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CAA के विरोध में मणिपुर और असम में विरोध प्रदर्शन की तैयारी, विधानसभा की सुरक्षा बढ़ाई गई

CAA के विरोध में Manipur के कुछ हिस्सों से छिटपुट विरोध प्रदर्शनों की खबर आई है. साथ ही पूरे राज्य में बड़े स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा की गई है.

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मणिपुर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है. (सांकेतिक तस्वीर: PTI)

देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 यानी CAA के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है. ऐसे में मणिपुर (Manipur Protest) में बड़े पैमाने पर इसके विरोध की तैयारी चल रही है. राज्य में विपक्षी दलों और क्षेत्रीय संगठनों ने शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की है. विरोध-प्रदर्शन की आशंका को लेकर विधानसभा और जनता भवन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

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इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने दावा किया था कि लोकसभा चुनाव से पहले CAA को लागू किया जाएगा. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ीं सुकृता बरुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन दावों के बाद असम में पिछले कुछ हफ्तों से तनाव का माहौल बना हुआ है.

बढ़ते तनाव और प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए गुवाहाटी शहर में सड़कों के किनारे बांस के बैरिकेड लगाए गए हैं. साथ 11 मार्च की शाम को विधानसभा, जनता भवन और उसके आसपास भारी बैरिकेडिंग करके सुरक्षा बढ़ा दी गई है. जनता भवन असम के सचिवालय परिसर का नाम है. वहीं 11 मार्च की रात को कुछ हिस्सों से छिटपुट विरोध प्रदर्शन की भी खबरें आईं. गुवाहाटी के कॉटन यूनिवर्सिटी के सामने भी प्रदर्शन हुआ.

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असोम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने इसे 'ब्लैक डे' बताया है और राज्य भर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. असोम जातीय परिषद 2019 के CAA विरोध प्रदर्शनों के समय बनी पार्टी है. गोगोई ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के पूर्व अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दिल्ली के सामने घुटने टेक दिए हैं. उन्होंने कहा कि असम के लोग इसे समुदाय के खिलाफ अपराध के रूप में देख रहे हैं और उन्हें समुदाय के खलनायक के रूप में याद रखा जाएगा.

दिसंबर 2019 के CAA विरोध प्रदर्शन में असम में 5 लोगों की मौत हो गई थी.

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CAA से देश में रह रहे गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. गृह मंत्रालय ने बताया है कि आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में होंगे, जिसके लिए एक वेब पोर्टल उपलब्ध कराया गया है.

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