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MBA, BTech, CA जैसी डिग्रियां खो रही अपनी चमक, ये कोर्स करने वालों की अब क्या वैल्यू है?

मिडिल क्लास भारतीय परिवारों का सपना होता है कि उनके बच्चे MBA, B.Tech और CA जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज में एडमिशन लें. ताकि भविष्य में उनको एक अच्छी नौकरी की गारंटी हो जाए. लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट उनकी निराशा बढ़ाने वाली है.

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MBA, इंजीनियरिंग और CA जैसी महंगी डिग्रियां अच्छी नौकरी नहीं दिला पा रहीं. (AI Image, इंडिया टुडे)

भारतीय परिवारों का अपने जियालों के लिए एक सेट फॉर्मूला है. खूब पढ़ाई करो. एक सम्मानित डिग्री हासिल करो. फिर उसके सहारे एक अच्छी नौकरी लो. बस लाइफ सेट. इस फॉर्मूले के लिए पैरेंट्स अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं. करियर, सपने और बचत. यहां तक कि कई लोग कर्ज में चले जाते हैं. ताकि उनके बच्चे इंजीनियरिंग या फिर एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन ले पाएं. 

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इस त्याग के पीछे पैरेंट्स का एक स्वार्थ होता है. इन प्रोफेशनल कोर्स से मिलने वाला रिटर्न. यानी एक अच्छी नौकरी. लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि ये कोर्स अब कई छात्रों के लिए उतने कारगर नहीं रहे. डिग्रियां बेकार तो नहीं जातीं, लेकिन ठीक-ठाक निवेश के बाद प्लेसमेंट और पैकेज के लेवल पर उम्मीद के मुताबिक रिटर्न मिलता नहीं दिख रहा है.

फाइनेंस ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरिंग, एमबीए और सीए जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज में भारी भरकम इन्वेस्ट करने वाले परिवारों को उस तरह का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) नहीं मिल रहा है. रिपोर्ट बताती है कि कई परिवार इन डिग्रियों के लिए 30 से 40 लाख रुपये खर्च करते हैं, लेकिन कोर्स करने के बाद छात्रों को सालाना 4 से 6 लाख की शुरुआती प्लेसमेंट के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है.

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महंगी होती उच्च शिक्षा, सैलरी ग्रोथ की धीमी रफ्तार और स्किल सेट में बढ़ता अंतर कई लोकप्रिय डिग्रियों की वैल्यू कम कर रहा है. रिपोर्ट बताती है कि मुंबई के मिड-रेंज प्राइवेट कॉलेज से चार साल का बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) कोर्स करने के लिए लगभग 17.30 लाख की फीस चुकानी होती है. इसमें स्कूली पढ़ाई का खर्चा जोड़ दें तो इन्वेस्टमेंट लगभग 34 लाख तक पहुंच जाता है. जबकि एक सॉफ्टवेयर डेवलपर 4.74 लाख रुपये की औसत सालाना सैलरी पर नौकरी की शुरुआत करता है. इसमें अगर महंगाई और बाकी दैनिक खर्चे जोड़ दें तो लागत की वसूली में 20 साल से ज्यादा का समय लग जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक देश में AICTE (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) से मान्यता प्राप्त मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) कराने वाले संस्थानों की संख्या साल 2021-22 में 3,095 थी. साल 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 3,465 हो गई. लेकिन जिस तरह से संस्थानों की संख्या बढ़ी है, उस तरह से क्वालिटी जॉब क्रिएशन नहीं बढ़ा है. साल 2024 में टॉप नौ बिजनेस स्कूलों में से सात में प्लेटसमेंट सैलरी (पैकेज) में गिरावट आई है. IIM इंदौर में साल-दर-साल प्लेसमेंट सैलरी में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई है.

इस रिपोर्ट में ‘अनस्टॉप टैलेंट रिपोर्ट’ 2025 का भी जिक्र किया गया है. इसके मुताबिक 46 प्रतिशत बिजनेस स्कूल ग्रैजुएट और 83 प्रतिशत इंजीनियरिंग ग्रैजुएट को कोर्स खत्म होने के तुरंत बाद इंटर्नशिप या नौकरी नहीं मिलती. रिपोर्ट बताती है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की फील्ड में भी मारामारी बढ़ गई है. साल 2019 में छह लाख स्टूडेंट्स ने सीए का एग्जाम दिया था. साल 2025 में ये आंकड़ा बढ़ कर 12 लाख हो गया. इसके चलते कंपटीशन काफी बढ़ गया है. सेमी-क्वालिफाइड कैंडिडेट्स को एंट्री लेवल पर 3 से 4 लाख की नौकरियां ही मिल पा रही हैं.

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