यूपी में कांवड़ यात्रा को लेकर जारी किए गए निर्देशों पर घमासान मचा हुआ है (UP Kanwar Yatra controversy). पहले 18 जुलाई को मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस ने निर्देश जारी किया कि कांवड़ यात्रा के रूट पर पड़ने वाली दुकानों के मालिकों को अपने नाम के बोर्ड लगाने होंगे. ताकि पता चल सके कि वो दुकान किसकी है. इस निर्देश के खिलाफ विपक्षी नेताओं के बयान रुके भी नहीं थे कि 19 जुलाई को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे राज्य में कांवड़ यात्रा वाला निर्देश जारी कर दिया. अब इस पर बसपा सुप्रीमो और पूर्व सीएम मायावती का बयान आया है.
कांवड़ा यात्रा वाले निर्देश पर अब मायावती ने यूपी सरकार को बुरा सुनाया, कहा- "ये बहुत ही..."
BSP सुप्रीमो Mayawati का कहना है कि धर्म विशेष के लोगों का इस तरह आर्थिक बायकॉट करने की कोशिश बहुत ही निंदनीय है.


मायावती ने X पर इसे लेकर पोस्ट किया,
“यूपी और उत्तराखंड सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा को लेकर चुनावी फ़ायदे के लिए जारी किया गया ये आदेश, पूर्णतः असंवैधानिक है. धर्म विशेष के लोगों का इस प्रकार से आर्थिक बायकॉट करने का प्रयास बहुत ही निंदनीय है.”
वहीं, कांग्रेस नेता इमरान मसूद का कहना है कि सरकार के पास कोई और मुद्दे नहीं हैं, इसलिए सरकार इस तरह की बातें कर रही है. मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार को जब अपनी जिम्मेदारियों से भागना होता है, तब वो इधर-उधर की बातें करनी शुरू कर देती है. कांग्रेस नेता ने कहा, “आप जो नफरत की बात करते हैं, इससे कोई फायदा नहीं है. कावड़ वालों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. हमें आपस में मोहब्बत प्यार है, हम आपके एजेंडे से भटकने वाले लोग नहीं हैं.”
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समाजवादी पार्टी ने इस कदम को दो समुदायों के बीच दूरी पैदा करने की ‘कोशिश’ बताया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़, SP सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा,
“जर्मनी में तानाशाह एडोल्फ हिटलर के नाजी शासन के दौरान ऐसी प्रथाएं प्रचलित थीं. नाजियों ने जर्मनी में भी यही किया था... मुसलमानों का बहिष्कार करने और हिंदुओं की दुकानों पर जाने का संदेश दिया जा रहा है. यह सांप्रदायिक सोच कब तक चलेगी? इस तरह के आदेश रद्द किए जाने चाहिए.”
देवबंद के उलेमा मुफ्ती असद कासमी की भी यूपी सरकार के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया आई है. कासमी ने कहा, “इससे दूरियां पैदा होंगी. जो फिरका परस्त लोग हैं, उनको मौका मिलेगा कि वो छांट पाएं कि ये दुकान हिंदू की है, यह मुस्लिम की है. उनको फसाद करने में आसानी होगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने फ़ैसले पर एक बार और गौर करें.”
मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि हिंदू मजहब के लोग हर साल कावड़ यात्रा लेकर जाते हैं तो मुस्लिम कांवड़ियों के लिए कैम्प लगाते हैं, उनके खाने-पीने का इंतजाम करते हैं और पुष्प वर्षा भी करते हैं.
उधर यूपी सरकार ने अपने फ़ैसले में बताया कि कांवड यात्रा करने वाले लोगों की आस्था की 'पवित्रता' बनाए रखने के लिए ये फैसला किया गया है. सरकार का कहना है कि हलाल सर्टिफ़िकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने पर भी कार्रवाई होगी.
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