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कंगना ने किसान आंदोलन पर ऐसा दावा कर दिया कि ट्वीट ही डिलीट करना पड़ा!

किसान तीन कृषि कानूनों का लगातार विरोध कर रहे हैं.

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कंगना रनौत (बाएं) ने उस ट्वीट को रीट्वीट किया, जिसमें शाहीन बाग़ की बिलकीस दादी और एक वृद्ध महिला को एक ही बताया जा रहा था. फोटो: India Today/Twitter Screenshot from Archive link
तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में हरियाणा-पंजाब-दिल्ली बॉर्डर से किसानों के प्रदर्शन की तस्वीरें लगातार आ रही हैं. दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर किसान जमा हैं. साथ ही इजाज़त मिलने के बाद देश की राजधानी में भी किसान जुट रहे हैं. किसानों को समर्थन मिल रहा है लेकिन एक ऐसा भी वर्ग है, जो कह रहा है कि किसानों को 'गुमराह' किया जा रहा है.
इसी बीच अभिनेत्री कंगना रनौत ने अधिवक्ता गौतम यादव नाम के ट्विटर अकाउंट का एक ट्वीट रीट्वीट किया, जिसे हटा लिया गया है. गौतम यादव के ट्वीट में दो वृद्ध महिलाओं की फोटो दिख रही है. एक शाहीन बाग़ आंदोलन की चर्चित 'बिलकिस दादी' और दूसरी एक और वृद्ध महिला हैंं, जो किसान प्रोटेस्ट में शामिल हैं. दावा किया गया कि ये दोनों महिलाएं एक ही हैं और इन्हें प्रदर्शन के लिए पैसे दिए जा रहे हैं. कंगना ने इसे रीट्वीट करते हुए लिखा,
हा हा हा...ये वही दादी है जो सबसे मजबूत भारतीयों के तौर पर टाइम मैगज़ीन में छपी थीं...और वो 100 रुपए में उपलब्ध हैं. पाकिस्तानी पत्रकारों ने भारत की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय PR को हड़प लिया है. हमें अपने लोग चाहिए, जो हमारे लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बोल सकें.
कंगना का ट्वीट, जिसे हटा लिया गया. फोटो:
कंगना का ट्वीट, जिसे हटा लिया गया. फोटो: ट्विटर

ट्वीट ग़ायब 
चूंकि दावे में कोई दम नहीं था इसलिए कंगना के ट्विटर अकाउंट से ये ट्वीट गायब हो गया लेकिन ये स्क्रीनशॉट और आर्काइव लिंक
का ज़माना है. फैक्ट चेकर वेबसाइट 'ऑल्ट न्यूज़' के प्रतीक सिन्हा ने कंगना के दावे को ग़लत बताया है. साथ ही ऑल्ट न्यूज़ के ही मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्वीट किया कि ये आधारहीन और ग़लत दावा है. इसके अलावा किसान आंदोलन की जिस दादी की फोटो शेयर की गई है, वो एक महीने पहले की है.
मोहम्मद ज़ुबैर का ट्वीट.
मोहम्मद ज़ुबैर का ट्वीट.

मोहम्मद ज़ुबैर ने इस फोटो की तारीख दिखाई.
मोहम्मद ज़ुबैर ने इस फोटो की तारीख दिखाई.

कंगना को बॉम्बे हाईकोर्ट की सलाह
ठीक एक दिन पहले 27 नवंबर को ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंगना रनौत के पक्ष में एक फैसला दिया, लेकिन एक सलाह के साथ. मुंबई स्थित कंगना के दफ्तर पर बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) की तरफ से की गई तोड़-फोड़ को हाईकोर्ट ने खराब नीयत से की गई कार्रवाई बताया. साथ ही कंगना के लिए कहा कि अपनी टिप्पणियों पर उन्हें लगाम लगानी चाहिए. कोर्ट ने कहा,
'ग़ैर जिम्मेदार बयानों को नज़रअंदाज किया जाना चाहिए.'
बॉम्बे हाईकोर्ट की ये लाइन कंगना कहीं नोट करके रख लें तो बेहतर है.

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