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1993 बम ब्लास्ट: अबू सलेम को उम्रकैद, ताहिर और फिरोज़ को फांसी

ये मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस 'पार्ट बी' से जुड़ा फैसला है. अबू को फांसी नहीं दी जा सकती थी.

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अबू सलेम उसे मिली उम्रकैद में कितने साल जेल में रहेगा, ये अभी साफ होना है
1993 में हुए बंबई सीरियल ब्लास्ट मामले के 'पार्ट बी' (लेग -2)* में आज टाडा की विशेष अदालत का फैसला आ गया है. 16 जून,2017 को विशेष टाडा जज जीडी सनप ने इस मामले के सात आरोपियों में से छह को बम धमाकों की साज़िश का दोषी माना था और एक को टाडा कानून के तहत. एक आरोपी को बरी कर दिया गया था. 7 सितंबर, 2017 को इनमें से दो को फांसी, दो को उम्रकैद और एक को दस साल की सज़ा हुई है.
साज़िश के आरोपीः अबू सलेम, मुस्तफा दौसा, फिरोज़ अब्दुल राशिद खान, रियाज़ सिद्दीकी, ताहिर मर्चेंट और करीमुल्ला खान.
बरीः अब्दुल कय्यूम
क्या जुर्म था, कितनी सजा हुई?
#1. अबू सलेम - उम्रकैद, 2 लाख का जुर्माना
अबू सलेम को साज़िश का दोषी पाया गया था. वही बंबई धमाकों के लिए लाए हथियार और RDX भरूच से बंबई लाया था. इसी में से कुछ संजय दत्त को दिए गए थे. अबू सलेम को 2002 में पुर्तगाल के लिस्बन से गिरफ्तार किया गया था. इसे हिंदुस्तान लाने में भारत को 3 साल मशक्कत करनी पड़ी थी. पुर्तगाल में मौत की सज़ा पर रोक है. तो पुर्तगाल ने इसी शर्त पर अबू को भारत भेजा कि उसे किसी हालत में फांसी नहीं होगी. इसलिए इस मामले में तमाम आरोपों के बावजूद उसे फांसी की सज़ा नहीं हो सकती. भारत लाए जाने के बाद अबू सलेम ने सीबीआई की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया था. अदालत का फैसला सुन कर अबू रोने लगा था.
 
अबू सलेम ने चहरे पर प्लास्टिक सर्जरी कराई थी जो जेल के दौरान उखड़ने लगी थी
अबू सलेम ने चहरे पर प्लास्टिक सर्जरी कराई थी जो जेल के दौरान उखड़ने लगी थी

 
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक उम्रकैद पूरी ज़िंदगी तक के लिए होती है. पुर्तगाल में सबसे ज़्यादा सज़ा 25 साल की होती है. इस लॉजिक से अबू सलेम अपने लिए अधिकतम 25 साल की सज़ा की मांग करता रहा है. इस मामले में सीबीआई के वकील के मुताबिक पुर्तगाल ने अबू को भारत सौंपने वक्त शर्त रखी थी, कि अबू को 25 साल से ज़्यादा जेल में नहीं रखा जाएगा. इसलिए संभव है कि अबू सलेम अपनी सज़ा पूरी कर के जेल से बाहर आ जाए. प्रदीप जैन मर्डर केस में अबू सलेम पहले से ही उम्रकैद की सज़ा काट रहा है.
#2. मुस्तफा दौसा 
धमाकों को प्लान करने के लिए हुई पहली मीटिंग इसी के दुबई वाले घर में हुई थी. इसका बड़ा भाई मोहम्मद दौसा अब भी फरार है. बंबई में लाए गए हथियारों की पहली और तीसरी खेप यही लाया था.  इसे 2003 में दुबई में गिरफ्तार किया गया था. बाद में इसका प्रत्यर्पण करा कर भारत लाया गया. कहते हैं कि मु्स्तफा जेल में राजा की ज़िंदगी जीता था और जेल से ही उसने अबू सलेम पर हमला कराया था. 28 जून, 2017 को मुस्तफा दौसा की कार्डिएट अरेस्ट से मौत हो गई थी.
 
कानून उसे सज़ा सुना पाता, उस से पहले ही मुस्तफा दोसा की मौत हो गई
कानून उसे सज़ा सुना पाता, उस से पहले ही मुस्तफा दौसा की मौत हो गई (फोटोःपीटीआई)

 
#3. फिरोज़ अब्दुल राशिद खान - फांसी
ये हथियारों को बंबई तक लाने में शामिल था. इसके लिए कस्टम अधिकारियों को घूस दी गई थी. धमाकों के बाद ये ओमान भाग गया था. कई साल भारत की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में रहने के बाद 2010 में जाकर इसे गिरफ्तार किया जा सका था. सीबीआई ने फिरोज़ को याकूब मेमन और टाइगर मेमन जितना ही दोषी माना था.  सीबीआई का कहना था कि फिरोज़ खान अगर चाहता तो धमाके रोक भी सकता था.
 
फिरोज़ अब्दुल राशिद खान का नाम उसके गिरफ्तार होने के बाद भी 2011 में पाकिस्तान को भेजी गई मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में रह गया था
फिरोज़ अब्दुल राशिद खान का नाम उसके गिरफ्तार होने के बाद भी 2011 में पाकिस्तान को भेजी गई मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में रह गया था

 
#4. ताहिर मर्चेंट - फांसी
ताहिर एक हवाला व्यापारी था. ये धमाकों के आरोपियों के लिए दुबई में रहने-खाने का इंतज़ाम करता था. वहां से ये ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान जाते थे. ताहिर को साज़िश का आरोपी माना गया था. फिरोज़ की तरह ताहिर को भी सीबीआई याकूब मेमन और टाइगर मेमन जितना दोषी मानती थी. सीबीआई के मुताबिक ताहिर भी गर चाहता, तो धमाके रुक सकते थे.
#5. करीमुल्ला खान - उम्रकैद, 2 लाख का जुर्माना
जज ने सबसे पहले करीमुल्ला खान को ही सज़ा सुनाई. उसे टाडा कानून के तहत दोषी माना गया था लेकिन उसे धमाकों की साज़िश में शामिल नहीं माना गया. सीबीआई ने करीमुल्ला के लिए भी फांसी की मांग की थी. करीमुल्ला अपनी पूरी ज़िंदगी जेल में रहेगा.
#6. रियाज़ सिद्दीकी - दस साल की सज़ा
रियाज़ मुंबई से गिरफ्तार किया गया था. रियाज़ को साज़िश का दोषी माना गया था.
#7. अब्दुल कय्यूम - बरी
अबू सलेम ने पूछताछ के दौरान कय्यूम का नाम लिया था. कोर्ट ने इसे दोषी नहीं मानते हुए बरी कर दिया था. कय्यूम ने बरी होने के बाद कहा था, 'हिंदुस्तान मेरा देश है, और मैं ज़िंगदी भर यहीं रहना चाहता हूं.
 
अब्दुल कय्यूम को कोर्ट ने साज़िश का दोषी नहीं माना था. (फोटोःएएनआई)
अब्दुल कय्यूम को कोर्ट ने साज़िश का दोषी नहीं माना था. (फोटोःएएनआई)

 
ब्लास्ट के ही मामले में याकूब मेमन को 2015 में फांसी हुई थी. इन्हीं धमाकों में संजय दत्त अवैध हथियार रखने के दोषी पाए गए और उन्हें टाडा कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई थी.

'बाबरी का बदला' लेने के लिए शहर में RDX बो दिया था

दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा ढहा दिया गया जिसके बाद बंबई में बड़े पैमाने पर दंगे हो गए थे. इसके बाद दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेनन, मोहम्मद दोसा और मुस्तफा दोसा ने 'बाबरी मस्जिद ढहाए जाने का बदला लेने के लिए' बंबई में ब्लास्ट कराने का प्लान बनाया था. 12 मार्च 1993 को बंबई में 12 मिनटों के भीतर 12 जगहों पर बम-ब्लास्ट हुए थे - बंबई स्टॉक एक्सचेंज, कथा बाज़ार, लकी पेट्रोल पंप, सेंचुरी बाज़ार, माहिम के पास की मछुआरा कॉलोनी, एयर इंडिया बिल्डिंग, ज़वेरी बाज़ार,  होटल सी रॉक, प्लाज़ा थिएटर, सेंटौर होटल और सहर एयरपोर्ट. बंबई सीरियल ब्लास्ट में दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े पैमाने पर RDX  का इस्तेमाल हुआ था.
बंबई में कुछ ही दिन पहले हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए थे. तो धमाकों के बाद शरद पवार ने बयान दिया कि 12 नहीं 13 ब्लास्ट हुए हैं, एक मुस्लिम इलाके में भी हुआ है. वजह थी कि लोग ये न समझें कि सिर्फ हिंदुओं को निशाना बनाया गया है और शहर का माहौल न बिगड़े.
बंबई सीरियल ब्लास्ट इतना बड़ा मामला था कि उसकी सुनवाई दो हिस्सों मे की गई
बंबई सीरियल ब्लास्ट इतना बड़ा मामला था कि उसकी सुनवाई दो हिस्सों मे की गई

पार्ट बी माने क्या?
बंबई सीरियल ब्लास्ट मामले की सुनवाई 1995 में शुरू हुई थी. बड़ा केस था, चार्जशीट 10,000 पेज से भी बड़ी थी. इस सुनवाई में 2005 तक गिरफ्तार हुए आरोपियों पर केस चला. सितंबर 2006 में इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई थी. इसमें टाडा कोर्ट ने 100 लोगों को दोषी माना था. 20 आरोपियों को उम्रकैद हुई थी और 12 को फांसी.
23 लोगों को बरी कर दिया गया था. फांसी की सज़ा वाले 12 आरोपियों में से 10 सज़ा उम्रकैद में बदल दी गई थी. याकूब मेनन की माफी की अर्ज़ी सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के यहां से लौटा दी गई थी जिसके बाद उसे फांसी दे दी गई थी.
 
सीरियल ब्लास्ट के वक्त राकेश मारिया मुंबई के डीसीपी ट्रैफिक थे. केस को क्रैक करने में उनकी अहम रोल था. वो आगे चलकर मुंबई पुलिस के कमिश्नर बने.
सीरियल ब्लास्ट के वक्त राकेश मारिया मुंबई के डीसीपी ट्रैफिक थे. केस को क्रैक करने में उनकी अहम रोल था. वो आगे चलकर मुंबई पुलिस के कमिश्नर बने.

 
इस मामले की सुनवाई के चलते हुए आरोपियों का गिरफ्तार होना जारी रहा. तो 2005 में तय किया गया कि पहले से चल रहे मामले की सुनवाई पूरी होने दी जाएगी और उसे बंबई सीरियल ब्लास्ट केस 'पार्ट ए' (लेग वन) माना जाएगा. 2005 के बाद पकड़े गए आरोपियों पर एक अलग केस चलेगा, जिसे 'पार्ट बी' माना जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट में दायर तीन याचिकाओं के चलते पार्ट बी की सुनवाई में देर हुई. 2012 में ट्रायल दोबारा शुरू हुआ और मार्च 2017 को सुनवाई पूरी हुई थी.



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