कर्नाटक पुलिस (Karnataka Police) ने जगद्गुरु मुरुगराजेंद्र विद्यापीठ मठ के महंत शिवमूर्ति मुरुगा शरनारु (Shivamurthy Muruga) को चित्रदुर्ग में दो नाबालिग लड़कियों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चित्रदुर्ग के SP परशुराम ने महंत की गिरफ्तारी की पुष्टि की. उन्होंने कहा,
कर्नाटक: बच्चियों ने लगाया था यौन शोषण का आरोप, लिंगायत मठ का महंत शिवमूर्ति मुरुगा अरेस्ट
आरोप है कि नाबालिग बच्चियों का साल 2019 से यौन शोषण हो रहा था.


'महंत को गिरफ्तार कर लिया गया है और इसके आगे की प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई होगी. अभी आरोपी से सवाल-जवाब किया जा रहा है.'
वहीं कर्नाटक के एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) आलोक कुमार ने कहा,
‘नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के आरोपी शिवमूर्ति मुरुगा शरनारु को गिरफ्तार कर लिया गया है.’
इससे पहले मैसूर पुलिस ने 26 अगस्त को शिवमूर्ति मुरुगा शरनारु के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत बलात्कार के संबंध में शिकायत दर्ज की थी.
दो लड़कियों ने राज्य बाल कल्याण समिति के सदस्यों को बताया था कि महंत ने एक जनवरी, 2019 से 6 जून, 2022 के बीच उनका यौन उत्पीड़न किया था. बाद में ये मामला चित्रदुर्ग जिला पुलिस को सौंप दिया गया था.
इस मामले को लेकर महंत ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी और इस मामले में एक सितंबर को अदालत ने सुनवाई अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी. कर्नाटक पुलिस जिस महंत के खिलाफ जांच कर रही है, वो राज्य के लगभग तीन हजार लिंगायत मठों में सबसे प्रमुख में से एक है.
कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत मठों का बड़ा प्रभाव है. मौजूदा मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से ही आते हैं. बताया जाता है कि कर्नाटक की राजनीति में कोई दल या नेता ऐसा नहीं है, जो लिंगायत मठों के चक्कर न लगाता हो.
NGO तक पहुंचीं बच्चियांजगद्गुरु मुरुगराजेंद्र विद्यापीठ मठ कर्नाटक के चित्रदुर्ग में स्थित है. महंत के खिलाफ आरोप लगाने वाली छात्राएं इसी मठ के एक स्कूल के हॉस्टल में रह रही थीं. छात्राएं किसी तरह ढाई सौ किलोमीटर दूर मैसूर पहुंची. समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक जब एक ऑटो वाले को उन्होंने अपनी आपबीती बताई, तो उसने उन्हें ''ओडनादि सेवा संम्सथे'' नाम के एक NGO पहुंचा दिया. ये संस्था ह्यूमन ट्रैफिकिंग और यौन शोषण से जुड़े मामलों में महिलाओं और बच्चों को सहायता देती है.
रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त की रात को बच्चियों ने शोषण की बात NGO के अधिकारियों को बताई और मामला मैसूर जिला बाल कल्याण समिति के संज्ञान में लाया गया. और फिर समिति ने पुलिस में तहरीर दी, जिसके बाद ''प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेस (POCSO)एक्ट की धाराओं में विधिवत FIR दर्ज की गई. पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक छात्राओं की उम्र 15 और 16 साल है. और यौन शोषण 2019 से चला आ रहा है.
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