लेकिन शालिनी उठी. ठीक अपने बर्थडे के दिन. यानी 5 अप्रैल को. शालिनी ने अगले एक महीने तक अपने हाथ-पांव सड़ते हुए देखे. उनसे आती हुई बदबू बर्दाश्त की. हर हफ्ते सड़ी हुई खाल कटवाने जाने पड़ता.शालिनी ने आयुर्वेद का सहारा लिया. पर कुछ हुआ नहीं. सितंबर 2013 में शालिनी को अपने दोनों हाथ-पांव कटवाने पड़े. शालिनी को मालूम नहीं था कि उन्हें अपने बचे हुए शरीर के साथ क्या करना है. फिर एक दोस्त ने उनके कोच ऐयप्पा से मुलाकात करवाई. 2015 में शालिनी की ट्रेनिंग शुरू हुई. और आज शालिनी 37 की उम्र में हजारों लोगों के साथ दौड़ने के लिए तैयार हैं. उनके कोच कहते हैं वो शालिनी को 2020 के पैरालिंपिक में भाग लेते देखना चाहते हैं. यही शालिनी का अगला लक्ष्य है.
दोनों हाथ नहीं, दोनों पैर नहीं, ये औरत रेस में दौड़ेगी
उसने अपने हाथ-पांव सड़ते हुए देखे, उनसे आती बदबू बर्दाश्त की. पर हार नहीं मानी.
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फोटो - thelallantop
ये शालिनी सरस्वती हैं. भरतनाट्यम डांसर थीं. 'थीं', क्योंकि चार साल पहले इन्हें एक रेयर बीमारी हुई. जिसके चलते इनके दोनों हाथ-पांव चले गए. लेकिन इच्छाशक्ति नहीं गई. आने वाले रविवार को शालिनी 'TCS वर्ल्ड 10K' खुली दौड़ में हिस्सा लेंगी. बैंगलुरू शालिनी एक डांसर होने के साथ-साथ एक कॉल सेंटर में नौकरी करती थीं. 2012 की बात है. शालिनी अपने पति प्रशांत के साथ कंबोडिया गई थीं छुट्टी मनाने. वहां पहुंच कर पता चला कि वो प्रेगनेंट हैं. पति-पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं था. शालिनी प्रोफेशनली भी अच्छा कर रही थीं. जिंदगी में सब कुछ ठीक-ठीक हो रहा था. लेकिन कुछ ही महीनों में शालिनी को पता चला कि उनके शरीर में 'रिकेटसियल एटमॉस' नाम का बैक्टीरिया घर कर चुका है. बैक्टीरिया की वजह से शालिनी का बच्चा गर्भ में ही मर गया. शालिनी को लगा कि बीमारी प्रेगनेंसी से जुड़ी हुई है, ठीक हो जाएगी. ब्लड टेस्ट में पता चला कि प्लेटलेट की कमी है. डॉक्टरों को लगा डेंगी है. लेकिन धीरे-धीरे शालिनी के हाथ-पांव भी सड़ने लगे थे. शालिनी को ICU में शिफ्ट कर दिया गया. 4 दिन बेहोश रही. डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी.
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