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वो 4 मौके जब अजित पवार ने BJP के साथ जाने के संकेत दे दिए थे!

पिछले साल सितंबर में पार्टी लीडरशिप के साथ अजित पवार की नाराजगी खुलकर सामने आई थी.

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फडणवीस के साथ महाराष्ट्र के डिप्टी बने अजित पवार (फाइल फोटो-पीटीआई)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता अजित पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बन गए हैं. उनके साथ एनसीपी के 8 और विधायक मंत्री बने हैं. अजित पवार के राजनीतिक भविष्य और महाराष्ट्र में इस राजनीतिक उलटफेर की अटकलें पिछले कई महीने से लग रही थीं. महाराष्ट्र में राजनीति के जानकार लगातार कह रहे थे कि अजित पवार सरकार में शामिल हो सकते हैं, पार्टी के भीतर समर्थन जुटा रहे हैं. हालांकि अजित खुलकर बोलने से बचते रहे. अजित पवार ने पिछले कुछ मौकों पर सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की थी. राजनीति में कोई नेता अपने प्रतिद्वंद्वियों की तारीफ कम ही करते हैं. अब अजित पवार ने कयासों पर मुहर लगा दी है.

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पिछले कुछ महीनों में कई बार ऐसे संकेत मिले, जब अजित पवार महा विकास अघाडी (MVA) गठबंधन और पार्टी लीडरशिप से नाराज दिखे. शपथ लेने के बाद अजित पवार ने दावा किया कि उनके पास पार्टी के सभी नेताओं का समर्थन है. हालांकि इसके तुरंत बाद शरद पवार ने इस बात से इनकार किया. उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में सच्चाई सामने आ जाएगी और वे पार्टी को फिर खड़ी करके दिखाएंगे. पिछले महीने NCP में हुए संगठनात्मक बदलावों में अजित पवार को कोई नई जिम्मेदारी नहीं मिली थी. शरद पवार ने अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को NCP का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था.

जब अजित पवार ने मोदी की तारीफ की

बीती 16 जून को जलगांव में वहां शरद पवार के साथ अजित भी पहुंचे थे. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मोदी साहब के काम की वजह से ही देश में भाजपा आई है. अजित ने कहा था, 

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"मोदी जी के कारण ही अनेक राज्यों में बीजेपी की सरकार है. यह वस्तुस्थिति है. जबकि वाजपेयी साहब के समय में भी उन्हें पूरा बहुमत नहीं मिला था. मोदी जी के पास करिश्मा है. जैसे एक समय में इंदिरा जी के पास था, नेहरू का था, उसी तरह आज मोदी जी का जलवा है."

मोदी ने देश का भरोसा जीता- पवार

अप्रैल महीने में अजित पवार ने मराठी अखबार सकाल को इंटरव्यू दिया था. इस इंटरव्यू में भी उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ की थी. अजित पवार ने तब कहा था कि पीएम मोदी के करिश्मे के कारण ही बीजेपी 2014 और 2019 में सत्ता में आई. पीएम ने देश का भरोसा जीता है, अपने भाषणों के जरिये उन्होंने लोगों को प्रभावित किया है. इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था कि क्या वो अगले विधानसभा चुनाव के बाद सीएम पद के लिए दावा करेंगे. इस पर अजित पवार ने कहा था, "2024 क्यों, मैं तो अभी मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हूं."

इसी इंटरव्यू में अजित पवार ने पार्टी के स्टैंड पर ही सवाल खड़ा कर दिया था. उन्होंने महा विकास अघाडी गठबंधन को लेकर कहा था, 

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"हम धर्मनिरपेक्षता और प्रगतिशील होने की बातें किया करते थे. लेकिन 2019 में सरकार बनाने के लिए हमने (एनसीपी और कांग्रेस) शिवसेना के साथ गठबंधन किया. और हम धर्मनिरपेक्षता से दूर हो गए...क्योंकि शिवसेना तो हिंदुत्व पार्टी है."

अजित पवार ने कहा था कि 2004 में NCP के पास अपना पहला मुख्यमंत्री बनाने का मौका था. पार्टी के पास नंबर थे. पार्टी आलाकमान के स्तर पर कुछ फैसले लिए गए. पार्टी अनुशासन को बनाए रखने के लिए हमने सीनियर्स के निर्देशों का पालन किया. 2004 में हमारा कांग्रेस के साथ गठबंधन था. हमने 71 सीटें जीती थी. यहां तक कि कांग्रेस ने भी मन बना लिया था सीएम NCP का होगा. लेकिन बाद में बताया गया कि मुख्यमंत्री कांग्रेस का होगा. हमने मौका गंवा दिया था.

NCP की बैठक में शामिल नहीं हुए

इस साल 21 अप्रैल को मुंबई में NCP की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी. लेकिन अजित पवार शामिल नहीं हुए थे. बैठक में शामिल नहीं पर जब खबरें लगने लगी कि अजीत पवार पार्टी के सीनियर नेताओं से नाराज चल रहे हैं, तो पवार ने सफाई दी थी कि उनका पहले ही दूसरे कार्यक्रम में जाने का प्लान था. तब NCP ने भी कहा था कि अजित पवार के बैठक में शामिल नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि वे पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं.

शरद पवार के साथ उनके भतीजे अजित पवार (फोटो- आज तक)

इसी दौरान पवार पर आरोप लग रहे थे कि वे एक बार फिर BJP की सरकार में शामिल होने के लिए पार्टी में समर्थन जुटा रहे हैं. इसके लिए पार्टी के भीतर विधायकों का एक 'प्रेशर ग्रुप' है. इस पर पवार ने जवाब दिया था कि NCP में ऐसा कोई प्रेशर ग्रुप नहीं है और इस झूठ को फैलाने की जरूरत नहीं है.

जब राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक छोड़ चले गए

पिछले साल 10-11 सितंबर को दिल्ली में NCP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी. बैठक में शरद पवार को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था. 11 सितंबर को बैठक के दूसरे दिन कुछ ऐसा हुआ कि अजित की नाराजगी सबके सामने आ गई थी. बैठक के बीच शरद पवार के सामने से ही अजित पवार उठकर चले गए थे. खबरें आईं कि महाराष्ट्र के NCP अध्यक्ष जयंत पाटिल को अजित पवार से पहले बोलने का मौका मिला था. इसके बाद जब अजित को बुलाया गया तो वे स्टेज छोड़कर चले गए.

पार्टी नेताओं से नाराजगी की बात पर अजित ने सफाई दी थी कि वे बैठक में इसलिए नहीं बोले क्योंकि ये राष्ट्रीय स्तर की मीटिंग थी. प्रफुल्ल पटेल ने स्टेज से घोषणा की थी कि अजित पवार, शरद पवार की अंतिम टिप्पणी से पहले बोलेंगे, लेकिन वे अपनी सीट से गायब थे. बाद में प्रफुल्ल पटेल ने बताया था कि अजीत वॉशरूम गए हैं और वे वापस आकर बोलेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ था. इस पूरे घटनाक्रम के बीच NCP के कार्यकर्ता अजित पवार के समर्थन में नारेबाजी करने लगे थे. सुप्रिया सुले भी उन्हें समझाती नजर आई थीं. समझाइश के बाद जब अजित वापस आए तो शरद पवार स्टेज से आखिरी टिप्पणी कर रहे थे.

2019 में डिप्टी सीएम बन दिया था इस्तीफा

महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों की माने तो अजित इसके लिए शरद पवार को भी मनाने की कोशिश कर रहे थे. क्योंकि उन्हें डर भी था कि अगर शरद पवार ने समर्थन नहीं किया तो 2019 जैसा हाल हो जाएगा. लेकिन अब शरद पवार ने कहा है कि वे अजित के साथ नहीं हैं. पार्टी के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई होगी. शरद पवार ने ये भी कहा कि उनकी अजित से कोई बात नहीं हुई है.

इससे पहले भी साल 2019 में अजित पवार बीजेपी के साथ मिले थे और डिप्टी सीएम बन गए थे. तब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना, NCP और कांग्रेस गठबंधन बनाकर सरकार गठन की कोशिश में थे. लेकिन उससे पहले ही देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. सबको सरप्राइज देते हुए 23 नवंबर 2019 की उस सुबह फडणवीस के साथ अजित पवार डिप्टी सीएम पद की शपथ ले रहे थे. अजित पवार ने अपने साथ कई NCP विधायकों के साथ होने का दावा किया था. लेकिन यह "सरप्राइज सरकार" सिर्फ 80 घंटे ही चल पाई थी, क्योंकि शरद पवार उन्हें वापस पार्टी के पक्ष में लाने में कामयाब रहे थे. बाद में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था.

वीडियो: किताबी बातें: शरद पवार की राजनीति के दिलचस्प किस्से, दांव-पेच, हार-जीत और इल्जाम

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