आम आदमी पार्टी (AAP) ने मनीष सिसोदिया को केजरीवाल सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए रखने का फैसला किया है. रविवार, 26 फरवरी को आबकारी नीति घोटाला मामले में डिप्टी CM मनीष सिसोदिया को CBI ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद से ही सत्तारूढ़ दल और उसके नेतृत्व में जबर्दस्त हलचल मची हुई है. सवाल उठ रहे थे कि क्या अब मनीष सिसोदिया दिल्ली के शिक्षा मंत्री नहीं रहेंगे. अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने अपनी एक रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया है कि सिसोदिया को मंत्री पद से नहीं हटाया जाएगा. लेकिन ये देखना होगा उनकी गैरमौजूदगी में विभाग की जिम्मेदारी कौन संभालेगा. सत्येंद्र जैन के बाद मनीष सिसोदिया आम आदमी पार्टी के दूसरे मंत्री हैं जिन्हें गिरफ्तार किया गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय दिल्ली सरकार की कैबिनेट में कुल पांच मंत्री मौजूद हैं. इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास अभी कोई भी पोर्टफोलियो नहीं है. संविधान के आर्टिकल 239AA के मुताबिक दिल्ली सरकार में अधिक से अधिक सात मंत्री पद हो सकते हैं. द हिंदू से जुड़े निखिल एम बाबू की रिपोर्ट के अनुसार अगर सिसोदिया को कोर्ट से बेल नहीं मिलती है तो बाकी मंत्रियों को ज्यादा विभागों का कार्यभार संभालना होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी CM सिसोदिया के पास 18 से ज्यादा विभागों का कार्यभार है. लेकिन गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंत्री पद से नहीं हटाया जाएगा. AAP से जुड़े एक सूत्र ने इसकी वजह बताते हुए अखबार से कहा,
गिरफ्तारी के बाद मनीष सिसोदिया शिक्षा मंत्री रहेंगे या नहीं? AAP ने लिया बड़ा फैसला
दिल्ली सरकार में सात मंत्री हो सकते हैं.
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कैलाश गहलोत संभाल सकते हैं सिसोदिया के मंत्रालय“डिप्टी CM सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से हटाने पर लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा.”
यही नहीं, सूत्रों की मानें तो सिसोदिया के विभाग का कार्यभार कैलाश गहलोत को दिया जा सकता है. राजस्व मंत्री के तौर पर कैलाश गहलोत बजट से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा भी रहे थे. इसी को देखते हुए उन्हें कई और विभागों का कार्यभार सौंपा जा सकता है. आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने ये भी बताया कि पार्टी के पास प्लान है. लेकिन क्या प्लान है, इस पर वो कुछ नहीं बोले.
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को CBI ने 26 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया था. 27 फरवरी यानी आज उनकी कोर्ट में पेशी होगी. मनीष सिसोदिया से CBI ने शराब घोटाला मामले में 8 घंटे पूछताछ की थी, जिसके बाद गिरफ्तारी की गई है. जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाला मामले में कई लोगों से पूछताछ की गई थी, जिसमें पता लगा कि मनीष सिसोदिया ने आबकारी नीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
नई शराब नीति को लेकर 22 जुलाई 2022 के दिन दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने मनीष सिसोदिया के खिलाफ CBI जांच की मांग की थी. सक्सेना ने सिसोदिया पर शराब नीति बनाने में नियमों को नजरअंदाज कर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए थे. वहीं, BJP ने केजरीवाल सरकार पर नए टेंडर के बाद गलत तरीके से शराब ठेकेदारों के 144 करोड़ माफ करने का आरोप लगाया था.
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