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भारतीय सैनिकों को वापस भेज 'फंस' गया मालदीव, वहां कोई विमान तक नहीं उड़ा पा रहा, रक्षामंत्री परेशान

Maldives के President Mohamed Muizzu ने अपने देश से भारतीय सैनिकों की वापसी के लिए 10 मई की समय सीमा तय की थी. सभी सैनिक लौट आए हैं.

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भारत-मालदीव के बीच लंबे समय से तनाव (फाइल फोटो- आजतक)

मालदीव में तैनात भारतीय सैनिकों को वापस देश लौटे हुए कुछ ही दिन बीते हैं. इस बीच वहां से खबर आ रही है कि मालदीव के सैनिक भारतीय विमान नहीं उड़ा पा रहे हैं (Maldives Military Indian Aircrafts). मालदीव के रक्षा मंत्री घासन मौमून ने इस बात की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि उनकी सेना के पास अभी भी भारत के डोनेट किए हुए तीन विमानों को उड़ाने के लिए सक्षम पायलट नहीं हैं.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, घासन मौमून ने कहा,

विमानों को उड़ाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है जिसमें अलग-अलग चरणों को पास करना जरूरी है. हमारे सैनिक कुछ कारणों से ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाए इसलिए हमारे पास विमान उड़ाने के लिए लाइसेंस प्राप्त कोई भी व्यक्ति नहीं है.

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बता दें कि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपने देश से भारतीय सैनिकों की वापसी के लिए 10 मई की समय सीमा तय की थी. मुइज्जू सरकार के अनुरोध पर भारत ने 12 मार्च को 25 सैनिकों के एक बैच को वापस बुलाना शुरू किया था. 10 मई से पहले ही सभी भारतीय सैनिक मालदीव से भारत वापस लौट आए.

पिछले साल उन्होंने भारत विरोधी बातें बोलकर राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा था. चुनाव के कई साल पहले से मुइज्जू ‘इंडिया आउट’ कैंपेन को लीड कर रहे थे. फिर नवंबर 2023 में राष्ट्रपति बनने के बाद ही मुइज्जू ने भारतीय सैनिकों को हटाने की मांग की. उन्हें चीन का करीबी माना जाता है. 

ये भी पढ़ें- मालदीव में चीन समर्थक राष्ट्रपति मुइज्जू को मिली बड़ी जीत, अब संसद की 85% सीटों पर भी कब्जा हो गया

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मालदीव रणनीतिक रूप से भारत और चीन दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. यहां 2013 से ही लामू और अद्दू द्वीप पर भारतीय सैनिक तैनात थे. भारत ने मालदीव को साल 2013 में 2 ध्रुव हेलिकॉप्टर्स लीज पर दिए थे. फिर 2020 में 1 डोर्नियर एयरक्राफ्ट भेजा था. इनका इस्तेमाल हिंद महासागर में निगरानी रखने और मेडिकल ट्रांसपोर्ट में किया जाता है. अब तक भारतीय सैनिक इन एयरक्राफ्ट की देख-रेख करते थे. साथ ही वो मालदीव के पायलट्स को ट्रेनिंग भी देते थे.

किस बात पर बढ़ा विवाद?

2 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर समुद्र किनारे टहलते और समय बिताते कुछ तस्वीरें डालीं. प्रधानमंत्री ने लक्षद्वीप के बारे में लिखा कि घुमक्कड़ों को लक्षद्वीप जाना चाहिए.

इस पर मालदीव की एक मंत्री ने कह दिया कि भारत के तट मालदीव के समुद्री तटों के सामने कुछ नहीं हैं. साथ ही दो और मंत्रियों ने भी गलत बयानबाजी की थी. इन विवादित टिप्पणी को लेकर बवाल मच गया. हर कोई बयान की आलोचना करने लगा. फिर भारत ने मालदीव सरकार के सामने टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज करवाई.

राजनयिक विवाद के चलते मालदीव टूरिज्म को भारत की तरफ से बड़ा झटका लगा. अब मालदीव भारतीय पर्यटकों को लुभाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहा है. हाल ही में मालदीव के पर्यटन मंत्री इब्राहिम फैसल ने भारतीय पर्यटकों से अपील करते हुए कहा था,

कृपया मालदीव के पर्यटन का हिस्सा बनें. हमारी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर निर्भर करती है.

खबर है कि मालदीव में भारतीय पर्यटकों की संख्या पिछले साल की तुलना में इस साल के पहले चार महीनों में 42% तक कम हो गई है.

वीडियो: चीन से बातचीत के बाद भारतीय सैनिकों को मालदीव से क्यों निकालने लगे मुइज्जू ?

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