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5 साल में नियुक्त हुए 650 हाई कोर्ट जज, SC-ST, OBC और अल्पसंख्यक कितने, सरकार ने बताया

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि 2018 से 2023 के बीच नियुक्त हुए हाई कोर्ट जजों में से कितने किस कैटगरी से आते हैं. CPI(M) के सांसद डॉक्टर जॉन ब्रिटास ने हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति पर सवाल किया था.

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भारत में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति कॉलेजियम व्यवस्था के तहत की जाती है. (फोटो क्रेडिट - कॉमन सोर्स)

पिछले 5 सालों में भारत के हाई कोर्ट्स में नियुक्त हुए जजों में से 75.69% सामान्य श्रेणी ( High Court Judges) के हैं. इस दौरान कुल 650 हाई कोर्ट जज नियुक्त हुए. इनमें से अनुसूचित जाति (SC) के 3.54, अनुसूचित जनजाति (ST) के 1.54,अन्य पिछड़ा वर्ग(OBC) के 11.7 और अल्पसंख्यक समुदाय के जजों की संख्या केवल 5.54% ही है.

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में ये जानकारी दी. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट)(CPI(M)) के सांसद डॉक्टर जॉन ब्रिटास ने हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति पर सवाल किया था.

इस पर कानून मंत्री मेघवाल ने जवाब देते हुए बताया, साल 2018 से 2023 के बीच नियुक्त हुए 650 हाई कोर्ट जजों में से 490 जनरल कैटगरी के हैं. वहीं, SC के 23, ST के 10, OBC के 76 और अल्पसंख्यक समुदायों के केवल 36 जज हैं.

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कानून मंत्री अर्जुम राम मेघवाल ने उच्च न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के आंकड़े भी जारी किए. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कुल 824 जजों में से केवल 111 जज महिलाएं हैं.

कैसे नियुक्त किए जाते हैं जज?

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति कॉलेजियम व्यवस्था के तहत होती है. संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत देश में सुप्रीम कोर्ट का गठन किया गया था. इसी के एक प्रावधान के अनुरूप जजों की नियुक्ति की जाती है. कॉलेजियम भारत के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठतम जजों का एक समूह होता है. इनकी सिफारिश के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्तियां होती हैं.

कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति करते हैं. नियम के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट द्वारा भेजी गई सिफारिश को एक बार सरकार वापस कर सकती है और उस पर पुनर्विचार करने की गुजारिश कर सकती है. लेकिन यदि सुप्रीम कोर्ट अपनी सिफारिश को दोहरा देता है तो सरकार के पास कोई विकल्प नहीं बचता है और उसे सिफारिश किए गए नामों को जज नियुक्त करना ही पड़ता है.

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पिछले कुछ सालों में कॉलेजियम और सरकार के बीच इस मुद्दे को लेकर भारी विवाद हुआ है. सरकार ने ऐसे नामों को वापस किया है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है. दूसरी तरफ सरकार के मंत्रियों ने भी कॉलेजियम पर सवाल उठाए हैं. सरकार सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए नेशनल ज्यूडीशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) बनाना चाहती थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को बदल दिया. इसके बाद भी इसे लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ. 

वीडियो: 'कोलेजियम की बजाय एग्जाम्स के जरिए होना चाहिए सुप्रीम कोर्ट के जजों का चयन'