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'कोई हिंदू सोचे कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं,' US में बोले मोहन भागवत

Mohan Bhagwat on Hindutva: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में हिंदुत्व पर स्पीच दी. उन्होंने कहा कि जो हिंदू ये सोचता है कि भारत में एक भी मुसलमान नहीं होना चाहिए वो असल में हिंदू है ही नहीं. उन्होंने इससे जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया.

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मोहन भागवत ने हिंदुत्व विचारधारा पर बड़ी बात कह दी. (फोटो- YouTube/@centreforresponsibleleader5867)

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  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जो हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, वह वास्तव में हिंदू नहीं है।
  • 2018 में दिल्ली में एक लेक्चर में मुसलमानों ने पूछा था कि हिंदू राष्ट्र बनने पर मुसलमानों का क्या होगा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि धार्मिक विविधता को लेकर चिंताएं हैं।
  • मोहन भागवत ने कहा कि भारत में सभी धर्म एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं और अब सामाजिक विवादों का बोझ हटाकर एकता पर जोर देना आवश्यक है।

‘जो हिंदू ये सोचता है कि भारत में एक भी मुसलमान नहीं होना चाहिए वो असल में हिंदू है ही नहीं.’ ये शब्द हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के. अमेरिका के न्यूयॉर्क में उन्होंने एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने एक किस्सा सुनाया और ‘हिंदुत्व’ विचारधारा के असल मायने समझाते हुए ये बात कही.

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मोहन भागवत ने क्या कहा?

29 अगस्त को न्यूयॉर्क शहर में ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD) फोरम ने ‘फेथ लीडर्स कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया. इस कॉन्फ्रेंस में हिंदू, इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म के स्पीकर्स को बुलाया गया था. कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा,

मैंने असल में 2018 में दिल्ली में एक लेक्चर सीरीज के दौरान यह बात कही थी. वहां कुछ मुस्लिम भाई भी मौजूद थे और उन्होंने मुझसे सवाल पूछा था. उन्होंने कहा, ‘आप एक हिंदू संगठन हैं. आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं. तो हम मुसलमानों का क्या होगा? क्या आप हमें निकाल देंगे?’ मैंने जवाब दिया, ‘नहीं, यह हिंदुत्व नहीं है. अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा. अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना ​​होगा कि सभी रास्ते एक ही ईश्वर तक जाते हैं.’ 

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उन्होंने समझाया कि अगर कोई वाकई खुद को हिंदू कहता है, तो उसे ये समझना होगा कि ईशवर एक है. सभी धर्म बस अलग-अलग रास्ते हैं, जो उस एक ईश्वर की ओर ले जाते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि हर इंसान की अपनी इज़्ज़त है. सभी एक समान हैं. इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता.

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राजनीति पर क्या बोले?

मोहन भागवत ने अपनी स्पीच में कहा कि ‘पॉलिटिक्स अब सेल्फ इंटरेस्ट का गेम बन गया है.’ उन्होंने बताया कि जब तक हम ‘मैं’ से ‘हम’ पर नहीं आएंगे, ‘सॉल्यूशन’ नहीं निकलेगा. उनके मुताबिक, सामाजिक-धार्मिक ग्रुप राजनीति पर अपना असर छोड़ना चाहते हैं, मगर इसकी शुरुआत समाज से ही होती है. 

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मोहन भागवत ने अपनी स्पीच में ‘अतीत के भार’ (baggage) का भी ज़िक्र किया. उनका मानना है कि समुदायों के बीच जो टकराव रहा है, उसका बोझ लेकर हम घूम रहे हैं. लेकिन अब इस बोझ को उतारना होगा तभी हम सब साथ रह सकते हैं. उन्होंने ये भी माना कि भारत विविधताओं का देश है मगर उसके केंद्र में एकता छिपी है.

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