
बेरोजगारी के बाद लोगों को जो बात सबसे ज्यादा अखर रही है वह है चीजों की बढ़ती कीमतें. इस मोर्चे पर भी मोदी सरकार को लोगों ने विफल बताया है.
मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में की गई नोटबंदी की गूंज अब भी सुनाई दे रही है. 10 फीसदी लोग अब भी मानते हैं कि नोटबंदी मोदी सरकार की विफलता थी. हालांकि सरकार हमेशा नोटबंदी के फैसले का बचाव करती आई है. नए किसान कानूनों से खड़ी हुई परेशानी को भी लोग मोदी सरकार की विफलता मान रहे हैं. सर्वे में शामिल 9 फीसदी लोग मानते हैं कि किसान संकट सरकार की विफलता है. भारत सरकार ने लॉकडाइन से लेकर वैक्सीनेशन तक के प्रयासों को अपनी सफलता माना है. लेकिन 8 फीसदी लोग मानते हैं कि मोदी सरकार कोविड-19 के संकट से निबटने में असफल रही है. बड़ी चुनौतियों में कोविड-19 सब पर भारी जहां तक भारत के लिए बड़े मुद्दे की बात है, तो इसमें कोविड-19 की समस्या लोगों को सबसे बड़ी नजर आई है. सर्वे में शामिल हुए 24 फीसदी लोगों का मानना है कि कोरोना वायरस देश का सबसे बड़ा मसला है. इसके बाद लोगों ने बेरोजगारी को बड़ा मसला करार दिया है. इसे 23 फीसदी लोगों ने बड़ा मसला कहा है. बढ़ती कीमतों को 9 फीसदी लोगों ने देश के सामने नजर आ रही बड़ी समस्या माना है. किसानों का गुस्सा और देश में भ्रष्टाचार को 7-7 फीसदी लोग देश का बड़ा मसला मान रहे हैं. इस तरह से अगर हम देखें तो देश अब भी कोरोना की समस्या को लेकर काफी चिंतित है.
मूड ऑफ दे नेशन के सर्वे में 3 जनवरी 2021 से 13 जनवरी 2021 के बीच लोगों की राय ली गई. सर्वे में कुल 12,232 लोग शामिल हुए. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 67 फीसद और शहरी क्षेत्रों के 33 फीसद लोग शामिल थे. सर्वे में 19 राज्यों के 97 संसदीय क्षेत्र और 194 विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने हिस्सा लिया है.





















