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जम्मू-कश्मीर के मार्तंड सूर्य मंदिर में एलजी मनोज सिन्हा के पूजा करने पर आपत्ति क्यों?

ASI ने पूजा करने पर सवाल क्यों खड़े किए?

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ASI ने कहा मनोज सिन्हा को पूजा से पहले अनुमति लेनी चाहिए थी | फोटो: मनोज सिन्हा/ट्विटर

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) के अनंतनाग के मार्तंड सूर्य मंदिर में पूजा करने पर विवाद हो गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस पर आपत्ति जताई है. ASI के अधिकारियों ने कहा है कि अनंतनाग में उनके द्वारा संरक्षित मार्तंड सूर्य मंदिर परिसर में आयोजित पूजा से नियमों का उल्लंघन हुआ है.

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कब की थी पूजा?

एलजी मनोज सिन्हा ने रविवार, 8 मई को मार्तंड सूर्य मंदिर में ये पूजा की थी. ये प्राचीन मंदिर दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में है. न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक पूजा के लिए केंद्र शासित प्रदेश के बाहर से पुजारियों को बुलाया गया था. मनोज सिन्हा ने पूजा करने के बाद अपने एक ट्वीट में लिखा था,

‘मार्तंड सूर्य मंदिर, मट्टन, अनंतनाग में शुभ नवग्रह अष्टमंगल पूजा में भाग लिया. ये वास्तव में ईश्वरीय वातावरण में एक दिव्य अनुभव है. सरकार सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के प्राचीन स्थलों की रक्षा और विकास के लिए प्रतिबद्ध है. ऐसे स्थलों को जीवंत करना हमें धार्मिकता के मार्ग पर ले जाएगा और इस खूबसूरत धरती को शांति, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देगा.’

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ASI ने आपत्ति क्यों जताई?

PTI के मुताबिक एलजी की पूजा के बाद एएसआई ने अनंतनाग जिला प्रशासन को अपनी नाराजगी से अवगत कराया और चिंता जताई. ASI के एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर आजतक को बताया कि मार्तंड सूर्य मंदिर ASI के संरक्षण में है, ऐसे में पूजा करने से पहले संस्थान से अनुमति न लेना गलत है.

इस अधिकारी के मुताबिक प्राचीन स्मारक, पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1959 के नियम 7 (1) में कहा गया है कि केंद्र सरकार की लिखित अनुमति के बिना किसी संरक्षित स्मारक में बैठकें, स्वागत, दावत, मनोरंजन या सम्मेलन आयोजित नहीं किए जा सकते.

मार्तंड सूर्य मंदिर में पूजा करते मनोज सिन्हा | फोटो: मनोज सिन्हा/ट्विटर

आजतक से जुड़े सुनील भट्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ASI की नाराजगी के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार, 9 मई को इस मामले पर अपना पक्षा रखा. उसने स्पष्ट किया कि मार्तंड सूर्य मंदिर में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा को पूजा करने के लिए किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं थी. अनंतनाग के उपायुक्त डॉ. पीयूष सिंघला ने कहा,

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"उप राज्यपाल को 1959 के प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम के नियम 7 (2) के तहत पूजा करने की अनुमति दी गई थी. नियम 7 (2) के अनुसार नियम 7 (1) किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक प्रथा या प्रथा के अनुसरण में आयोजित होने वाले किसी भी कार्यक्रम पर लागू नहीं होगा."

मार्तंड सूर्य मंदिर का महत्व

भारत में सूर्यदेव के चार प्रमुख मंदिर हैं. इनमें उड़ीसा का कोणार्क सूर्य मंदिर, गुजरात के मेहसाणा का मोढेरा सूर्य मंदिर, राजस्थान के झालरापाटन का सूर्य मंदिर और कश्मीर का मार्तंड मंदिर शामिल है. मार्तंड सूर्य मंदिर कश्मीर के अनंतनाग से पहलगाम के रास्ते में पड़ता है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कश्मीर के कारकोटा राजवंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड़ा द्वारा 8वीं शताब्दी के आसपास किया गया था. बाद में इस्लामिक शासक सुल्तान सिकंदर बुतशिकन ने इसे नष्ट कर दिया था.

इस मंदिर को 8वीं सदी के आसपास बनाया गया था | फोटो: आजतक

इस मंदिर में 84 स्तंभ हैं. इन स्तंभों को नियमित अंतराल पर रखा गया है. मंदिर की राजसी वास्तुकला बेहद खूबसूरत है, जो इसे अलग बनाती है. ऐसा कहा जाता है कि राजा ललितादित्य सूर्य की पहली किरण निकलने पर सूर्य मंदिर में पूजा कर चारों दिशाओं में देवताओं का आह्वान कर ही अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते थे. वर्तमान में ये मंदिर खंडहर हो चुका है जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं.

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