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हरदीप पुरी ने कहा था, दिल्ली में रोहिंग्या के लिए बहुत जगह है, भारत सरकार ने कहा, नहीं जगह है

हरदीप पुरी ने ही कहा था "लैंडमार्क डिसीजन है", फिर गृह मंत्रालय ने साफ किया कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है.

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रोहिंग्या मुसलमान. (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

केंद्र सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को दिल्ली में फ्लैट देने वाली बात का खंडन किया है. 17 अगस्त को ही केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने ये जानकारी दी थी कि भारत में शरण लिए हुए रोहिंग्या मुसलमानों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा दी जाएंगी. लेकिन इसके कुछ देर बाद गृह मंत्रालय ने साफ किया कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मंंत्रालय ने कहा है,

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"मीडिया के एक सेक्शन में अवैध रोहिंग्या विदेशियों को लेकर खबरें चलाई गईं. ये साफ किया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अवैध रोहिंग्या माइग्रेंट्स को EWS फ्लैट देने का कोई निर्देश नहीं दिया है. दिल्ली सरकार ने रोहिंग्याओं को किसी नई जगह पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा था. मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को ये आश्वस्त करने को कहा है कि अवैध रोहिंग्या अपनी मौजूदा लोकेशन में ही रहेंगे. गृह मंत्रालय ने उन्हें वापस भेजने का मुद्दा संबंधित देश के सामने उठा रखा है."

गृह मंत्रालय ने ये भी कहा है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत डिपोर्टेशन होने तक अवैध प्रवासियों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा. उसने कहा कि दिल्ली सरकार ने अभी तक रोहिंग्याओं की मौजूदा लोकेशन को डिटेंशन सेंटर घोषित नहीं किया है. उसे ऐसा तुरंत करने का निर्देश दिया गया है.

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इससे पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ही बताया था कि सरकार ने रोहिंग्या रिफ्यूजी को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा देने के लिए उन्हें EWS फ्लैट देने का फैसला किया. इसके लिए दिल्ली के बक्करवाला इलाके में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बने फ्लैट का चयन किया गया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा था,

"भारत ने हमेशा ही पनाह मांगने वालों का स्वागत किया है. एक लैंडमार्क डिसिजन के तहत रोहिंग्या रिफ्यूजी को दिल्ली के बक्करवाला में बने EWS फ्लैट्स (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बने घर) में शिफ्ट किया जाएगा. उन्हें बुनियादी सुविधाएं, UNHCR पहचान पत्र और 24 घंटे दिल्ली पुलिस की सुरक्षा दिए जाएंगे."

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वहीं दूसरे ट्वीट में केंद्रीय मंत्री ने लिखा,

"जिन लोगों ने भारत की रिफ्यूजी पॉलिसी को CAA से जोड़ते हुए झूठी अफवाहें फैलाकर अपना कैरियर बनाया है, वे इस कदम से निराश हो जाएंगे. भारत संयुक्त राष्ट्र के रिफ्यूजी कनवेन्शन 1951 का सम्मान और पालन करता है, और नस्ल, धर्म या संप्रदाय की परवाह किए बिना सभी को शरण देता है."

बता दें कि जब फैसला आया तो आम आदमी पार्टी समेत कई सारी पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने इस फैसले के खिलाफ नाराजगी ज़ाहिर की थी. और हरदीप पुरी के बयान के कुछ देर बाद गृह मंत्रालय ने कहा है कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है

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