विजय ने 25 अक्टूबर, 2017 को अपने फैन्स के लिए एक खत जारी किया. इसमें उन्होंने मर्सल को हिट कराने के लिए उनका शुक्रिया किया. इस खत में उन्होंने अपने विरोधियों के खिलाफ कुछ नहीं कहा. लेकिन इस खत में दो ऐसी चीज़ें थीं जिन्हें खत का हाई पॉइंट कहा जा सकता है. लेटरपैड पर लाल स्याही से बोल्ड में विजय का पूरा नाम लिखा था - सी जोसफ विजय, इसके अलावा खत में विजय ने एक जगह लिखा, 'ईशू सबकी रक्षा करते हैं.'

विजय का अपने फैन्स को लिखा खत
विजय अपने फैन्स के लिए विरले ही लेटर जारी करते हैं और अपना नाम विजय ही लिखते रहे हैं. ये शायद पहली बार है कि विजय ने अपना पूरा नाम इस्तेमाल किया हो. साफ ज़ाहिर किया कि वो ईसाई हैं. ताकि वो टुच्चई बंद हो, जो उनके ईसाई होने के इर्द-गिर्द हो रही है.
नाम की वाहियात पॉलिटिक्स
नाम में से पहचान खोदकर निकालना और उस पर चोट करने का भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है. एक वक्त कांग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम ज़ोर देकर 'मियां' अहमद पटेल पुकारा जाता था. इसी तरह चुनाव आयुक्त लिंगदोह को 'जेम्स माइकल लिंगदोह' कहा गया. मंशा साफ होती थी, नाम में छुपी पहचान को लेकर कोई शुबहा न रहे. मालूम चले कि पटेल सरनेम वाले अहमद मुसलमान हैं और लिंगदोह ईसाई. एच राजा के ट्वीट से ये 'कड़वा सच' उजागर हुआ कि अपनी फिल्म में मंदिर से पहले अस्पताल बनाने की बात करने वाले विजय ईसाई हैं.

एच राजा का ट्वीट जिसमें उन्होंने विजय की ईसाइयत को निशाना बनाया
ऐसा कर के आपको 'व्यापक भारत' से काट दिया जाता है. और एक बार साबित कर दिया जाए कि आप भारत के 'देशभक्त मूल निवासी' (इसे हिंदू पढ़ें) नहीं हैं, तो आपको आसानी से हाशिए पर धकेला जा सकता है. तब आप पर चोट होगी भी तो लोग आपके साथ आने से कतराएंगे. जंग के लिहाज़ से ये एक बढ़िया रणनीति है. लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये घातक होता है. एक मियां को निशाना बनाता आक्षेप सैकड़ों या हज़ारों मुसलमानों को चुभता है. 'सी जोसफ विजय' को सरकार का दुश्मन बताने से दूसरे ईसाई भी आहत होंगे. और बात आहत बस होने की नहीं है. ध्यान इस बात पर भी दिया जाता है कि आपको इस तरह निशाना बनाने वाला किस धर्म से आता है. पहचान एच राजा के नाम से भी झलकती ही है.
लेकिन विजय ने इस बार इस रणनीति को पटखनी दे दी है. उन्होंने अपने पर हुए वार को ही अपना दांव बना लिया है. हम कायल हैं उस गज़ब के धीरज के, जो विजय ने दिखाया.
अब ये सवाल नहीं बचा है कि एच राजा और उनके साथी भाजपा नेता क्या करेंगे. अब सवाल ये बचा है कि आप क्या करेंगे?
सोचिए.
ताजमहल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, सुबूत ये हैं!













