इतने में दीपक ने घर में मौजूद 12 साल के बेटे शिवम को फोन किया. शिवम उस वक्त हॉल में था और कान में ईयरफोन लगाकर गेम PUBG खेल रहा था. पिता का फोन आया तो शिवम ने फोन काट दिया. शायद इसलिए क्योंकि उसकी गेम में वो फोन अवरोध पैदा कर रहा था. दो बार फोन किया मगर दोनों बार शिवम ने ये सोचकर फोन काट दिया कि पिता यूं ही फोन कर रहे होंगे. दीपक ऑफिस से घर आए और सीधे ऊपर पत्नी के कमरे में गए जहां रंजना पंखे से लटक चुकीं थी. वो दम तोड़ चुकीं थी. रंजना का फोन भी बंद था. टेबल पर सुसाइड नोट रखा था जिसमें लिखा था कि मैं अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रही हूं. इसके लिए किसी को परेशान न किया जाए. मैं अब भगवान के पास ही रहना चाहती हूं.

रंजना ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसकी मौत की जिम्मेदार वो खुद हैं. (इनसेट में पति-पत्नी)
अब यहां दोषी उस 12 साल के बच्चे को नहीं ठहराया जा सकता है. मगर वो बच्चा इस बात के साथ जिंदगी भर जिएगा कि काश वो उस वक्त पिता का फोन उठा लेता और मां के फांसी पर लटकने की खबर आसपास के लोगों को दे देता और उनकी जान बच जाती. बाद में शिवम ने ये भी बताया कि जब वो हॉल में मोबाइल पर गेम खेल रहा था तो मां उसके पास आईं थी और उसे प्यार से पुचकार कर ऊपर कमरे में चली गईं थी. अब शिवम उस आखिरी याद को याद कर करके दुखी है.
ये खबर इसलिए भी हर इंसान तक पहुंचनी जरूरी है क्योंकि पहले तो परिवार में कोई भी इंसान डिप्रेशन का शिकार न हो. दूसरा हर किसी से बात की जाए. उसका दुख दर्द समझा जाए. तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि परिवार में ये क्लैरिटी हो कि अगर कोई इंसान एक बार से ज्यादा फोन कर रहा है तो जरूर कोई इमरजेंसी होगी. इसलिए बच्चों से लेकर बड़ों तक को ये बताया जाए कि फोन उठाना है. यही बात शिवम को भी बताई गई होती तो रंजना की जान बच सकती थी.
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