उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सिविल कोर्ट के बाहर वकीलों के अवैध चैंबर पर बुलडोजर चला. यह कार्रवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर की गई. वकीलों ने आरोप लगाया कि जिन चैंबर को गिराने का आदेश दिया गया, उनके साथ ही दूसरे चैंबर पर भी बुलडोजर चलाया जा रहा है. इस दौरान बड़ी संख्या में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और नारे लगाए, जिसके वीडियो वायरल हो रहे हैं. इनमें कुछ लोगों को पुलिस पर पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है. हालात को काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा.
लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबर पर चला बुलडोजर, पथराव और पुलिस का लाठीचार्ज
Lucknow Bulldozer Action: अवैध चैंबर पर बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में वकीलों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. वहीं, इस कार्रवाई के विरोध में कुछ वकीलों ने खुद को चैंबर के अंदर बंद कर लिया. पत्थरबाजी के बीच पुलिस को लाठीचार्ज का इस्तेमाल करना पड़ा.


मामला पुराने हाई कोर्ट और स्वास्थ्य भवन के पास बने वकीलों के चैंबर से जुड़ा हुआ है. आज तक से जुड़े संतोष शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार, 17 मई की सुबह पुलिस और लखनऊ नगर निगम की टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची. फिर इलाके में बने वकीलों के गैरकानूनी चैंबर पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई.
बुलडोजर एक्शन के विरोध में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. वहीं, इस कार्रवाई के विरोध में कुछ वकीलों ने खुद को चैंबर के अंदर बंद कर लिया. स्थिति को कंट्रोल करने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया. प्रशासन का कहना है कि ये चैंबर अवैध ढंग के बने हैं, इसलिए अतिक्रमण हटाने के तहत ये बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है.
वकीलों ने प्रशासन पर हाई कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. वकीलों का दावा है कि कोर्ट का ऑर्डर सिर्फ 72 चैंबर को गिराने का है, जबकि पुलिस और नगर निगम की टीम ने इस ऑर्डर की आड़ में करीब 240 अन्य चैंबर भी गिरा दिए हैं. विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव भी किया. ऐसे में पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा.
वकीलों के चैंबर पर हुई बुलडोजर कार्रवाई पर लखनऊ वेस्ट के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP West) कमलेश कुमार दीक्षित का बयान आया है. DCP (वेस्ट) कमलेश दीक्षित ने कहा,
‘सभी को पहले ही नोटिस दे दिया गया था. निशान लगा दिया गया था. कई बार नोटिस दे दिया गया था. सारी कार्रवाई नियमानुसार चल रही है. कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हो रही है. उन्हीं चैंबर को गिराया जा रहा है, जिन्हें नोटिस दिया गया है. कार्रवाई आराम से चल रही है. कोई दिक्कत नहीं है.’
वकीलों का दावा है कि वे सालों से इन चैंबर में बैठकर अपना काम करते थे. ऐसे में इस बुलडोजर कार्रवाई का असर उनके काम पर पड़ेगा. उन्होंने मांग की कि अगर कार्रवाई हो रही है, तो उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लखनऊ नगर निगम को जिला और सत्र न्यायालय परिसर के आसपास हुए अतिक्रमण को बिना देरी हटाने का आदेश दिया था. नगर निगम ने कोर्ट में एक जांच रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें बताया गया कि वहां 72 लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है, जिनमें ज्यादातर वकील हैं. इसके बाद जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की बेंच ने नगर निगम को जल्द कानूनी कार्रवाई करने को कहा. जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन और पुलिस की मदद लेने के निर्देश भी दिए गए.
ये मामला तब सामने आया जब कोर्ट दो महिला वकीलों की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. दोनों ने स्पेशल SC/ST कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की कार्रवाई करने को कहा गया था. स्पेशल कोर्ट ने ये FIR पिछले साल दिसंबर में एक दूसरे वकील की याचिका पर दर्ज करने का आदेश दिया था.
दरअसल, पिछले साल अगस्त में महिला वकीलों और दूसरे वकीलों के एक समूह के बीच झगड़ा हुआ था. महिला वकीलों ने घटना के चार दिन बाद FIR दर्ज कराई थी, जबकि दूसरे पक्ष ने बाद में स्थानीय अदालत में मामला दर्ज कराया. महिला वकीलों की तरफ से पेश वकील ने अपनी दलील में कहा कि दूसरे ग्रुप के वकीलों ने महिलाओं के घर के पास गैर-कानूनी तरीके से अपना चैंबर बना लिया था, और वे शराब के नशे में लोगों के साथ बदसलूकी करते थे.
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