कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की गई? मुंबई की एनआईए कोर्ट में निसार अहमद सैयद बिलाल की याचिका पर सुनवाई हुई. निसार अहमद का बेटा सैयद अजहर साल 2008 के मालेगांव बम धमाकों में मारा गया था. धमाके में छह लोग मारे गए थे और 101 घायल हुए थे. ब्लास्ट के इल्जाम साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे और अन्य पर लगे थे. साध्वी प्रज्ञा पर हत्या, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां चलाने के आरोप लगे. अक्टूबर, 2017 में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. जमानत उनकी मेडिकल कंडीशन पर मिली थी. प्रज्ञा ठाकुर ने अदालत में कहा था कि उनको ब्रेस्ट कैंसर है. वे बेहद कमजोर हैं. चल-फिर नहीं पाती हैं.
अब निसार अहमद ने अपनी याचिका में NIA कोर्ट को बताया कि वे जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रही हैं. वे सुनवाई के दौरान कोर्ट में नहीं आती हैं. लिहाजा उनकी जमानत रद्द की जाए. साथ ही उनको चुनाव लड़ने से रोका जाए. प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा ने भोपाल से अपना उम्मीदवार बनाया है.

भोपाल में अपना नामांकन दाखिल करने प्रज्ञा ठाकुर व्हीलचेयर पर पहुंचीं. (फाइल फोटो)
अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा? इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक NIA कोर्ट ने कहा कि बिलाल की याचिका समर्थन योग्य नहीं है. मामला चुनाव आयोग से संबंधित है. अदालत भारत के किसी भी नागरिक को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकती. जब तक कि वो अयोग्य घोषित न किया गया हो. यहां तक कि कोई अपराधी जब तक आरोपी होता है. या फिर कोई आरोपी, जिसकी सजा पर कोर्ट ने रोक लगा रखी हो, चुनाव लड़ सकता है.
इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा-
1-चुनाव उसके दायरे में नहीं आते. 2-प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ ट्रायल जारी है. 3-ये नहीं कहा जा सकता है कि पहली नजर में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एनआईए कोर्ट के विशेष जज वीएस पडलकर ने कहा कि
जांच अधिकारी ने इस हिस्से को शामिल क्यों किया. ये अब तक पता नहीं है. जबकि इस बारे में याचिकाकर्ता ने कोई मांग ही नहीं की थी. ये अदालत उनकी (प्रज्ञा ठाकुर की) केस से बरी करने संबंधी याचिका 27 दिसंबर, 2017 को पहले ही खारिज कर चुकी है. आरोपी (प्रज्ञा ठाकुर), विशेष सरकारी वकील और याचिकाकर्ता को सुनने के बाद ही अदालत ने उनके (प्रज्ञा ठाकुर) और दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे. इसका मतलब ये है कि कोर्ट को एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) की चार्जशीट में प्रथम दृष्टया कुछ सबूत मिले हैं. ये बात और है कि बाद में इस केस की जांच NIA के हाथों सौंप दी गई.अदालत ने अपने आदेश में कहा कि
'अगर ये फैक्ट था कि आरोपी नंबर 1 (ठाकुर) के खिलाफ कोई मामला नहीं है, तो उनको बरी करने संबंधी याचिका पर आदेश देते समय, अदालत उनके प्रार्थना पत्र को मंजूर कर लेती. पर ऐसा नहीं हुआ. उनका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया.'मंगलवार 23 अप्रैल को NIA ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि साल 2016 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट में उसने प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए थे, जिससे उनके खिलाफ केस चलाया जा सके. इस पर कोर्ट ने एनआईए को लताड़ते हुए कहा कि एनआईए ने आरोपी की केस से बरी करने संबंधी याचिका खारिज करने के बाद कोर्ट के आदेश को कहीं चुनौती भी नहीं दी.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जिस दिन बीजेपी में शामिल हुईं, उसी दिन टिकट मिल गया. वह भोपाल में दिग्विजय सिंह के सामने चुनाव मैदान में हैं. फाइल फोटो.
अदालत में क्या-क्या बहस हुई? इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बिलाल के वकील हेताली शेठ ने अदालत में कहा कि प्रज्ञा ठाकुर ने अदालत को गुमराह किया है. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अदालत की सुनवाई के दौरान हाजिरी माफी हासिल की है. पर अब वो चुनाव प्रचार करती नजर आ रही हैं.
प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा और प्रशांत मग्गू ने इन आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अदालत में हाजिर होने से सभी आरोपियों को छूट मिली हुई है. अदालत में प्रज्ञा ठाकुर की हाजिरी की कोई जरूरत नहीं है. कुछ गवाहों का परीक्षण चल रहा है. और उनकी गवाही को उन्होंने (प्रज्ञा ठाकुर ने) कोई चुनौती नहीं दी है.
इस पर अदालत ने कहा कि जब भी जरूरत होगी, प्रज्ञा ठाकुर को कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा. पर हाल-फिलहाल उनका मौजूद रहना जरूरी नहीं है.
एनआईए के वकील अविनाश रसाल ने भी बिलाल की याचिका का विरोध किया और कहा कि चुनाव इलेक्शन कमीशन के दायरे में आते हैं.
प्रज्ञा ठाकुर के वकीलों ने कहा कि याचिका प्रचार और राजनीतिक फायदे के लिए दाखिल की गई थी. प्रज्ञा ठाकुर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं थीं. वे प्रतीक के तौर चुनाव लड़ रही हैं. ये दिखाने के लिए कि 'भगवा आतंकवाद' नाम की कोई चीज नहीं है.
इस पर अदालत ने उनसे कहा कि इस वक्त सिर्फ दाखिल की गई याचिका पर बात करें. प्रज्ञा ठाकुर के वकीलों ने बिलाल पर फाइन लगाने की भी मांग की.
बिलाल के वकील हेताली शेठ ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष के पब्लिसिटी संबंधी दावे से एक पिता के नुकसान को कम करके आंका जा रहा है. इस पर अदालत ने कहा कि एक पिता, जिसने इस घटना में अपना बेटा खोया है, उसे न्याय पाने का अधिकार है. अदालत ने बिलाल पर जुर्माना लगाने की याचिका खारिज कर दी.
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