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मणिपुर हिंसा: उग्रवादी नेता का दावा, 'हिमंता सरमा, राम माधव से समझौता कर BJP को चुनाव जिताया'

राम माधव ने कुकी उग्रवादी संगठन के नेता के दावों पर क्या कहा?

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हिमंत बिस्वा सरमा और राम माधव. (फाइल फोटो: आजतक)

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष को एक महीने से ज्यादा वक्त हो गया है. इस संघर्ष में 100 से अधिक लोगों की जान चुकी है और अभी भी हिंसा की खबरें आना जारी हैं. मणिपुर में BJP की अगुआई वाली सरकार ने हिंसा के लिए कई बार कुकी उग्रवादी संगठनों को दोषी ठहराया है. वहीं कुकी समुदाय राज्य सरकार से खासा नाराज है. उसने मणिपुर में हालात ठीक करने के लिए बनाई गई शांति समिति का विरोध किया है. कुकी संगठनों ने खास तौर पर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को समिति में शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताई है. इस बीच कुकी विद्रोही संगठन के एक नेता ने अपने एक खत में दावा किया कि 2017 में मणिपुर विधानसभा चुनाव जीतने के लिए BJP ने कुकी संगठनों की मदद ली थी.

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इंडिया टुडे NE की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुकी विद्रोही संगठन के नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को 2019 में एक खत लिखा था. इसमें दावा किया गया कि BJP के दो नेताओं हिमंता बिस्वा सरमा और राम माधव ने 2017 में मणिपुर विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कुकी संगठनों की मदद ली थी. असम के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और राम माधव तब पूर्वोत्तर राज्यों में एक्टिव थे. 2017 में BJP पहली बार मणिपुर की सत्ता में आई और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई.

रिपोर्ट के मुताबिक 8 जून, 2023 को NIA कोर्ट में यूनाइटेड कुकी लिबरेशन फ्रंट (UKLF) के अध्यक्ष एसएस हाओकिप की ओर से दायर एक एफिडेविट के साथ ये पत्र भी अटैच था. एसएस हाओकिप पर पूर्व कांग्रेस विधायक यामथोंग हाओकिप से अवैध हथियार खरीदने का आरोप है. एसएस हाओकिप ने जो 10 पिस्तौलें खरीदी थीं, वे कथित तौर पर राज्य पुलिस के शस्त्रागार से चुराई गई थीं. यामथोंग हाओकिप को 24 अगस्त, 2018 को उग्रवादी संगठनों को चोरी के हथियार देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

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रिपोर्ट के मुताबिक खत में UKLF नेता का आरोप है कि 2017 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हिमंता बिस्वा सरमा और राम माधव ने उनके संगठन और एक अन्य कुकी संगठन यूनाइटेड पीपल फ्रंट (UPF) के साथ एक समझौते किया था. इसके तहत उन्हें भाजपा उम्मीदवारों की चुनाव जीतने में मदद करनी थी. खत में UKLF नेता ने कहा,

"मैंने राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने में अहम भूमिका निभाई थी. सच कहूं तो अगर इन्हें हमारा समर्थन नहीं मिला होता तो राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनाना लगभग असंभव होता. संसदीय चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार ने हमारे अभियान के क्षेत्र में लगभग 80-90 प्रतिशत वोट हासिल किए."

अब एसएस हाओकिप का आरोप है कि अवैध रूप से खरीदी गई पिस्तौल वापस करने के बावजूद उन्हें हथियार खरीद मामले में झूठा फंसाया गया है. उन्होंने मामले में राहत की मांग करते हुए अमित शाह को बीजेपी पर किए गए अपने 'एहसानों' का हवाला दिया.

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हालांकि, एसएस हाओकिप के दावों को राम माधव ने खारिज किया है. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा,

“चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के कई लोग हमसे मिलते हैं. हालांकि, मुझे इस व्यक्ति या किसी उग्रवादी संगठन के नेताओं से मुलाकात याद नहीं है. ऐसे में उनसे मदद लेने का सवाल ही नहीं उठता. हम अपने कार्यकर्ताओं और जनता के समर्थन के बल पर चुनाव जीतते हैं.”

एसएस हाओकिप के इस दावे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया नहीं आई है. ये खबर लिखे जाने तक सीएम सरमा ने इंडिया टुडे NE के कॉल और मैसेज का जवाब नहीं दिया था.

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