मेरठ के मवाना कस्बे में असलम नाम का एक शख्स रहता है. उसकी चार बेटियां हैं. दो बेटियां पढ़ने के लिए मदरसे जाती थीं. आस-पड़ोस के ही कुछ लड़कों ने छेड़-छाड़ शुरू कर दी. लड़कियों ने कुछ वक्त इग्नोर किया. लेकिन ये बढ़ने लगा. फिर रेगुलर हो गया. लड़कियों ने मम्मी-पापा से इस बात की शिकायत की. पहले पापा ने समझाया-बुझाया. लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा. सब कुछ वैसे ही चलता रहा. जब बात हाथ से निकलने लगी, तो असलम ने आसपास के कुछ लोगों से मदद मांगी. लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की. हारकर बाप ने अपने लड़कियों का मदरसा जाना बंद कर उनकी पढ़ाई- लिखाई रोक दी.

अपनी बेटियों के साथ असलम.
इतने सब के बाद भी लड़कों की बद्तमीजी जारी रही. जो काम पहले वो सड़कों पर करते थे, अब घर में भी करने लगे. दूसरों के छतों पर चढ़कर चीज़ें फेंककर परेशान करते. घरवालों ने पुलिस में शिकायत की लेकिन पुलिसवालों ने मामले को सीरियसली नहीं लिया. लगातार टालते रहे. ये सब होते-होते एक साल बीत गया लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. और प्रशासन बिलकुल बेफिक्र रहा.

इन दोनों बहनों को पिछले 13 महीने से परेशान कर रहे थे मनचले.
थक-हारकर दोनों लड़कियों ने यूपी के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लेटर लिखा. इसमें उन्होंने पिछले 13 महीने में उनके साथ हुई घटनाएं बताईं. इस बात से मीडिया का ध्यान भी उन लड़कियों की ओर गया. मामले को तूल पकड़ता देख, जो पुलिस अब तक कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी, उसने फटाफट एफआईआर दर्ज़ कर ली. मेरठ के एसपी देहात राजेश कुमार ने मीडिया को बताया कि मामले में जांच चल रही है. लेकिन अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
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