उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले एक रैकेट का खुलासा किया है. ट्रांसप्लांट रैकेट से जुड़े पांच डॉक्टरों और एक एंबुलेंस ऑपरेटर को गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही पुलिस को दूसरे जिलों के अस्पतालों के भी इस रैकेट में शामिल होने का शक है.
नोएडा तक फैला कानपुर का किडनी रैकेट, पैसे के लिए डॉक्टरों ने कई गरीबों के पेट फाड़े
उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर में चल रहे एक किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले रैकेट का खुलासा किया है. पुलिस का अनुमान है कि यह रैकेट किडनी डोनर्स को आम तौर पर 5 से 6 लाख रुपये देता था. वहीं किडनी लेने वालों से 60 लाख से 1 करोड़ रुपये की बीच वसूलता था.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को एक सूत्र से अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना मिली. इस सूचना पर कानपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने 29 और 30 मार्च को कल्याणपुर रावतपुर इलाके के तीन अस्पतालों पर रेड की. इसमें आहूजा अस्पताल, प्रिया अस्पताल और मेड लाइफ अस्पताल शामिल हैं.
पुलिस ने इन छापों के जरिए डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और एंबुलेंस ऑपरेटर शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, शिवम अग्रवाल की भूमिका किडनी डोनर्स को लाने वाले बिचौलिये की थी.
इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों से 1 लाख 75 हजार नकद और भारी मात्रा में दवाएं बरामद की हैं. मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि डॉक्टर सुरजीत सिंह आहूजा और उनकी पत्नी प्रीति आहूजा के अस्पताल में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे. अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस को इस अस्पताल में लगभग 7 से 8 अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने के सबूत मिले हैं.
पुलिस ने बताया कि इस रैकेट में शामिल चार और डॉक्टरों को गिरफ्तार करने की कोशिश जारी है. इसके लिए पुलिस की टीमें कई जगहों पर छापेमारी कर रही है. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, किडनी ट्रांसप्लांट के लिए नोएडा से डॉक्टरों की एक टीम कानपुर आई थी. डॉक्टरों के बीच हुई चैट से पुलिस को ये जानकारी मिली.
आठवीं क्लास पास एंबुलेंस ऑपरेटर शिवम अग्रवाल डॉक्टर बनकर आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को बहला फुसलाकर अपने जाल में फंसाता था. पुलिस का अनुमान है कि किडनी डोनर्स को आम तौर पर 5 से 6 लाख रुपये दिए जाते थे. वहीं किडनी लेने वालों से 60 लाख से 1 करोड़ रुपये की बीच वसूले जाते थे.
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टर कपल के अस्पताल में 29 मार्च को एक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था. इस मामले में डोनर देहरादून की MBA सेकेंड ईयर में पढ़ने वाला एक छात्र है. वहीं रिसीवर मुजफ्फरनगर की एक महिला है. किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दोनों को एक दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था. ये अस्पताल भी गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक का है.
फिलहाल अस्पताल में डोनर और रिसीवर दोनों का इलाज चल रहा है. अभी उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस की पूछताछ में छात्र ने बताया कि पढ़ाई की फीस चुकाने के दबाव के चलते उसने किडनी बेचने का फैसला किया था. पुलिस को इस रैकेट में एक बड़े नेटवर्क के शामिल होने का शक है. साथ ही इसमें कई और अस्पताल के शामिल होने का शक है, जिसमें छह अस्पताल कानपुर और एक लखनऊ में है.
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि कानपुर में पिछले दो साल से किडनी ट्रांसप्लांट का रैकेट चल रहा है. शहर के कई प्राइवेट हॉस्पिटल्स में अब तक 50 अवैध ट्रांसप्लांट हो चुके हैं. पुलिस ने बताया कि साउथ अफ्रीका की एक महिला भी किडनी रिसीव करने वालों में शामिल है. उसका ट्रांसप्लांट 4 मार्च को हुआ था.
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