इस जगह पर फैक्ट्री थी तभी तो पारले जी का नाम पारले जी पड़ा. जी माने जीनियस नहीं ग्लूको होता है. कंपनी का नाम जब 1929 में बनी तब पारले ग्लूको था, फिर लूको को चाय में डुबाकर खा गए, जी बस बचा. पारले नाम विले पार्ले रेलवे स्टेशन से आया. और विले पार्ले नाम एक पुराने विलेज 'पार्ले' के नाम से आया. पहले टाफी बस बनाते थे अब तो एन-तेन का का नहीं बनाते.पारले जी खाके तो शक्तिमान भी उड़ता था. https://www.youtube.com/watch?v=Uv4QwN-i26I अब तो फैक्ट्री इतनी प्राचीन हो गई कि लोगों को पता ही नहीं लगता जगह का नाम बिस्किट पर पड़ा था कि बिस्किट का नाम जगह के नाम पर. हाल ये है कि कंपनी रोज 40 करोड़ बिस्किट बनाया करती है, ये इंडिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट और खाया जाने वाला बिस्कुट है. लेकिन लो, जहां सबसे पहले बिस्किट बना करता था, वो फैक्ट्री ही बंद हो गई. https://www.youtube.com/watch?v=4fsbQhxNXjo
पारले-जी बिस्कुट बनाने वाली फैक्ट्री बंद हो गई है
विले पार्ले में 87 साल पुरानी सबसे पहली फैक्ट्री बंद हो गई,, इसी के नाम पर कंपनी का नाम पड़ा था.
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फोटो - thelallantop
पारले-जी किसने न खाया होगा. हम पानी में डुबा-डुबा खाते थे, बहुत मीठा लगता है. लेकिन एक बैड न्यूज है. जो कंपनी मुंबई के विलेपार्ले में अपने बिस्किट बनाती थी. वो अपनी वहां वाली फैक्ट्री बंद हो गई है. ये सबसे पुरानी फैक्ट्री है. इसी पर नामकरण हुआ था. 87 साल से वहीं बिस्किट बन रहे हैं. इस कारखाने में प्रोडक्शन कम हो गया तो कंपनी ने कहा इसको बंद कर देते हैं. तीन सौ लोग अब भी वहां काम करते थे. वो वीआरएस ले लिए. 10 हजार करोड़ के बिस्किट बना करते थे इस जगह पर.
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