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अब कुमार ने इस कविता के जरिए केजरीवाल पर हमला बोला

कुमार विश्वास ने खुद को शिलालेख बताया है, जिसे पार्टी ने कागज का टुकड़ा बना दिया है.

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फोटो - thelallantop
दिल्ली राज्य से तीन लोगों को राज्य सभा भेजा जाना था. राज्य के कुल 70 में से सबसे ज्यादा 67 विधायक आम आदमी पार्टी के थे, तो तीनों सांसद इसी पार्टी से होने स्वाभाविक थे. लंबे समय तक कयास लगे, जिसके बाद 3 जनवरी को आप नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नामों की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी की तरफ से संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और सुशील गुप्ता राज्यसभा के उम्मीदवार हैं. Aap Rajyasabha member उम्मीदवारी तय होने के बाद स्वाभाविक तौर पर इन तीन नामों की चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन इन तीनों से ज्यादा चर्चा में रहे आप नेता कुमार विश्वास. अलग-अलग मौकों पर उन्होंने संजय सिंह को तो कुछ नहीं कहा, लेकिन फिल्म बाहुबली के किरदारों कटप्पा और शिवगामी देवी के जरिए नारायण दास गुप्ता और सुशील गुप्ता पर लगातार हमले किए. मुख्यमंत्री केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्री गोपाल राय पर शेर-ओ-शायरी के जरिए हमलावर कुमार विश्वास ने एक बार फिर से अपनी नई कविता के जरिए केजरीवाल पर हमला बोला है. एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में पहुंचे कुमा विश्वास ने कविता के जरिए अरविंद केजरीवाल को सीधे तौर पर निशाने पर लिया. कविता में इशारों-इशारों में कुमार ने खुद को पार्टी का शिलालेख भी बताया, जिसे पार्टी ने अखबार का कागज बनाकर छोड़ दिया है. आप भी उनकी ये कविता पढ़िए. kumar2 प्रतिमाओं में पूजा उलझी विधियों में उलझा भक्ति योग सच्चे मन से षड्यंत्र रचे झूठे मन से सच के प्रयोग जो प्रश्नों से ढह जाए वो किरदार बना कर क्या पाया? जो शिलालेख बनता उसको अख़बार बना कर क्या पाया तुम निकले थे लेने स्वराज सूरज की सुर्ख़ गवाही में पर आज स्वयं टिमाटिमा रहे जुगनू की नौकरशाही में सब साथ लड़े, सब उत्सुक थे तुमको आसन तक लाने में कुछ सफल हुए निर्वीय तुम्हें यह राजनीति समझाने में ! इन आत्मप्रवंचित बौनों का दरबार बना कर क्या पाया? जो शिलालेख बनता उसको अख़बार बना कर क्या पाया kumar vishwas हम शब्द-वंश के हरकारे सच कहना अपनी परम्परा हम उस कबीर की पीढ़ी जो बाबर-अकबर से नहीं डरा पूजा का दीप नहीं डरता इन षड्यंत्री आभाओं से वाणी का मोल नहीं चुकता अनुदानित राज्य सभाओं से. जिसके विरुद्ध था युद्ध उसे हथियार बना कर क्या पाया? जो शिलालेख बनता उसको अख़बार बना कर क्या पाया? इस कविता के अलावा भी कुमार विश्वास ने राज्य सभा के उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद कई बार शायराना अंदाज में केजरीवाल पर हमला बोला है. एक टीवी चैनल में उन्होंने शेर पढ़ा- 'मेरे लहज़े में जी-हुज़ूर न था इससे ज़्यादा मेरा कसूर न था ' जिस दिन नाम का ऐलान हुआ था, उस दिन भी उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को फिल्म बाहुबली से जोड़ा और कहा कि आप माहिष्मती जैसी है. इसकी शिवगामी देवी कोई और है, जो बाहुबली को मारने के लिए हर बार कटप्पा बदलती रहती है. इसके अलावा कुमार ने कहा था- कुमार विश्वास की नाराजगी राज्यसभा में खुद को न भेजे जाने से ज्यादा दोनों गुप्ता बंधुओं को भेजे जाने से है. इस मुद्दे पर उन्होंने आप नेता केजरीवाल के साथ ही मनीष सिसोदिया और गोपाल राय पर भी हमला बोला. हालांकि टीवी चैनल के कार्यक्रम के दौरान जब उनसे बीजेपी की नज़दीकियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ तौर पर किनारा कर लिया और कहा कि जो भी अच्छा काम करता है, उसकी तारीफ होनी चाहिए. वक्त-बे-वक्त बीजेपी और कांग्रेस की तारीफों के उदाहरण देते हुए उन्होंने किसी और पार्टी से किनारा कर लिया और शेर-ओ-शायरी के जरिए आम आदमी पार्टी पर लगातार हमलावर रहे.
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