. मुसलमान इसके निशाने पर रहते हैं. उनके कुछ हालिया पोस्ट इस तरह हैं:
  • जैन मां-बेटे को मुस्लिम भीड़ ने पीटा. पुलिस खड़ी होकर जिहाद देखती रही
  • मुसलमान बॉयफ्रेंड से मिलने गई लड़की. लड़के ने गैंग रेप किया. रेप जिहादी था
  • दो मुसलमान लड़कों ने हिंदू लड़की को किडनैप किया और उसके साथ रेप जिहाद किया
  • इमाम बुखारी ने शुक्रवार की नमाज में कहा, लव जिहाद करो
थोड़ा सा दिमाग लगाकर झूठ पकड़ा जा सकता है अगर आप जरा भी दिमाग लगाएंगे, तो इन जैसों का अजेंडा समझ जाएंगे. माना कि कुछ ऐसे भी मामले होंगे, जहां अपराध करने वाला मुसलमान होगा. तो? क्या इसके आधार पर सारे मुसलमानों को निशाना बनाना ठीक है? फिर तो हिंदू, ईसाई, जैन, बौद्ध समुदाय से भी कोई न कोई अपराधी होगा. तो क्या सारे समुदायों से नफरत की जानी चाहिए? सबके लिए जहर उगलना चाहिए? एक और वेबसाइट का जिक्र करना बनता है यहां. इसने भी ये स्टोरी लगाई. मगर एकदम जहरीला ऐंगल देकर. वेबसाइट ने लिखा:
उत्तर प्रदेश के भदोही में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति को इस्लामिक स्टेट (ISIS) के अंदाज में नुकसान पहुंचाया गया.
अंदर लेख में भी सरासर गलत जानकारियां दी गईं. वेबसाइट ने लिखा:
धुर वामपंथी और हिंदू-विरोधी कट्टरपंथियों के अलावा कोई और स्वामी विवेकानंद का अपमान करने की सोच भी नहीं सकता है.

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लाखों लोग ऐसी फर्जी खबरें पढ़कर दिल में सांप पाले घूमते हैं सोचकर देखिए. ये कैसी भाषा है? जैसी सोच है, वैसी ही भाषा है. कूड़ा. एकदम कचरा. फालतू. हम बार-बार समझाते हैं. ऐसी कचरा चीजें मत पढ़ा कीजिए. मन सड़ जाएगा. बेमतलब की नफरत भर जाएगी दिल में. जब अंदर नफरत भरी होगी, तो नफरत की बांटते रहेंगे. सोचिए. जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर ये झूठ शेयर किया है, वो तो उसको ही सच मानकर बैठे रहेंगे. अगर हमारी वेबसाइट पढ़ेंगे, तो सच जानेंगे. ऐसे लोगों की एक और दिक्कत है. उनको बस इस तरह का जहर और भड़काऊ चीजें ही सच्ची लगती हैं. इनमें से ज्यादातर लोग किसी काम की किताब, अखबार या वेबसाइट को हाथ भी नहीं लगाते हैं. मगर हम चाहते हैं कि उन तक भी पहुंचे ये सच. अगर आपको सोशल मीडिया पर ऐसा ही कोई फर्जीवाड़ा नजर आए, तो हमें बताइए. हम करेंगे उसकी पड़ताल और दूध-पानी अलग कर देंगे. इसके लिए हमें मेल करिए - LallanTopMail@gmail.com


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