चुनाव आयोग के दो आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज पर सवाल उठाए. दोनों ने कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखकर शिकायत की. लेकिन कैबिनेट सचिवालय ने इन शिकायतों पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया. वजह बताई गई कि ये चिट्ठियां चुनाव आयुक्तों ने अपनी निजी हैसियत से लिखीं, न कि पूरे चुनाव आयोग की ओर से.
चुनाव आयुक्तों ने सीनियर अफसर की शिकायत की, सचिवालय ने कोई कार्रवाई नहीं की
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज की शिकायत कैबिनेट सचिव से की थी. RTI से सामने आए दस्तावेजों से ये जानकारी सामने आई है. चुनाव आयुक्तों ने क्या शिकायत की? और उन्हें इसका क्या जवाब मिला? सब जानिए.

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों से इस मामले की जानकारी सामने आई है. कैबिनेट सचिवालय का कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है. उसके कामकाज में सरकार का दखल नहीं होना चाहिए. इसलिए पूरे आयोग की ओर से आधिकारिक चिट्ठी आए बिना, इन शिकायतों पर कार्रवाई करना ठीक नहीं होगा.
चुनाव आयुक्तों ने क्या शिकायत की?चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग चिट्ठियां लिखी थीं. दोनों ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज पर सवाल उठाए थे.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मनीष गर्ग ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्तों, उप चुनाव आयुक्तों, महानिदेशकों और उनके बराबर के पदों पर तैनात अधिकारियों के बीच काम का बंटवारा बदल दिया था. आरोप था कि ऐसा करने से पहले न तो चुनाव आयोग से चर्चा की गई और न ही संबंधित अधिकारियों से सलाह ली गई.
दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि काम के बंटवारे में इस तरह के बदलाव आयोग से चर्चा या मंजूरी के बिना नहीं होने चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार मौखिक और लिखित निर्देश दिए जाने के बावजूद इन बातों का पालन नहीं किया गया. विवेक जोशी ने एक और शिकायत की. उनके मुताबिक, जब उन्होंने इस मामले से जुड़ी फाइल देखने की मांग की, तो प्रशासनिक विभाग ने उन्हें फाइल उपलब्ध नहीं कराई.
कैबिनेट सचिवालय ने क्या जवाब दिया?RTI के जवाब में दिए गए नोट में कैबिनेट सचिवालय ने कहा कि दोनों चिट्ठियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. लेकिन इन्हें पूरे चुनाव आयोग की आधिकारिक शिकायत नहीं माना जा सकता. सचिवालय ने सुझाव दिया कि दोनों आयुक्तों की चिट्ठियों के मिलने की पुष्टि की जाए और उनकी कॉपी मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रधान निजी सचिव को जानकारी के लिए भेजी जाए. सचिवालय ने यह भी कहा कि इस मामले को रिकॉर्ड पर रखा जाए, ताकि मनीष गर्ग से जुड़े भविष्य के फैसलों में इसे ध्यान में रखा जा सके. दस्तावेजों के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय को दोनों चिट्ठियां 5 अगस्त को मिली थीं. इसके बाद उनकी कॉपी कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, इस्टैब्लिशमेंट ऑफिसर अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय को भेजी गईं.
कैबिनेट सचिवालय ने अपने जवाब में चुनाव आयोग की संवैधानिक स्थिति का भी जिक्र किया. उसने कहा कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए बनाया गया है. उसकी व्यवस्था ऐसी है कि सरकार के दखल से उसे बचाया जा सके.
सचिवालय ने 2023 के कानून की धारा 18 का हवाला भी दिया. इसके मुताबिक, आयोग के कामकाज में जहां तक संभव हो, सहमति से फैसले लिए जाने चाहिए. अगर किसी मुद्दे पर मतभेद हो, तो बहुमत के आधार पर फैसला किया जा सकता है.
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मनीष गर्ग की नियुक्ति कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने 2 सितंबर 2024 को की थी. लेकिन सचिवालय ने कहा कि चुनाव आयोग में तैनाती के बाद उनके कामकाज और आचरण पर, आयोग के अपने नियम और दिशानिर्देश लागू होते हैं. इसी आधार पर सचिवालय ने कहा कि पूरे आयोग की ओर से आधिकारिक संवाद के बिना इन शिकायतों पर कार्रवाई करना अनुचित हो सकता है. ऐसा कदम संवैधानिक संस्था के कामकाज में दखल के तौर पर देखा जा सकता है.
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