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गोहत्या की शिकायत पर मध्य प्रदेश प्रशासन ने NSA लगा दिया, 3 घर गिरा दिए!

गोहत्या की शिकायत मिलते ही उसी रात पुलिस की एक टीम आरोपियों की कॉलोनी पहुंची और एक घर की तलाशी ली. पुलिस दावे के मुताबिक़, उन्होंने वहां से गोमांस की दो बोरियां के साथ गाय की खाल और हड्डियां भी ज़ब्त की हैं.

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मध्य प्रदेश में गोहत्या के ख़िलाफ़ अलग से क़ानून है. (प्रतीकात्मक फोटो - AFP)

मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िला प्रशासन ने दो लोगों के घरों को गिरा दिया (Madhya Pradesh Bulldozer) है, जिनपर गोहत्या के आरोप लगे हैं. पुलिस का कहना है कि ये घर पूरी तरह से अवैध थे और बिना अनुमति के बनाए गए थे. हफ़्ते भर पहले सूबे के मंडला ज़िले में 11 घरों को ध्वस्त किया गया था. वहां भी पुलिस ने दावा किया था कि उन्हें इन घरों से गोमांस, जानवरों की खाल और मवेशियों के कंकाल मिले हैं. 

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ये वाला केस कैसे आया? 

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, घटना मुरैना ज़िले के नूराबाद गांव की बंगाली कॉलोनी की है. शुक्रवार, 21 जून की शाम को अनिपाल गुर्जर नाम के एक गांव वाले ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई कि उसने कुछ लोगों को गोहत्या करते देखा. और जब उसने विरोध किया, तो उन लोगों ने उसके साथ मार-पीट की. 

उसी रात पुलिस की एक टीम बंगाली कॉलोनी पहुंची और एक घर की तलाशी ली. पुलिस दावे के मुताबिक़, उन्होंने वहां से गोमांस की दो बोरियों के साथ गाय की खाल और हड्डियां भी ज़ब्त की हैं. 

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इसके बाद पुलिस ने नौ लोगों के ख़िलाफ़ मध्य प्रदेश गोहत्या विरोधी अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत दंगा, मारपीट और धमकी देने का मुक़दमा दर्ज किया. कथित तौर पर गोमांस बरामद होने के बाद आरोपियों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) भी लगा दिया गया. इस केस में अब तक छह लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और तीन फ़रार हैं.

पुलिस का कहना है,

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मामले में शामिल तीन लोग फ़रार हैं और उन्हें पकड़ने के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. अभी हमारे पास ये जानकारी है कि आरोपी मुरैना ज़िले के मूल निवासी नहीं हैं. काम की तलाश में यहां आकर बस गए हैं.

इस पूरे मामले के बीच स्थानीय प्रशासन ने आरोपियों के घरों का सर्वे किया. सर्वे के बाद अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों के मकान अवैध हैं और बिना अनुमति के बनाए गए हैं. अफ़सरों का कहना है कि इसके लिए नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया. इसीलिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल को भेजा गया. 

मामले से वाक़िफ़ एक पुलिस अफ़सर ने मीडिया को बताया कि ग्राम पंचायत ने भी उन्हें नोटिस जारी किया था. आख़िरी नोटिस बीते 22 जून को जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर न तो जवाब दिया और न ही अतिक्रमण हटाया.

इसके बाद ग्राम पंचायत के आदेश पर पुलिस और ज़िला प्रशासन की टीमों ने दो आरोपियों के मकान को ढहा दिया. एक और आरोपी के मकान की नींव भी ‘बुलडोज़र’ की ज़द में आई.

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