The Lallantop

ममता पे फिर 'सेक्युलरिज्म' का दौरा, किताबों से 'राम' को हटाया

राम-वनवास पार्ट-2. अल्पसंख्यकों को रिझाने की कोशिश या कुछ और?

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
ममता बैनर्जी को एक बार फिर सेकुलरिज्म के कीड़े ने काट लिया लगता है. इस बार का ब्लंडर ज़्यादा बेतुका है. पश्चिम बंगाल सेकंडरी एजुकेशन बोर्ड की किताबों से उन्होंने एक शब्द हटवा दिया है. ऐसा शब्द जिसमे राम आता था. क्या ये स्कूलों को सेक्युलराइज़ करने की साज़िश है या हमेशा की तरह एक नया शोशा!
रामधोनु – जो इन्द्रधनुष के लिए बंगाली शब्द है – को बदल कर अब ‘रोंगधोनु’ कर दिया गया है. बोर्ड के मुताबिक रामधोनु से धार्मिक अर्थ निकल रहा था. इसी के साथ बोर्ड स्काई-ब्लू कलर के लिए ‘आकाशी’ शब्द को हटाकर ‘आसमानी’  ले लाया है. जो कि उर्दू ओरिजिन से है. ये दोनों शब्द सातवी क्लास की साइंस की किताब ‘पोरिबेश ओ विज्ञान’ के एक चाप्टर में थे, जिसका टाइटल ‘बरनाली’ है.rainbow
किताबों को री-डिजाईन करने वाली कमिटी के चेयरमैन अवीक मजुमदार ने कहा कि ये बदलाव बच्चों को वैकल्पिक शब्द सिखाने के लिए किए गए हैं. उन्होंने समझाया: “इन्द्रधनुष का राम या लक्ष्मण से कोई लेना देना नहीं है. वो सिर्फ रंगों का धनुष है. तो हमने सोचा कि ‘राम’ को ‘रोंग’ से बदलना लॉजिकल रहेगा, क्योंकि बंगाली में ‘रोंग’ शब्द कलर्स के लिए इस्तेमाल होता है. यहां तक कि कई जानेमाने बंगाली लेखक दशकों से ‘रोंगधोनु’ शब्द इस्तेमाल करते आए हैं."
शिक्षाविद डॉ मिरातुं नाहर इस फैसले के तर्क से सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा: “दोनों ही शब्दों को बदलने की ज़रूरत नहीं थी. हमें ‘रामधोनु’ से कभी कोई दिक्कत नहीं रही. आखिर समस्या क्या है? इस बदलाव का मकसद साफ़ साफ़ राजनीतिक है. अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के लिए ये सब किया गया है.”
ममता के इस कदम ने सोशल मीडिया के बाशिंदों में हलचल मचा दी है. कुछ लोगों ने तो इसका जी भर के मज़ाक उड़ाया है. ट्विटर पर तो दिन भर ये मसला ट्रेंड करता रहा. एक यूजर ने ट्वीट कर के कहा: “लोगों को चाहिए था - ‘राम’राज्य. दीदी ने दिया – ‘रोंग’राज्य.” एक और स्मार्ट यूजर का तंज कुछ इस तरह था, “ममता दी मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा पर यकीन क्यों नहीं करती, जबकि वो सेक्युलर भी हैं? क्योंकि वो ‘रोंग’ हैं.” एक ट्विटर अकाउंट ने डर ज़ाहिर किया: "बंगाल में अब RAMzan का नाम बदलकर RONGzan ना कर दे कहीं!"rd किसी ने कहा पढ़ाई को सेक्युलराइज़ करने के लिए ये किया गया है तो किसी ने ममता को 'जिहादी दीदी' कहते हुए बोला उन्होंने पूरे देश को शर्मिंदा कर दिया.rd2 एक ने पूछ लिया कि क्या अब कंप्यूटर की 'RAM' का नाम बदल कर 'रहीम' होने जा रहा है?, तो दूसरे का ऐलान था, "अब गब्बर को अपना डायलॉग बदल कर कहना पड़ेगा, रोंगगढ़ के वासियों...."rd1
ममता बैनर्जी पर पहले भी मुसलमानों का फेवर करने के आरोप लगते रहे हैं. हाल ही में धुलागढ़ में हुए फसादों के सन्दर्भ में बार बार ये कहा गया कि ममता ने हिन्दुओं की अनदेखी की. दंगों में उन्हें मदद मुहैया नहीं कराई. वैसे भी ममता बैनर्जी की छवि मुसलमानों के लिए सॉफ्ट-कॉर्नर रखने वाली नेता की तरह है. एक बहुत बड़े वर्ग द्वारा उनसे इसी बिना पर नफ़रत की जाती है. ऐसे में इस तरह के फैसले उनकी छवि को और भी दागदार करेंगे. 
अब बस ये दिन ना देखना पड़े कि कोई हिंदी में उठ खड़ा हो और कहे कि 'इन्द्रधनुष' का नाम बदल दो. इसमें हिन्दुओं के देवता 'इंद्र' का नाम है. हमारे बचपन की यादें करप्ट हो जाएंगी भई! 
ये भी पढ़िए

धुलागढ़ में हिफाज़त करने की जगह पुलिस ने कहा, "दो मिनट में घर छोड़ दो."

क्या है पश्चिम बंगाल में दंगे का सच?

 

Advertisement
Advertisement