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6 साल में मोदी सरकार कश्मीरी पंडितों के लिए सिर्फ 15 फीसदी घर ही बना पाई!

इन आवासों के जरिए ही कश्मीरी पंडितों को घाटी में दोबारा बसाया जाएगा.

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विरोध प्रदर्शन करते Kashmiri Pandit. (सांकेतिक फोटो: इंडिया टुडे)
कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandit) के लिए ट्रांजिट आवास बनाने के संबंध में संसद की एक स्थाई समिति ने असंतुष्टि जताई है. संसदीय समिति की तरफ से कहा गया है कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए ट्रांजिट आवास निर्माण का कार्य अभी तक केवल 15 फीसदी ही पूरा हुआ है. यह ट्रांजिट निवास प्रोजेक्ट कश्मीरी पंडितों के घाटी में पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है. यहां से ही कश्मीरी पंडित स्थाई तौर पर घाटी में फिर से बसेंगे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये रिपोर्ट गृह मंत्रालय पर संसद की स्थाई समिति ने पेश की है. समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए कहा,
"कश्मीरी पंडितों के लिए भविष्य में कुल 2,200 ट्रांजिट निवास उपलब्झ कराए जाने हैं. हालांकि, यह पता चला है कि ऐसे करीब 50 फीसदी ट्रांजिट निवास का निर्माण कार्य अभी बिल्कुल शुरुआती दौर में है. समिति को लगता है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जानी चाहिए और नियमित तौर पर इसकी मॉनीटरिंग होनी चाहिए."
रिपोर्ट पेश करते हुए समिति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एक समय निश्चित करने के लिए कहा है. इस समिति की अध्यक्षता कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा सांसद आनंद शर्मा कर रहे हैं. 2015 में हुई थी घोषणा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015 में केंद्र सरकार ने कश्मीरी पंडितों के लिए 6 हजार ट्रांजिट निवास बनाने की घोषणा की थी. हालांकि, काम बहुत ही धीमे हो रहा है. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने समिति को बताया कि ऐसे 849 निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, वहीं 176 लगभग पूरे होने वाले हैं. मंत्रालय की तरफ से कहा गया,
"1,200 यूनिट्स का निर्माण जारी है. 288 यूनिट्स के लिए ठेका निकाला जा चुका है. 3,487 यूनिट्स के लिए जमीन की पहचान कर ली गई है."
इससे पहले कश्मीरी पंडितों के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यसभा को एक जानकारी दी. मंत्रालय की तरफ से राज्यसभा को बताया गया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी से कोई भी कश्मीरी पंडित विस्थापित नहीं हुआ है. मंत्रालय ने ये भी बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से 30 नवंबर 2021 तक 366 आतंकियों को मार गिराया गया है. वहीं 96 नागरिकों की जान गई है और 81 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं. . इससे पहले खबर आई थी कि कश्मीर घाटी में आतंकी हमलों में कश्मीरी पंडित को निशाना गया. कश्मीरी पंडित के साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूरों की भी हत्या की गई. वहीं जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने इस साल सितंबर में कश्मीरी पंडितों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट की तरफ से कहा गया था कि कश्मीर में रहने वाला हर हिंदू कश्मीरी पंडित नहीं है. कोर्ट की तरफ से यह भी कहा गया कि कोई दूसरा समुदाय कश्मीरी पंडितों से जुड़ी विशेष रोजगार योजनाओं का लाभ नहीं ले सकता. हाई कोर्ट ने यह तक कहा कि कश्मीरी पंडित एक अलग पहचान वाला समुदाय है, जो घाटी में रहने वाले राजपूतों के अलावा ब्राह्मणों से भी अलग है. हाई कोर्ट ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कश्मीरी पंडित वो समुदाय है जो कश्मीरी ब्राह्मण हैं और कश्मीरी बोलते हैं, जो लंबे समय से घाटी में रह रहे हैं. उनकी परंपराएं, रहन-सहन, पहनावा उनकी पहचान है जो उन्हें अन्य हिंदुओं से अलग करती है.

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